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चुनाव से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार तक कैप्टन ने अपनी चलाई, किनारे हुई हाईकमान
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 17 Mar 2017 10:17 AM IST
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Captain Amarinder Singh
- फोटो : अमर उजाला
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चुनाव लड़ने से लेकर मंत्रिमंडल का विस्तार कने तक मुख्चमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी मर्जी चलाई, वहीं पार्टी हाईकमान किनारे ही हो गई। अपने दम पर पंजाब का किला फतह करने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आलाकमान को क्षेत्रीय क्षत्रपों पर भरोसा जताने के लिए नजीर पेश की है।
कैप्टन के मंत्रिमंडल विस्तार में आलाकमान का बहुत ज्यादा दखल नजर नहीं आया। हालांकि, नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी को पहले विस्तार में जगह मिली है, लेकिन राहुल गांधी की यूथ ब्रिगेड से राजा वडिंग को मंत्री बनाने की जो चर्चा थी, वह हुआ नहीं।
हालांकि, दूसरा विस्तार होना अभी बाकी है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में कैप्टन ने अपने नजदीकियों के साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को तरजीह देने का प्रयास किया है। पंजाब का यह पहला ऐसा चुनाव रहा, जिसमें आलाकमान को न चाहते हुए भी कैप्टन को प्रदेश अध्यक्ष बनाना पड़ा।
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टिकट वितरण से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार तक अपनी चलाने के बाद भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए नवजोत सिंह सिद्धू के डिप्टी सीएम बनने की राह में रोड़ा भी कैप्टन अमरिंदर ने अटकाया है।
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कैप्टन के मंत्रिमंडल विस्तार में आलाकमान का बहुत ज्यादा दखल नजर नहीं आया। हालांकि, नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी को पहले विस्तार में जगह मिली है, लेकिन राहुल गांधी की यूथ ब्रिगेड से राजा वडिंग को मंत्री बनाने की जो चर्चा थी, वह हुआ नहीं।
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हालांकि, दूसरा विस्तार होना अभी बाकी है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में कैप्टन ने अपने नजदीकियों के साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को तरजीह देने का प्रयास किया है। पंजाब का यह पहला ऐसा चुनाव रहा, जिसमें आलाकमान को न चाहते हुए भी कैप्टन को प्रदेश अध्यक्ष बनाना पड़ा।
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टिकट वितरण से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार तक अपनी चलाने के बाद भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए नवजोत सिंह सिद्धू के डिप्टी सीएम बनने की राह में रोड़ा भी कैप्टन अमरिंदर ने अटकाया है।
हिमाचल जीता जागता उदाहरण, अब नजरें हरियाणा पर
शपथ ग्रहण समारोह की झलकियां
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब के अलावा हिमाचल दूसरा जीता जागता उदाहरण है, जहां वीरभद्र सिंह को तमाम मुकदमों और उम्र के पड़ाव को देखने के बावजूद कांग्रेस आलाकमान को आगे करना पड़ा और जीत हासिल हुई। अब पंजाब के बाद आलाकमान की नजरें पड़ोसी राज्य हरियाणा की तरफ हैं। लिहाजा, यह कहना मुश्किल नहीं है कि आलाकमान को यहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा पर भरोसा करना पड़ सकता है।
ऐसे साधा मंत्रिमंडल का संतुलन
मालवा - कैप्टन अमरिंदर सिंह, साधू सिंह धरमसोत, ब्रह्म मोहिंदरा, रजिया सुल्ताना, मनप्रीत बादल, चरणजीत सिंह चन्नी
दोआबा - राणा गुरजीत सिंह
माझा - अरुणा चौधरी, तृप्त रजिंदर बाजवा, नवजोत सिद्धू
ऐसे साधा मंत्रिमंडल का संतुलन
मालवा - कैप्टन अमरिंदर सिंह, साधू सिंह धरमसोत, ब्रह्म मोहिंदरा, रजिया सुल्ताना, मनप्रीत बादल, चरणजीत सिंह चन्नी
दोआबा - राणा गुरजीत सिंह
माझा - अरुणा चौधरी, तृप्त रजिंदर बाजवा, नवजोत सिद्धू