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जेल से दूर होगा न्यूरोपैथिक दर्द
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज (यूआईपीएस) विभाग को न्यूरोपैथिक दर्द के उपचार के लिए नैनोपार्टिकल हाइड्रोजल कंपोजिशन के लिए ऑस्ट्रेलियाई इनोवेशन पेंटेंट मिला है। पीयू में ऑस्ट्रेलियाई इनोवेशन पेटेंट पहली बार यूआईपीएस विभाग के शिक्षकों को मिला है।
शिक्षक और शोधकर्ता डॉ. अनुराग कुहाड़ ने बताया कि हमारी तरफ से बनाई गई जेल को चमड़ी पर लगाया जाएगा, जिससे ये मधुमेह और कैंसर कीमोथैरेपी से प्रेरित दर्द को ठीक किया जाएगा। इसे दिन में एक बार लगाना होगा और इसका शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। अभी तक बाजार में जो दर्द निवारक दवा है, उसके शरीर पर कई साइड इफेक्ट देखे गए हैं।
पीयू नैनोपार्टिकल हाइड्रोजल कंपोजिशन की शोध यूआईपीएस के डॉ. रंजना भंडारी, डॉ. अनुराग कुहाड़ और फेक्स कंसल्टिंग गुरुग्राम के निदेशक डॉ. ज्योति के पालीवाल व वॉकहार्ट लिमिटेड के पूर्व वीपी बीवी पटेल की ओर से की गई है।
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डॉ. कुहाड़ ने बताया कि हमारी कोशिश है कि इसे किफायती मूल्य में रखा जाए। इसके साथ ही इसे कम मात्रा में ही स्किन पर लगाना होगा और क्रीम की तरह इस जेल की मालिश करने की जरूरत नहीं होगी। जेल को थोड़ा-सा स्किन पर लगाने के बाद भी यह पूरा असर करेगा। यह तकनीक फाइजर-आईआईटी दिल्ली और डीएसटी-यूटी चंडीगढ़ अनुदान 2020 की वित्तीय सहायता के तहत विकसित की गई है।
शोध का क्लीनिकल ट्रायल होने के बाद बाजार में होगी दवा
डॉ. अनुराग कुहाड़ ने बताया कि अभी हमने भारतीय पेंटेट के लिए फाइल लगाई है। वहीं अभी शोध का क्लीनिकल ट्रायल बकाया है। इस शोध की शुरुआत दो वर्ष पहले की गई थी, लेकिन कोविड के कारण बीच में काम में थोड़ी रुकावट हुई। पिछले साल डीएसटी की ओर से वित्तीय सहायता मिलने के बाद शोध के काम में रफ्तार आई। जल्द ही क्लीनिकल ट्रायल होने के बाद दवा को लोगों के लिए बाजार में लाया जाएगा।
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शिक्षक और शोधकर्ता डॉ. अनुराग कुहाड़ ने बताया कि हमारी तरफ से बनाई गई जेल को चमड़ी पर लगाया जाएगा, जिससे ये मधुमेह और कैंसर कीमोथैरेपी से प्रेरित दर्द को ठीक किया जाएगा। इसे दिन में एक बार लगाना होगा और इसका शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। अभी तक बाजार में जो दर्द निवारक दवा है, उसके शरीर पर कई साइड इफेक्ट देखे गए हैं।
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पीयू नैनोपार्टिकल हाइड्रोजल कंपोजिशन की शोध यूआईपीएस के डॉ. रंजना भंडारी, डॉ. अनुराग कुहाड़ और फेक्स कंसल्टिंग गुरुग्राम के निदेशक डॉ. ज्योति के पालीवाल व वॉकहार्ट लिमिटेड के पूर्व वीपी बीवी पटेल की ओर से की गई है।
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डॉ. कुहाड़ ने बताया कि हमारी कोशिश है कि इसे किफायती मूल्य में रखा जाए। इसके साथ ही इसे कम मात्रा में ही स्किन पर लगाना होगा और क्रीम की तरह इस जेल की मालिश करने की जरूरत नहीं होगी। जेल को थोड़ा-सा स्किन पर लगाने के बाद भी यह पूरा असर करेगा। यह तकनीक फाइजर-आईआईटी दिल्ली और डीएसटी-यूटी चंडीगढ़ अनुदान 2020 की वित्तीय सहायता के तहत विकसित की गई है।
शोध का क्लीनिकल ट्रायल होने के बाद बाजार में होगी दवा
डॉ. अनुराग कुहाड़ ने बताया कि अभी हमने भारतीय पेंटेट के लिए फाइल लगाई है। वहीं अभी शोध का क्लीनिकल ट्रायल बकाया है। इस शोध की शुरुआत दो वर्ष पहले की गई थी, लेकिन कोविड के कारण बीच में काम में थोड़ी रुकावट हुई। पिछले साल डीएसटी की ओर से वित्तीय सहायता मिलने के बाद शोध के काम में रफ्तार आई। जल्द ही क्लीनिकल ट्रायल होने के बाद दवा को लोगों के लिए बाजार में लाया जाएगा।