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Chandigarh News: कुत्ते के काटने पर प्रति दांत 10 हजार मुआवजा नहीं, डीसी व निगम आयुक्त को अवमानना नोटिस
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चंडीगढ़। कुत्ते के काटने के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद तय 10 हजार रुपये न्यूनतम मुआवजा न मिलने को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के डीसी और निगम आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किया है। साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो उन्हें अवमानना की कार्रवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर रहना होगा।
याचिकाकर्ता मोहन सिंह जसवाल ने गली के कुत्ते के काटने पर मुआवजे के लिए यूटी प्रशासन से संपर्क किया था। आवेदन के बावजूद प्रशासन ने उसके दावे पर कोई विचार नहीं किया। इसके बाद याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। याचिका में बताया गया कि अधिकारियों का कहना था कि आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर अनुरोध को भारतीय चुनाव आयोग को भेज दिया गया है। याची ने कहा कि प्रशासन केवल अपनी खाल बचाने के लिए आदर्श आचार संहिता की आड़ ले रहा है, क्योंकि आदर्श आचार संहिता का बहाना बनाकर न्यायिक आदेशों के पालन में बाधा नहीं डाली जा सकती।
याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि 23 सितंबर तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो डीसी अवमानना की कार्रवाई के लिए अदालत में खुद हाजिर रहें। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायालय गैर-अनुपालन के लिए किसी भी बहाने को स्वीकार नहीं करेगा, भले ही वह सत्य तथ्यों पर आधारित हो।
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याचिकाकर्ता मोहन सिंह जसवाल ने गली के कुत्ते के काटने पर मुआवजे के लिए यूटी प्रशासन से संपर्क किया था। आवेदन के बावजूद प्रशासन ने उसके दावे पर कोई विचार नहीं किया। इसके बाद याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। याचिका में बताया गया कि अधिकारियों का कहना था कि आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर अनुरोध को भारतीय चुनाव आयोग को भेज दिया गया है। याची ने कहा कि प्रशासन केवल अपनी खाल बचाने के लिए आदर्श आचार संहिता की आड़ ले रहा है, क्योंकि आदर्श आचार संहिता का बहाना बनाकर न्यायिक आदेशों के पालन में बाधा नहीं डाली जा सकती।
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याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि 23 सितंबर तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो डीसी अवमानना की कार्रवाई के लिए अदालत में खुद हाजिर रहें। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायालय गैर-अनुपालन के लिए किसी भी बहाने को स्वीकार नहीं करेगा, भले ही वह सत्य तथ्यों पर आधारित हो।
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