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पंजाबः सरकारी स्कूलों को संवारेंगे एनजीओ, शिक्षा विभाग ने मांगी थी मदद
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 07 Sep 2018 09:44 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षा विभाग ने एनजीओ, चैरिटेबल ट्रस्ट और दानी सज्जनों से स्कूलों की हालत में सुधार को मदद मांगी है। उसका शुरुआती रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा है। कई लोगों ने विभाग से संपर्क करके सहायता करने की पेशकश की है। डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन ने लोगों से अपील की थी। जिसमें कहा गया था कि सरकार शिक्षा के ढांचे और स्तर में सुधार को कोशिशें कर रही है। शिक्षा विभाग द्वारा कई स्कीमें भी शुरू की गई हैं। लेकिन आर्थिक तंगी सबसे बड़ी रुकावट है।
ऐसे में एनजीओ, चैरिटेबल ट्रस्ट और दानी लोग स्कूलों को अडॉप्ट करके बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा में सुधार को लेकर मदद कर सकते हैं। लोग पूरा स्कूल अडॉप्ट करने के अलावा छोटी सहायता भी कर सकते हैं। डीजीएसई की अपील को शुरुआती चरण में ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर और एससीईआरटी के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. मनिंदर सिंह सरकारिया ने बताया कि अब तक करीब 15 एनजीओ और लोग संपर्क कर मदद की पेशकश कर चुकी हैं।
कोई एक-दो स्कूल अडॉप्ट करने को तैयार हैं। तो किसी ने कुछ स्कूलों में सफाई का इंतजाम करने का भरोसा दिया है। जल्द ही उनके साथ मीटिंग कर इसे फाइनल कर दिया जाएगा।
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कनाडा से किया संपर्क
डॉ. मनिंदर सरकारिया ने बताया कि एक एनजीओ ख्वाहिश की ओर से मदद करने के लिए उन्हें कनाडा से फोन आया। अंबाला कैंट और मंडी गोबिंदगढ़ की एनजीओ ने भी स्कूल अडॉप्ट करने को कहा है। वहीं, तीन रिटायर्ड लोगों के ग्रुप ने आश्वासन दिया है कि वे अपने गांव के एनआरआईज से आर्थिक सहायता दिलवाएंगे। लोगों के मन में आशंकाएं भी हैं। उनका सवाल था कि अगर वे टॉयलेट बनवा दें तो बाद में मेंटेनेंस कैसे होगी।
एनआरआई से उम्मीदें
शिक्षा विभाग को इस प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा उम्मीदें एनआरआई से हैं। डॉ. सरकारिया ने कहा कि एनआरआई अपने गांवों के स्कूल की मदद करने को हमेशा तैयार रहते हैं। पर उन्हें यह नहीं पता होता कि किससे संपर्क करें। साथ ही उनके मन में आशंका रहती है कि कहीं उनके दिए पैसों का दुरुपयोग न हो जाए। उन्हें विभाग का प्लेटफॉर्म मिलेगा तो वे जरूर मदद करेंगे। कई देशों में एनआरआई ने ग्रुप बना रखे हैं, उनसे संपर्क किया जाएगा।
ऐसे कर सकते हैं मदद
लोग स्कूल अडॉप्ट कर सकते हैं और छोटी सहायता भी कर सकते हैं। जिनमें स्मार्ट क्लासरूम बनाना, लैब और टॉयलेट का निर्माण, बच्चों को वर्दियां देना, लाइब्रेरी केलिए किताबें, क्लासरूम केलिए फर्नीचर और ग्रीन बोर्ड, खेलों और मिड डे मील का बुनियादी ढांचा, आरओ और सोलर पॉवर सिस्टम आदि शामिल हैं। तरनतारन में टीचर स्कूलों में टिकते नहीं थे। इसे देखते हुए खडूर साहिब के बाबा सेवा सिंह ने छह टीचर स्पॉन्सर किए थे। जिनका वेतन वही देते हैं।
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ऐसे में एनजीओ, चैरिटेबल ट्रस्ट और दानी लोग स्कूलों को अडॉप्ट करके बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा में सुधार को लेकर मदद कर सकते हैं। लोग पूरा स्कूल अडॉप्ट करने के अलावा छोटी सहायता भी कर सकते हैं। डीजीएसई की अपील को शुरुआती चरण में ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर और एससीईआरटी के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. मनिंदर सिंह सरकारिया ने बताया कि अब तक करीब 15 एनजीओ और लोग संपर्क कर मदद की पेशकश कर चुकी हैं।
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कोई एक-दो स्कूल अडॉप्ट करने को तैयार हैं। तो किसी ने कुछ स्कूलों में सफाई का इंतजाम करने का भरोसा दिया है। जल्द ही उनके साथ मीटिंग कर इसे फाइनल कर दिया जाएगा।
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कनाडा से किया संपर्क
डॉ. मनिंदर सरकारिया ने बताया कि एक एनजीओ ख्वाहिश की ओर से मदद करने के लिए उन्हें कनाडा से फोन आया। अंबाला कैंट और मंडी गोबिंदगढ़ की एनजीओ ने भी स्कूल अडॉप्ट करने को कहा है। वहीं, तीन रिटायर्ड लोगों के ग्रुप ने आश्वासन दिया है कि वे अपने गांव के एनआरआईज से आर्थिक सहायता दिलवाएंगे। लोगों के मन में आशंकाएं भी हैं। उनका सवाल था कि अगर वे टॉयलेट बनवा दें तो बाद में मेंटेनेंस कैसे होगी।
एनआरआई से उम्मीदें
शिक्षा विभाग को इस प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा उम्मीदें एनआरआई से हैं। डॉ. सरकारिया ने कहा कि एनआरआई अपने गांवों के स्कूल की मदद करने को हमेशा तैयार रहते हैं। पर उन्हें यह नहीं पता होता कि किससे संपर्क करें। साथ ही उनके मन में आशंका रहती है कि कहीं उनके दिए पैसों का दुरुपयोग न हो जाए। उन्हें विभाग का प्लेटफॉर्म मिलेगा तो वे जरूर मदद करेंगे। कई देशों में एनआरआई ने ग्रुप बना रखे हैं, उनसे संपर्क किया जाएगा।
ऐसे कर सकते हैं मदद
लोग स्कूल अडॉप्ट कर सकते हैं और छोटी सहायता भी कर सकते हैं। जिनमें स्मार्ट क्लासरूम बनाना, लैब और टॉयलेट का निर्माण, बच्चों को वर्दियां देना, लाइब्रेरी केलिए किताबें, क्लासरूम केलिए फर्नीचर और ग्रीन बोर्ड, खेलों और मिड डे मील का बुनियादी ढांचा, आरओ और सोलर पॉवर सिस्टम आदि शामिल हैं। तरनतारन में टीचर स्कूलों में टिकते नहीं थे। इसे देखते हुए खडूर साहिब के बाबा सेवा सिंह ने छह टीचर स्पॉन्सर किए थे। जिनका वेतन वही देते हैं।