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पीयू में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों से सौतेला व्यवहार, नहीं हो रही घरों की मरम्मत
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में ब्लैक सी के ग्रुप- बी कर्मचारियों के घरों की हालत जर्जर हो रही है। ग्रुप बी कर्मचारी संजीव शर्मा ने बताया कि हमारे घरों के आंगन में टाइलें लगाने के लिए पीयू ने लगभग एक साल पहले 2 करोड़ का बजट बनाया था। इसे घर के बाहर आंगन में मरम्मत और इंटरलॉकिंग टाइलें लगवाई जानी थी। लेकिन पीयू प्रशासन ने अभी तक इस प्रस्ताव को पास कर टेंडर नहीं करवाया है।
कर्मचारी संजीव वर्मा ने बताया कि इसको लेकर हम ब्लॉक-सी के निवासी कई बार वीसी और रजिस्ट्रार को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन उनकी तरफ से न तो कोई जवाब दिया जाता है और न ही कार्रवाई की जाती है। ब्लॉक सी में 196 घर हैं। इनमें टेक्निकल और क्लर्क रहते हैं। संजीव ने बताया कि शैक्षणिक स्टाफ के घरों के बाहर और अंदर दोनों तरफ पीयू की ओर से टाइलें लगवाई जा रही हैं। वहीं गैर शैक्षणिक स्टाफ को जर्जर मकानों में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
वेतन से 5 हजार पीयू को देते हैं घर का किराया
संजीव ने बताया कि शैक्षणिक कर्मचारियों की तरह अपने वेतन से घर का किराया कट करवाते हैं। हमारी तनख्वाह से 5 हजार के करीब घर के किराए के रुपए काटे जाते हैं। उन्होंने बताया कि पीयू प्रशासन के अधिकारी गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की मांगों को हमेशा लटकाते रहते हैं। पत्राचार करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं की जाती। समस्याओं के हल के लिए जो कमेटी बनती है उसमें भी शैक्षणिक कर्मचारी ही रहते हैं। कमेटी में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का कोई प्रतिनिधि नहीं होने के कारण मांगों पर कोई विचार नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की है कि गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के प्रतिनिधि को भी कमेटी का हिस्सा बनाया जाए।
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कर्मचारी संजीव वर्मा ने बताया कि इसको लेकर हम ब्लॉक-सी के निवासी कई बार वीसी और रजिस्ट्रार को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन उनकी तरफ से न तो कोई जवाब दिया जाता है और न ही कार्रवाई की जाती है। ब्लॉक सी में 196 घर हैं। इनमें टेक्निकल और क्लर्क रहते हैं। संजीव ने बताया कि शैक्षणिक स्टाफ के घरों के बाहर और अंदर दोनों तरफ पीयू की ओर से टाइलें लगवाई जा रही हैं। वहीं गैर शैक्षणिक स्टाफ को जर्जर मकानों में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
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वेतन से 5 हजार पीयू को देते हैं घर का किराया
संजीव ने बताया कि शैक्षणिक कर्मचारियों की तरह अपने वेतन से घर का किराया कट करवाते हैं। हमारी तनख्वाह से 5 हजार के करीब घर के किराए के रुपए काटे जाते हैं। उन्होंने बताया कि पीयू प्रशासन के अधिकारी गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की मांगों को हमेशा लटकाते रहते हैं। पत्राचार करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं की जाती। समस्याओं के हल के लिए जो कमेटी बनती है उसमें भी शैक्षणिक कर्मचारी ही रहते हैं। कमेटी में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का कोई प्रतिनिधि नहीं होने के कारण मांगों पर कोई विचार नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की है कि गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के प्रतिनिधि को भी कमेटी का हिस्सा बनाया जाए।
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