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ट्राइसिटी में बिना हाइड्रो टेस्टिंग के दौड़ रहे हजारों सीएनजी वाहन, बना रहता लीकेज का खतरा
Sat, 23 Nov 2019 12:32 PM IST
खुशबू गोयल
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 23 Nov 2019 12:32 PM IST
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फाइल फोटो
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ट्राइसिटी में हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर नहीं होने के कारण कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) वाहन बिना टेस्टिंग के सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं। सिलिंडर टेस्टिंग नहीं होने के कारण हमेशा गैस लीकेज का खतरा बना रहता है, जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। जानकारों के मुताबिक ऐसे छोटे-बड़े वाहनों की संख्या करीब 13000 है।
दिल्ली के बाद अब चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में भी सीएनजी को सरकारें खूब प्रमोट कर रही हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ साल में यहां सीएनजी पंपों की संख्या बढ़कर 16 तक पहुंच गई है। इसके बाद भी अभी तक ट्राइसिटी में एक भी हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर नहीं खोला गया है। इसके कारण यहां बिना टेस्ट किए हुए सीएनजी सिलिंडर, वाहन चालकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
टेस्टिंग नहीं होने से यह भी पता नहीं चल पाता है कि वाहनों में लगा सिलिंडर उपयोग के लिए सही है या नहीं। इसके साथ ही हाईप्रेशर की सीएनजी से हमेशा सिलिंडर फटने का भी खतरा बना रहता है। ट्राइसिटी में अब तक सीएनजी का उपयोग करने वाले वाहनों की संख्या बढ़कर करीब 13000 हो गई है। जिम्मेदार विभाग इस समस्या को स्वीकार तो कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शीघ्र प्रस्ताव प्रशासन को भेजे जाने की बात कह रहे हैं।
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सीएनजी वाहनों की हर तीन साल पर हाइड्रो टेस्टिंग अनिवार्य है। ट्राइसिटी में कोई सेंटर नहीं होने के कारण यह दिक्कत आ रही है। जल्द ही प्रशासन को इसके लिए एक प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
- हरजीत संधू, एडिशनल सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट
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दिल्ली के बाद अब चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में भी सीएनजी को सरकारें खूब प्रमोट कर रही हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ साल में यहां सीएनजी पंपों की संख्या बढ़कर 16 तक पहुंच गई है। इसके बाद भी अभी तक ट्राइसिटी में एक भी हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर नहीं खोला गया है। इसके कारण यहां बिना टेस्ट किए हुए सीएनजी सिलिंडर, वाहन चालकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
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टेस्टिंग नहीं होने से यह भी पता नहीं चल पाता है कि वाहनों में लगा सिलिंडर उपयोग के लिए सही है या नहीं। इसके साथ ही हाईप्रेशर की सीएनजी से हमेशा सिलिंडर फटने का भी खतरा बना रहता है। ट्राइसिटी में अब तक सीएनजी का उपयोग करने वाले वाहनों की संख्या बढ़कर करीब 13000 हो गई है। जिम्मेदार विभाग इस समस्या को स्वीकार तो कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शीघ्र प्रस्ताव प्रशासन को भेजे जाने की बात कह रहे हैं।
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सीएनजी वाहनों की हर तीन साल पर हाइड्रो टेस्टिंग अनिवार्य है। ट्राइसिटी में कोई सेंटर नहीं होने के कारण यह दिक्कत आ रही है। जल्द ही प्रशासन को इसके लिए एक प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
- हरजीत संधू, एडिशनल सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट
दिल्ली जाना मजबूरी
सीएनजी वाहन प्रयोग करने वाले चालकों का कहना है कि वह हाइड्रो टेस्टिंग कराने के लिए मजबूरी में दिल्ली जा रहे हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त समय के साथ ही अतिरिक्त पैसा भी खर्च करना पड़ रहा है।
40 हजार स्क्वेयर फुट चाहिए जगह
सीएनजी हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर खोलने के लिए 40 हजार स्क्वेयर फुट की जगह होनी जरूरी है। ट्राइसिटी में जमीन काफी महंगी होने के कारण भी सेंटर को खोलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। इसके अतिरिक्त महंगी मशीनरी और टेक्निकल स्टाफ भी आवश्यक है।
सीएनजी पंप संचालक भी कर रहे लापरवाही
वाहनों में सीएनजी भरने के दौरान ट्राइसिटी के सीएनजी पंप संचालक भी लापरवाही कर रहे हैं। हाइड्रो टेस्टिंग प्रमाण पत्र बिना देखे ही सीएनजी पंपों पर वाहनों में सीएनजी भरी की जा रही है। बिना प्रमाण पत्र देखे वाहनों को सीएनजी नहीं मिलनी चाहिए।
क्यों जरूरी है हाइड्रो टेस्टिंग
- बिना टेस्टिंग प्रमाण पत्र के वाहन की नहीं होती है फिटनेस जांच
- टेस्टिंग से पता चल जाती है वाहन में लगे सिलिंडर की पावर
- टेस्टिंग से सिलिंडर की लीकेज का चल जाता है पता और दुर्घटना टल सकती है।
40 हजार स्क्वेयर फुट चाहिए जगह
सीएनजी हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर खोलने के लिए 40 हजार स्क्वेयर फुट की जगह होनी जरूरी है। ट्राइसिटी में जमीन काफी महंगी होने के कारण भी सेंटर को खोलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। इसके अतिरिक्त महंगी मशीनरी और टेक्निकल स्टाफ भी आवश्यक है।
सीएनजी पंप संचालक भी कर रहे लापरवाही
वाहनों में सीएनजी भरने के दौरान ट्राइसिटी के सीएनजी पंप संचालक भी लापरवाही कर रहे हैं। हाइड्रो टेस्टिंग प्रमाण पत्र बिना देखे ही सीएनजी पंपों पर वाहनों में सीएनजी भरी की जा रही है। बिना प्रमाण पत्र देखे वाहनों को सीएनजी नहीं मिलनी चाहिए।
क्यों जरूरी है हाइड्रो टेस्टिंग
- बिना टेस्टिंग प्रमाण पत्र के वाहन की नहीं होती है फिटनेस जांच
- टेस्टिंग से पता चल जाती है वाहन में लगे सिलिंडर की पावर
- टेस्टिंग से सिलिंडर की लीकेज का चल जाता है पता और दुर्घटना टल सकती है।