{"_id":"fc6c6076bd964183a33f84dbf237697c","slug":"new-order-of-ut-administration-for-society-peoples","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोसायटी में रहने वालों के लिए ये नया फरमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोसायटी में रहने वालों के लिए ये नया फरमान
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 18 Jan 2014 02:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूटी प्रशासन ने अपनी जेब भरने के लिए शहर के लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। शहर के दक्षिणी सेक्टरों में बनी सोसाइटियों में फ्लैटों के ट्रांसफर से प्रशासन को कम आमदनी हो रही थी।
इस पर प्रशासन ने नया फरमान जारी कर दिया। प्रशासन ने शहर में बनी हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैट्स के सीधे ट्रांसफर पर रोक लगा दी है।
अब फ्लैट बेचने के लिए पहले इसे लीज होल्ड से फ्री होल्ड करना होगा और इसके बाद रजिस्ट्री भी करानी होगी। इससे हजारों के जगह अब लाखों रुपये की फीस चुकानी होगी।
प्रशासन के इस फैसले से सोसाइटी के लोगों में काफी रोष है। अब हाउसिंग सोसाइटी प्रशासन के इन आदेशों को अदालत में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं।
शहर में ऐसी सिर्फ 36 हाउसिंग सोसाइटियां ही हैं जिन्हें जमीन फ्री होल्ड पर मिली है। बाकी की 76 हाउसिंग सोसाइटियों को जमीन लीज होल्ड पर मिली है जो कि 99 साल के लिए है।
विज्ञापन
ऐसे में हाउसिंग सोसाइटियों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड कराना बड़ी चुनौती होगा। इन 112 हाउसिंग सोसाइटियों में 15 हजार फ्लैटों में 50 हजार के करीब लोग रहते हैं।
लीज होल्ड प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड में बदलने पर यूटी प्रशासन की ओर से लगाई रोक से पहले से शहर के उद्योगपति और सीएचबी के मकानों में रहने वाले लोग परेशान हैं। अब सोसाइटी के लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है।
पहले
पहले इस्टेट ऑफिस सोसाइटियों के मकान मैनेजमेंट फीस लेकर ट्रांसफर कर देता था। इसमें ए कैटेगरी के लिए 50 हजार, बी कैटेगरी के लिए 25 हजार और सी कैटेगरी के लिए 15 हजार रुपये फीस ली जाती थी।
अब
ए कैटेगरी के फ्लैट को ट्रांसफर कराने के लिए लोगों को साढ़े पांच लाख रुपये खर्च करने होंगे। हाउसिंग सोसाइटियों का कलेक्टर रेट 30, 888 रुपये प्रति स्कवेयर फीट है। पहले फ्लैट को लीज होल्ड से फ्री होल्ड कराना होगा। इसके बाद रजिस्ट्री करानी होगी। यह रजिस्ट्री इस्टेट आफिस से होगी।
कोट
काम मुश्किल हो गया है। अब तो परेशानी और बढ़ेगी। सोसाइटी की बैठक बुलाई गई है। इस गंभीर विषय पर चर्चा की जाएगी।
- तरलोचन सिंह, प्रधान, प्रोग्रेसिव सोसाइटी, सेक्टर-50
पहले कनवींस डीड करानी होगी। लैंड का टाइटिल ही नहीं है तो कोई व्यक्ति कनवींस डीड कैसे कराएगा। फीस तो सात गुणा से भी अधिक बढ़ जाएगी।
- जेपी आर्या, चेयरमैन, हाउसफेड चंडीगढ़
प्रशासन मनमानी करती रहती है। एक मनमानी और हो रही है।
जेएन शर्मा, आर्यन सोसाइटी सेक्टर-51
विज्ञापन
इस पर प्रशासन ने नया फरमान जारी कर दिया। प्रशासन ने शहर में बनी हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैट्स के सीधे ट्रांसफर पर रोक लगा दी है।
अब फ्लैट बेचने के लिए पहले इसे लीज होल्ड से फ्री होल्ड करना होगा और इसके बाद रजिस्ट्री भी करानी होगी। इससे हजारों के जगह अब लाखों रुपये की फीस चुकानी होगी।
विज्ञापन
प्रशासन के इस फैसले से सोसाइटी के लोगों में काफी रोष है। अब हाउसिंग सोसाइटी प्रशासन के इन आदेशों को अदालत में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं।
शहर में ऐसी सिर्फ 36 हाउसिंग सोसाइटियां ही हैं जिन्हें जमीन फ्री होल्ड पर मिली है। बाकी की 76 हाउसिंग सोसाइटियों को जमीन लीज होल्ड पर मिली है जो कि 99 साल के लिए है।
विज्ञापन
ऐसे में हाउसिंग सोसाइटियों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड कराना बड़ी चुनौती होगा। इन 112 हाउसिंग सोसाइटियों में 15 हजार फ्लैटों में 50 हजार के करीब लोग रहते हैं।
लीज होल्ड प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड में बदलने पर यूटी प्रशासन की ओर से लगाई रोक से पहले से शहर के उद्योगपति और सीएचबी के मकानों में रहने वाले लोग परेशान हैं। अब सोसाइटी के लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है।
पहले
पहले इस्टेट ऑफिस सोसाइटियों के मकान मैनेजमेंट फीस लेकर ट्रांसफर कर देता था। इसमें ए कैटेगरी के लिए 50 हजार, बी कैटेगरी के लिए 25 हजार और सी कैटेगरी के लिए 15 हजार रुपये फीस ली जाती थी।
अब
ए कैटेगरी के फ्लैट को ट्रांसफर कराने के लिए लोगों को साढ़े पांच लाख रुपये खर्च करने होंगे। हाउसिंग सोसाइटियों का कलेक्टर रेट 30, 888 रुपये प्रति स्कवेयर फीट है। पहले फ्लैट को लीज होल्ड से फ्री होल्ड कराना होगा। इसके बाद रजिस्ट्री करानी होगी। यह रजिस्ट्री इस्टेट आफिस से होगी।
कोट
काम मुश्किल हो गया है। अब तो परेशानी और बढ़ेगी। सोसाइटी की बैठक बुलाई गई है। इस गंभीर विषय पर चर्चा की जाएगी।
- तरलोचन सिंह, प्रधान, प्रोग्रेसिव सोसाइटी, सेक्टर-50
पहले कनवींस डीड करानी होगी। लैंड का टाइटिल ही नहीं है तो कोई व्यक्ति कनवींस डीड कैसे कराएगा। फीस तो सात गुणा से भी अधिक बढ़ जाएगी।
- जेपी आर्या, चेयरमैन, हाउसफेड चंडीगढ़
प्रशासन मनमानी करती रहती है। एक मनमानी और हो रही है।
जेएन शर्मा, आर्यन सोसाइटी सेक्टर-51