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विभागीय कार्रवाई का नहीं डर... चेतावनी के बावजूद चालक निजी होटल-ढाबों पर रोक रहे सीटीयू की बसें

Mon, 09 Aug 2021 02:18 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 09 Aug 2021 02:18 AM IST
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No fear of departmental action... Despite warnings, drivers of CTU buses are stopping at private hotels and dhabas
चंडीगढ़। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) के बस चालकों को विभागीय कार्रवाई का भी डर नही है। परिवहन विभाग के आदेश और चेतावनी के बावजूद चंडीगढ़-दिल्ली रूट पर सीटीयू बसों को निजी होटल व ढाबों पर रोका जा रहा है। यहां चालक-परिचालकों की सांठगांठ से यात्रियों को लूटा जा रहा है। कुछ हफ्ते पहले भी विभाग ने सीटीयू के चालकों को ऐसा न करने से चेताया था, लेकिन अभी भी दिल्ली रूट पर ये खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
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12 दिसंबर 2019 को परिवहन विभाग के निदेशक की तरफ से लिखित में आदेश जारी किया गया था कि उन्हें जानकारी मिली है कि लंबी दूरी पर जाने वाली बसों को निजी ढाबों पर रोका जा रहा है, जहां यात्रियों से खाने-पीने केसामानों के लिए ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। इसलिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान व अन्य राज्यों के लिए जाने वाली बसों को सिर्फ सरकारी ढाबों, होटल व रेस्टोरेंट पर ही रोका जा सकेगा। आदेश में यह भी कहा गया कि अगर निजी ढाबों पर बस ठहरी पाई जाती हैं तो चालक-परिचालकों की सांठगांठ मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि इस आदेश की सीटीयू के चालक पालना नहीं कर रहे हैं और अभी भी निजी ढाबों पर ही बसों को रोका जा रहा है। दिल्ली, नारनौल, रेवाड़ी, रोहतक आदि स्टेशनों पर जाने वाली बसें निजी ढाबों पर रुक रही हैं। अभी भी पीपली और नीलोखेड़ी के बीच आने वाले बड़े और महंगे ढाबों पर बसें रुक रही हैं। इन ढाबों के संचालक यात्री से मनमाना शुल्क खाने-पीने के पदार्थों पर वसूल कर उनका शोषण कर रहे हैं। इस मामले पर परिवहन विभाग के सचिव मनदीप सिंह बराड़ का कहना है कि अगर ऐसा हो रहा है तो ये गलत है। वह इन मामलों की जांच कराएंगे।
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मिलीभगत से चल रहा है खेल
सीटीयू के अधिकारियों के पास शिकायतें आ रही थी कि मिलीभगत कर बसों के चालक व परिचालक निजी ढाबों पर खाने-पीने के लिए बसें रोकते हैं। आरोप है कि ढाबा मालिक चालक व परिचालक को मुफ्त खाना खिलाते हैं जबकि इस सेवा की एवज में ढाबा मालिक सवारियों को खाने-पीने का महंगा सामान बेचते हैं। सवारियों द्वारा खाने व खरीदारी करने बाद पैसा अधिक होने का विरोध करने पर ढाबे पर मौजूद लोग झगड़ा करने को उतारू हो जाते हैं। आरोप है कि निजी ढाबों पर रुकने के इस खेल में रोजाना हजारों रुपयों का हेरफेर होता है।
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