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बड़ा मुद्दा: पंजाब में शिक्षा की बुनियाद और मजबूत करने की जरूरत, शिक्षकों की कमी मिशन समर्थ पर भारी
Thu, 25 Apr 2024 02:10 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 25 Apr 2024 02:10 PM IST
सार
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 12880 प्राइमरी स्कूल, 2670 मिडल, 1740 हाई और 1972 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, जिनमें 30 लाख के करीब विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर गरीब घरों से हैं। प्रदेश के स्कूलों में पहले के मुकाबले सुविधाएं व इंफ्रास्ट्रकचर में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी काफी काम किया जाना शेष है।
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स्कूल जाते हुए विद्यार्थी (फाइल)
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंजाब सरकार प्रदेश में शिक्षा क्रांति लाने के लिए जोर-शोर से काम करने का दावा कर रही है, लेकिन अभी शिक्षा की बुनियाद को मजबूत करने के लिए काफी काम होगा बाकी है। इसके लिए मिशन समर्थ शुरू किया गया है। इसी तरह शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए स्कूल ऑफ एमिनेंस, स्कूल ऑफ ब्रिलियंस, स्कूल ऑफ एप्लाइड लर्निंग व स्कूल ऑफ हैप्पीनेस योजना शुरू की गई है, ताकि छात्रों के लिए सीखने का अच्छा माहौल बनाया जा सके और साथ ही तकनीकी कौशल प्रदान करने पर भी जोर दिया जा सके।
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सभी स्कूलों में सुविधाओं के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। स्कूल ऑफ एमिनेंस के लिए सरकार को अच्छा रिस्पांस भी मिल रहा है। शिक्षा विभाग के अनुसार 8905 विद्यार्थी निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में वापस शिफ्ट हुए हैं। इस सबके बावजूद इसके सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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पंजाब के स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। एक तरफ स्कूलों में मिशन समर्थ अभियान चलाया जा रहा है और दूसरी शिक्षकों की कमी ने विभाग की समस्या और बढ़ा दी है। शिक्षक भी कई बार ये मामला उठा चुके हैं। उनका आरोप है कि ऐसे हालात में शिक्षा की बुनियाद को मजबूत करने के लिए कैसे काम किया जाएगा।
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16987 करोड़ के बजट का प्रावधान
सरकार का दावा है कि स्कूलों में सुविधाएं प्रदान करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। यही कारण है कि वर्ष 2024-25 के बजट में भी सरकार ने शिक्षा के लिए 16987 करोड़ रुपये बजट रखा था, जो कुल व्यय का 11.5 प्रतिशत है। साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष में 2563 स्कूलों की चारदीवार का काम पूरा किया गया और 3055 स्कूलों में चारदीवारी की मरम्मत भी की गई है। 14 स्कूल ऑफ एमिनेंस शुरू किए गए हैं और 118 सरकारी स्कूलों में स्कूल ऑफ एमिनेंस में बदलने की सरकार की योजना है। 100 स्कूल ऑफ ब्रिलियंस के जरिए कक्षा 6 से 12 तक शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देने की भी तैयार की जा रही है। इसी तरह तकनीकी कौशल सहित हुनर विकसित करने के लिए स्कूल ऑफ एप्लाइड लर्निंग और 3 से 11 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों के लिए बेहतर सीखने का माहौल प्रदान करने के लिए स्कूल ऑफ हैप्पीनेस पर भी काम किया जा रहा है।
शिक्षकों की कमी प्रमुख समस्या: हरजीत सिंह
मोगा के एक सरकारी स्कूल से रिटायर्ड प्रिंसिपल हरजीत सिंह ने बताया कि पंजाब के स्कूलों में पहले के मुकाबले सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। कुछ स्कूल में अभी कमियां हो सकती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार काम कर रही है। प्रमुख समस्या शिक्षकों की कमी है, जिसे दूर करने के लिए सरकार को प्रयास करना होगा। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक शहरी क्षेत्रों में नियुक्ति को प्राथमिकता देते हैं और इस प्रक्रिया को थोड़े रोकने की जरूरत है, ताकि गांवों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है, क्योंकि इस कमी के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
