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OP चौटाला को हाईकोर्ट से न पैरोल मिली और न फरलो मंजूर हुई, ये रही वजह

Thu, 02 Mar 2017 10:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/ नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/ नई दिल्ली Updated Thu, 02 Mar 2017 10:41 AM IST
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no parol to om parkash chautala from delhi highcourt, haryana jbt recruitment scam
कार्यकर्ताओं से मिले इनेलो सुप्रीमो - फोटो : अमर उजाला
शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा काट रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को हाईकोर्ट से न पैरोल मिली और न ही फरलो को मंजूरी। उन पर पेरौल की तय शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है।
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उनको अदालत ने 4 मार्च तक पैरोल प्रदान की थी। इतना ही अदालत ने चौटाला को जेल प्रशासन द्वारा प्रदान तीन सप्ताह की फरलो भी रद्द कर दी है। अदालत ने उन्हें तुरंत समर्पण करने का निर्देश भी दिया।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने अपने फैसले में कहा कि चौटाला ने अपनी बीमारी को आधार बना अदालत को बहकाया है। उन्होंने कोर्ट के आदेश का अनादर किया है। अदालत ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट व प्रकाशित फोटो को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि चौटाला चुस्त-दुरुस्त हैं और समय-समय पर बैठकें कर रहे हैं।
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2013 में भी रद्द हो गई थी अंतरिम जमानत

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पूर्व सीएम चौटाला - फोटो : अमर उजाला
अदालत ने कहा कि 2013 में भी उनकी अंतरिम जमानत इसलिए रद्द हो चुकी है कि वह स्वास्थ्य कारणों से जमानत पर थे लेकिन उस समय भी वह राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हुए और इनेलो का प्रचार किया।

अदालत ने कहा कि पैरोल चौटाला को उनकी उम्र व बीमारी के चलते दी गई थी, जिससे कि वह अपना इलाज करवा सकें। लेकिन उन्होंने उन पर किए गए विश्वास को तोड़ा है। चौटाला ने अदालत को धोखा दिया है और इसे बदला नहीं जा सकता।

अदालत ने चौटाला को तुरंत प्रभाव से तिहाड़ जेल अधीक्षक के समक्ष समर्पण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चौटाला द्वारा पैरोल की शर्तों के उल्लंघन के संबंध में की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए यह फैसला दिया है।

शिकायत में याची ने ये सब कहा

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chautala
शिकायतकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय व हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति विपिन सांघी को भी फोटो सहित शिकयत भेजी थी। शिकायत में कहा गया था कि चौटाला पैरोल पर सार्वजनिक बैठकें कर रहे हैं। चौटाला के वकील अमित साहनी ने इसका विरोध किया।

उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट यह नहीं बतातीं कि चौटाला ने बैठकें की। बल्कि रिपोर्ट में उन इलाकों का जिक्र है जो उनके गांव के रास्ते में पड़ते हैं और वहां जाते हुए रास्ते में लोग उनसे मिलने के लिए आए थे।

6 फरवरी को चौटाला को अपने परिवार के सदस्यों से मिलने के अलावा अपना सामाजिक दायित्व निभाने के लिए पैरोल प्रदान की गई थी। जेबीटी शिक्षक भर्ती घोटाले में ओपी चौटाला व उनके पुत्र अजय चौटाला को निचली अदालत ने दस-दस वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय ने भी सजा को बरकरार रखा था।
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