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हरियाणा: सरकारी कर्मचारियों के इलाज से जुड़ी बड़ी खबर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Fri, 14 Aug 2015 01:10 PM IST
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को पीजीआई चंडीगढ़ की दरों पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति करने के लिए निजी अस्पतालों की एक नई पैनल नीति को स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही गैर-पैकेज प्रक्रियाओं के लिए बकाया राशि के 75 प्रतिशत का भुगतान किया जाएगा।
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हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि नई नीति के तहत 100 बिस्तरों वाले मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल और 30 या इससे अधिक बिस्तर वाले सुपरस्पेशलियटी और सिंगल स्पेशलियटी अस्पताल पैनल के लिए पात्र होंगे।
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आंख, दांत, नेफ्रोलोजी और न्यूरोलोजी की सिंगल स्पेशलियटी के लिए केवल 10 बिस्तरों की संख्या लागू होगी। उन्होंने बताया कि पैनल वाले अस्पताल के पास राष्ट्रीय मान्यता बोर्ड या ज्वाइंट कमिशन इंटरनेशनल की ओर से अस्पतालों के लिए जारी होने वाला मान्यता प्रमाण पत्र होना चाहिए।
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इसके लिए महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं के निर्देशानुसार अतिरिक्त महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं या निदेशक या सिविल सर्जन की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा इसका निरीक्षण किया जाएगा। इसमें सदस्यों के रूप में विशेषज्ञ शामिल होंगे। गैर-मान्यता प्राप्त अस्पताल आवेदन करने का पात्र नहीं होगा।
विज ने बताया कि पात्रता मानदंडों में यह भी शामिल होगा कि पैकेज दरें विशेषज्ञों द्वारा तैयार की जाएं और 21 मई 2015 को राज्य की ओर से अधिसूचित अस्पतालों द्वारा सहमति प्रदान की जाए। अस्पताल पैकेज दरों और इंप्लांट्स पर सहमति देंगे। उन्होंने बताया कि मौजूदा पैनल वाले अस्पतालों के साथ-साथ नवीकरण के लिए आवेदन करने वाले अस्पताल भी नई पैनल नीति के जारी होने तक पैनल में रहेंगे।
विज ने बताया कि इसके लिए अस्पताल प्राधिकरण द्वारा निरीक्षण शुल्क के रूप में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं के पक्ष में पंचकूला में भुगतान योग्य 25 हजार रुपये के अप्रतिदेय डिमांड ड्राफ्ट के साथ आवेदन किया जाएगा। अस्पताल को महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं प्रतिपूर्ति कोष के नाम बैंक ड्राफ्ट के रूप में अप्रतिदेय जमानत राशि का भुगतान करना होगा।