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नवजोत सिद्धू के सियासी भविष्य का फैसला होगा आज, चर्चाओं का बाजार गर्म, कई तरह की अटकलें

Mon, 22 Jul 2019 12:57 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 22 Jul 2019 12:57 PM IST
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navjot sidhu political career after resignation from cabinet minister post, congress
Navjot Singh Sidhu
नवजोत सिंह सिद्धू के सियासी भविष्य पर आज फैसला होने की उम्मीद है। वहीं राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म है और कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। बता दें कि दिल्ली में आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होगी, जिसमें सिद्धू पर फैसला लिया जाएगा। सिद्धू इस समय पंजाब में हैं और परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं। सिद्धू ने सरकारी कोठी खाली कर दी है और सुरक्षा कर्मियों को भी वापस भेज दिया है। वहीं उन्होंने मीडिया से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखी हुई है।
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नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा मंजूर होने के साथ ही सिद्धू के सियासी भविष्य को लेकर कई सवाल और कयास शुरू हो गए हैं। मुख्यमंत्री से नाराज और पार्टी आलाकमान के सामने कोई सुनवाई भी नहीं होने से आहत नवजोत सिद्धू क्या अब कांग्रेस को भी अलविदा कहेंगे? आम आदमी पार्टी और प्रदेश के छोटे-छोटे दलों की ओर से मिले न्योते को स्वीकार करके क्या सिद्धू राज्य में तीसरा फ्रंट खड़ा करेंगे? क्या सिद्धू की भाजपा से फिर सुलह हो सकती है?
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लंबे समय से खामोशी साधे हुए सिद्धू का सियासी करियर क्या अब हाशिए पर चला जाएगा? ऐसे अनेक सवाल पंजाब के राजनीतिक गलियारों में दिन भर चर्चा का विषय बने रहे। वर्ष 2017 में कांग्रेस में आने से पहले सिद्धू को आम आदमी पार्टी ने पेशकश की थी। लेकिन सिद्धू मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, जिसे आप ने स्वीकार नहीं किया। इससे पहले भाजपा ने भी उनकी महत्वाकांक्षा को भांपते हुए उन्हें पार्टी में लगभग किनारे ही कर दिया था, जिससे आहत होकर उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ा था।

सिद्धू की यही महत्वाकांक्षा कांग्रेस सरकार का हिस्सा बनने के बाद भी कमजोर नहीं पड़ी और वे पंजाब में कैप्टन के बराबरी का दर्जा ही कांग्रेस से चाहते रहे हैं। दूसरी ओर, कैप्टन और सिद्धू की राजनीति पर नजर डाली जाए तो कैप्टन जहां आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वहीं सिद्धू अपने सियासी करियर के दौरान कभी भी किसी जन आंदोलन को शुरू करने या उसका हिस्सा बने हुए दिखाई नहीं दिए। वे भाजपा और कांग्रेस दोनों में स्टार चेहरे के रूप में चर्चा में रहे हैं।

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2019 में सिद्धू के स्टार चेहरे का उपयोग किया, लेकिन पार्टी के चुनाव में प्रदर्शन ने सिद्धू की स्थिति भी कमजोर की। अब प्रदेश के छोटे-छोटे दलों, जिनमें आम आदमी पार्टी से अलग हुए विधायक भी शामिल हैं, ने सिद्धू को न्यौता दिया है। माना जा रहा है कि सिद्धू मंत्री पद छोड़ने के बाद फिलहाल कांग्रेस में ही बने रहेंगे। इसका एक मुख्य कारण यह भी है कि वे आज भी राहुल गांधी के चहेते हैं।

वहीं प्रदेश कांग्रेस में यह सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि पार्टी आलाकमान सिद्धू को राष्ट्रीय राजनीति में स्टार चेहरे के रूप में स्थापित करेगी। हालांकि सिद्धू पंजाब में ही अपना सियासी आधार बनाना चाहते हैं, लेकिन कैप्टन से साथ उनकी सुलह होने के भी कोई आसार नहीं हैं।

मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद राज्यपाल ने भी इस्तीफे पर लगाई मुहर

विभाग बदले जाने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच छिड़ी जंग आखिरकार सिद्धू के कैबिनेट से बाहर होने के साथ समाप्त हो गई। सिद्धू की ओर से बीते सोमवार को कैप्टन के चंडीगढ़ स्थित आवास पर भेजा गया इस्तीफा मुख्यमंत्री ने शनिवार सुबह मंजूर कर लिया और उसे वैधानिक मंजूरी के लिए पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के पास भेज दिया। कुछ घंटों के अंतराल पर राज्यपाल ने भी नवजोत सिंह सिद्धू के एक पंक्ति के इस्तीफे पर मंजूरी की मुहर लगा दी। इसके साथ ही नवजोत सिद्धू औपचारिक तौर पर पंजाब कैबिनेट से बाहर हो गए हैं।

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, नवजोत सिंह सिद्धू को अलॉट बिजली विभाग अब मुख्यमंत्री के पास रहेगा। दिल्ली से वापस आने के बाद दो दिन अस्वस्थ रहे कैप्टन ने शनिवार सुबह इस्तीफा पत्र देखा और उन्होंने औपचारिक मंजूरी के लिए इसे राज्यपाल के पास भेज दिया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने दिल्ली में कहा था कि उनकी गैर-हाजरी में उनके चंडीगढ़ निवास स्थान पर पहुंचे इस्तीफे को वह जाकर देखेंगे और फिर कोई फैसला लेंगे। इस पत्र में सिद्धू ने एक पंक्ति में अपना इस्तीफा दिया है और इसका कोई भी स्पष्टीकरण या विस्तार नहीं दिया।

नवजोत सिद्धू ने बीते 10 जून को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना इस्तीफा भेजा था और इसके तकरीबन एक महीने बाद उन्होंने इससे संबंधित ट्वीट किया था। बाद में सिद्धू ने अपने नए ट्वीट में कहा था कि वह औपचारिक तौर पर अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेज देंगे, जिन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद किए फेरबदल के हिस्से के तौर पर उन्हें बिजली विभाग दिया है। गौरतलब है कि सिद्धू ने अपना नया विभाग संभालने से इंकार कर दिया था, जिसके चलते धान के मौजूदा सीजन के दौरान बिजली की जरूरत को देखते हुए मुख्यमंत्री को काम संभालना पड़ा था। 
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