आशुतोष महाराज को जेड सुरक्षा पर नोटिस
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जालंधर जिले में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल के प्रमुख आशुतोष महाराज की देह की जेड श्रेणी सुरक्षा वापस लेने की मांग को लेकर वीरवार को एक जनहित याचिका दायर की गई।
याचिका पर सुनवाई करते पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस आशुतोष मोहंता और जस्टिस एचएस सिद्धू की बेंच ने पंजाब के मुख्य सचिव, डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
दिलबाग सिंह ने अपनी याचिका में सवाल उठाया है कि एक ओर तो शव को जेड सुरक्षा दी गई है, दूसरी ओर गलियों व सड़कों पर उपयुक्त पेट्रोलिंग के अभाव में आम व्यक्ति असुरक्षित है।
जेड श्रेणी की सुरक्षा वापस लेने की मांग
पंजाब सरकार ने इस बारे में हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर कर बताया था कि 28 जनवरी की रात सवा दो बजे सतगुरु प्रताप सिंह अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों की राय अनुसार आशुतोष महाराज क्लीनिकली डेड हैं।
यह रिपोर्ट ड्यूटी मजिस्ट्रेट, नकोदर के डीएसपी और एसएचओ नूरमहल ने तैयार की थी। इसके 168 दिन बीत जाने के बावजूद वहां सीआरपीएफ और पंजाब पुलिस के जवान तैनात हैं, जहां आशुतोष महाराज के शरीर को रखा गया है।
याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि आशुतोष महाराज के शव की सुरक्षा वापस लेने के लिए सरकार को 17 जुलाई को एक मांग पत्र दिया गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण अब हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
याची ने अदालत से मांग की कि आशुतोष महाराज की सुरक्षा वापस लेने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिया जाएं और अब तक इस सुरक्षा व्यवस्था पर आए खर्च की वसूली दिव्य ज्योति जागृति संस्थान से की जाए।