स्मार्ट सिटी का हाल: चंडीगढ़ में एक गांव, जहां 60 साल में भी नहीं चली बस, हमेशा मिलता रहा आश्वासन
सेक्टर-26 के लोगों को साल 1960 में इस गांव में बसाया गया था। पहले गांव की आबादी काफी कम थी। धीरे-धीरे गांव की आबादी ढाई हजार के पार पहुंच गई है। गांव के लोगों को बस पकड़ने के लिए हल्लोमाजरा जाना पड़ता है।
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चंडीगढ़ में सीटीयू की बस सेवा शहर के साथ गांव में भी चरमराई हुई है। चंडीगढ़ बसने के 60 वर्ष बाद भी गांव मक्खनमाजरा के लोगों को बस सेवा नसीब नहीं हुई है, जबकि पड़ोसी गांव रायपुरकलां के लोगों को बस के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। यहां के लोगों ने कई बार अधिकारियों को पत्र लिखा, दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला।
दोनों गांव के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि अभी स्कूल बंद चल रहे हैं, लेकिन स्कूल खुलते ही परेशानी और बढ़ जाएगी। मक्खनमाजरा के पूर्व सरपंच बाबा नैब सिंह ने बताया कि गांव के लोगों को पिछले 60 वर्षों से बस का इंतजार है। सेक्टर-26 के लोगों को साल 1960 में इस गांव में बसाया गया था।
पहले गांव की आबादी काफी कम थी। धीरे-धीरे गांव की आबादी ढाई हजार के पार पहुंच गई है। गांव के लोगों को बस पकड़ने के लिए हल्लोमाजरा जाना पड़ता है। इस दौरान काफी समय खराब होता है और हल्लोमाजरा पहुंचने के लिए लोगों को ऑटो का किराया भी देना पड़ता है। गांव में कई फैक्टरीकर्मी भी काम करते हैं, जिन्हें काम के लिए चंडीगढ़ व पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया में जाना पड़ता है। बसों के नहीं चलने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बस नहीं चलने से गांव के विद्यार्थियों को भी काफी दिक्कतें आती हैं।
बस के लिए आधे घंटे का इंतजार
गांव वालों का कहना है कि ये बस बलटाना भी जाती है। बलटाना से हजारों लोग रोजाना चंडीगढ़ के लिए जाते हैं, लेकिन सिर्फ एक रूट की बसें चलने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों की मांग है कि इस रूट पर अन्य नंबरों की भी बस चलाई जाए। खास तौर पर पीक ऑवर पर बसों के फेरे ज्यादा लगने चाहिए। इससे न सिर्फ लोगों को फायदा होगा बल्कि लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे। इससे सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या का बोझ कम होगा।
क्या कहते हैं लोग
स्कूल खुलने पर लोगों की परेशानी और बढ़ जाएगी। चंडीगढ़ प्रशासन को इस बारे में सोचना चाहिए। ऐसा लगता है कि प्रशासन को शायद इस समस्याओं के बारे में पता नहीं है। यदि बस चलें तो गांव की जनता को काफी फायदा होगा। -अवतार सिंह, निवासी गांव मक्खनमाजरा
बस के लिए पौने घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इस बारे में कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस रूट पर बस यात्रियों की काफी संख्या है। यदि बस के फेरे जल्दी जल्दी लगे तो यात्रियों की बहुत बड़ी समस्या हल हो सकती है। -गुरदीप सिंह, पूर्व सरपंच, गांव रायपुरकलां
ऐसा क्यों है, ये देखा जाएगा। इस रूट पर सवारियों की संख्या की भी जांच की जाएगी। हमारी कोशिश रहती है कि ज्यादा रूटों पर बसें जाएं और यात्रियों को परेशानी न आए। -मनदीप सिंह बराड़, सचिव, परिवहन विभाग