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महिला पुलिसकर्मियों के शोषण की बात सही, हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस

Fri, 01 Apr 2016 10:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 01 Apr 2016 10:58 AM IST
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notice to administration on issue of sexual harassment of chandigarh womens police
प्रताड़ना - फोटो : demo pics

सेक्सुअल हरास्मेंट ऑफ वुमन ऐट वर्क प्लेस एक्ट का सही तरीके से पालन न होने का आरोप लगाती एक जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चंडीगढ़ पुलिस के सिपाही जगजीत सिंह की ओर से दायर याचिका में आरोप है कि एक्ट के तहत महिला सिपाहियों को शिकायत करने के लिए कोई प्लेटफार्म उपलब्ध नहीं है। जबकि एक सर्वे में सामने आ चुका है कि वह शोषण का शिकार होती हैं।

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यह याचिका पहले दायर की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने एडवोकेट बलदेव कपूर को एमिकस क्यूरी लगाते हुए सर्वे का सच जानने और एक्ट के प्रावधानों के पालन पर सुझाव मांगा था। एडवोकेट कपूर ने वीरवार को हाईकोर्ट को बताया कि सर्वे सही है।
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याची ने करीब 250 महिला पुलिसकर्मियों से फोन पर बात कर उनकी पीड़ा जानने की कोशिश की थी। इस दौरान यह नहीं बताया गया कि इस विषय पर कोई याचिका दायर की जाएगी। कोर्ट को यह भी बताया गया कि उपरोक्त एक्ट के तहत चंडीगढ़ पुलिस में ऐसी किसी कमेटी का गठन नहीं हुआ, जो महिला पुलिसकर्मियों की शिकायत सुने और उसका निवारण करे। 

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कार्यस्‍थल पर सुविधा नहीं, महिला पुलिसकर्मियों को परेशानी झेलनी पड़ती है

notice to administration on issue of sexual harassment of chandigarh womens police
कोर्ट, कंज्यूमर फोरम - फोटो : फाइल फोटो

बेंच ने नोटिस जारी कर यूटी प्रशासन से पूछा है कि एक्ट का पालन पूरे तौर पर क्यों नहीं हो सका। जगजीत सिंह ने एडवोकेट बीएस मक्कड़ के माध्यम से दायर याचिका में कहा था कि थानों में अलग शौचालयों की कमी है। ऐसे में महिला पुलिसकर्मी और महिला बंदियों को परेशानी होती है।

खासकर अस्तित्व में आए पांच नए थानों में अभी तक महिला हेल्प डेस्क नहीं है। यहां शौचालय का भी अलग प्रबंध नहीं है। दूसरा तथ्य उजागर किया गया था कि महिला पुलिसकर्मियों को रात में ड्यूटी देनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें देर रात को अपने वाहनों से ही जाना पड़ता है। दिन के समय ट्रैफिक ड्यूटी दे रही महिला पुलिसकर्मियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।

इसके अलावा कहा गया है कि कैदियों को लाने ले जाने में भी महिला पुलिस कर्मियों का शोषण होता है। कैदी वाहनों में गालियां बकते आते हैं और महिला पुलिस क र्मियों को यह सब झेलना पड़ता है। दलील दी थी कि उपरोक्त एक्ट के तहत किसी इंप्लायर को महिला स्टाफ के साथ शोषण की रोकथाम के लिए उचित व्यवस्था करनी अनिवार्य है, लेकिन चंडीगढ़ में इस एक्ट का पालन नहीं हो पा रहा। याचिका में मांग की गई है कि एक्ट के प्रावधानों का सही पालन सुनिश्चित बनाया जाना चाहिए, ताकि महिला पुलिस कर्मियों को शोषण का शिकार न होना पड़े।

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