कई स्कूलों में सुविधाओं की कमी: लोंगोवाल
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब के महासचिव बलवीर लोंगोवाल ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने पर जोर तो दिया जा रहा है, लेकिन ये काफी नहीं है। अभी भी प्रदेश के आधे स्कूलों में सुविधाओं की कमी है। इसमें विद्यार्थियों के लिए उचित सुविधाएं न होने के साथ ही इमारतों की भी मरम्मत की जरूरत है। इसके अलावा सरकार को अपने स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर देना होगा। इसमें स्मार्ट कक्षाएं तैयार करने के साथ ही अन्य पहल पर काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मिशन समर्थ को सही रूप से लागू नहीं किया जा रहा है। सभी स्कूलों में स्लो लर्नर बच्चे होते हैं और कुछ बच्चे जल्दी सीखते हैं। इस मिशन में सभी बच्चों को सामान लाकर खड़ा कर दिया है। जिन बच्चों को मिशन के तहत सीखने की जरूरत है, केवल उन्हीं को इसमें शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सुविधाएं प्रदान करने के लिए शिक्षक व अभिभावकों ने अपने स्तर पर भी काम किया है। अभी भी 50 प्रतिशत स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए अच्छी सुविधाएं प्रदान की गई है और स्कूलों की इमारतों में सुधार किया गया है, लेकिन बाकी स्कूलों में काम किया जाना बाकी है।
स्कूलों में 20 हजार शिक्षकों की कमी: दिग्विजय पाल
शिक्षक दिग्विजय पाल शर्मा ने कहा कि अभी फिलहाल स्कूलों में मुख्य समस्या शिक्षकों की कमी की है। उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 20 हजार शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा कई स्कूलों में प्रिंसिपल व हेड मास्टर ही नहीं है। ऐसे हालात में अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूलों में कैसे पढ़ाई होगी। उन्होंने कहा कि मिशन समर्थ को सिर्फ प्राइमरी कक्षाओं तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। छठी व इससे ऊपरी कक्षाओं के बच्चों को इसमें शामिल करने का कोई तुक नहीं है। इससे बच्चों का समय खराब हो रहा है। शिक्षकों को अलग से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका सिलेबस ही पूरा नहीं हो रहा है, जिससे बच्चों की शिक्षा ही प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करने का भी तभी फायदा है, जब उसका इस्तेमाल हो। कई स्कूलों में कंप्यूटर समेत अन्य सुविधाएं प्रदान करने पर तो काम किया गया है, लेकिन अभी फिलहाल शिक्षकों की कमी होने के चलते इनका सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से प्रिंसिपलों के ग्रुप को सिंगापुर भेजा गया, लेकिन पंजाब व सिंगापुर में जमीनी हालात बहुत अलग हैं तो इस योजना से कोई फायदा होने वाला नहीं है।
आप सरकार के दोनों मॉडल फ्लॉप: परगट सिंह
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि आप सरकार ने शिक्षा व स्वास्थ्य का मॉडल बनाया हुआ है, लेकिन उनके ये दोनों मॉडल ही फ्लॉप हैं। उन्होंने कहा कि दो सालों से पंजाब की सरकार की तरफ से अगर काम की तरफ ध्यान दिया जाता तो आज इनके नेता चुनाव में टिकट छोड़कर दूसरी पार्टियों का रुख नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया और सिर्फ बातें करने पर ही इनका जोर रहा।
निजी स्कूलों से विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में शिफ्ट हो रहे: हरजोत बैंस
शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि पंजाब में निजी स्कूलों से विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में शिफ्ट हो रहे हैं। अगर अभिभावकों का विश्वास ऐसे ही हमारे नीतियों और प्रयासों के साथ रहा तो निश्चित तौर पर पंजाब की शिक्षा क्रांति आने वाले समय में इतिहास रचेगी। ये पहली बार है कि अभिभावक गर्व के साथ अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेज रहे हैं। पंजाब प्रदेश का पहला राज्य होगा, जिसमें हर स्कूल में वाईफाई होगा। साथ ही किसी भी स्कूल में शिक्षकों की कमी नहीं होगी।