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Photos: नेशनल डांस फेस्टिवल में डॉ. समीरा कौसर, कोलकाता की प्रियदर्शनी व मोहना अय्यर की प्रस्तुति
Tue, 12 Nov 2024 03:33 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Tue, 12 Nov 2024 03:33 PM IST
सार
चंडीगढ़ से सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में तीन दिवसीय इंडियन क्लासिकल डांस फेस्टिवल हो रहा है। यह चंडीगढ़ प्रशासन के सांस्कृतिक विभाग और टैगोर थिएटर सोसाइटी की तरफ से करवाया जा रहा है। यहां दूसरे राज्यों के कलाकार भी पहुंचे हैं।
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नेशनल डांस फेस्टिवल में प्रस्तुति देतीं महिला कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
टैगोर थिएटर में प्रशासन के सांस्कृतिक विभाग और टैगोर थिएटर सोसाइटी की ओर से तीन दिवसीय इंडियन क्लासिकल डांस फेस्टिवल का सोमवार को शुभारंभ हुआ। पहले दिन चंडीगढ़ की डॉ. समीरा कौसर ने कथक और कोलकाता की प्रियदर्शनी घोष व मोहना अय्यर की टीम ने मोहिनीअट्टम की प्रस्तुति दी। डॉ. समीरा कौसर द्वारा कथक के साथ कार्यक्रम की शानदार शुरुआत हुई।
प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना समीरा कौसर ने आध्यात्मिक प्रस्तुति गणेश स्तुति, श्री गणेश के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की और उसके बाद पारंपरिक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जिस में गत, निकास थाट, आमद, उठान, परन, चक्रदार परन, उपज, प्रमिलु, लमछड़ परन आदि को मनमोहक और सुंदर चाल और बेहतरीन भावों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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नृत्य नाटिका काया स्वरूपा उनकी अगली प्रस्तुति थी, जिसमें उन्होंने कथक के अभिनय पहलू पर अपनी पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया। नृत्य में भावों को प्रस्तुत करने की अनोखी शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस नृत्य नाटिका में समीरा ने अपने नृत्य के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को चित्रित करने की कोशिश की। गुरु बृजमोहन गंगानी ने पढंत पर, महमूद खान ने तबले पर और रमेश परिहार ने गायन में बखूबी संगत की। इसके बाद नाट्यनोवा परफॉर्मिंग आर्ट्स सेंटर की संयुक्त निदेशक प्रियदर्शिनी घोष और मोहना अय्यर एवं समूह ने मंच संभाला।
उन्होंने अपने समूहक क साथ नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। इस समूह के आठ कलाकारों ने भाग लिया। इनमें प्रियदर्शिनी घोष, मोहना अय्यर, संपूर्णा मुखर्जी, सृजनी घोष, श्रीराधा घोष, सहेली सेनगुप्ता संजना घोष, देबांजलि बंद्योपाध्याय शामिल रहीं।
दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार हैं डॉ. समीरा कौसर
दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार समीरा को बचपन से ही नृत्य में गहरी रुचि और समझ थी। उन्होंने जयपुर घराने के प्रमुख गुरु कन्हैया लाल से इस शास्त्रीय नृत्य सीखने की शुरुआत की। कला के प्रति समीरा की अटूट निष्ठा और समर्पण को एक नया जीवन तब मिला जब कथक गुरु डॉ. शोभा कोसर ने उन्हें भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन दिया।
गुरु शोभा कौसर द्वारा दिए गए विशेष प्रशिक्षण ने समीरा को एक निपुण नर्तकी के रूप में ढाला। उन्हें जयपुर घराने के कथक की बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने गुरु बृज मोहन गंगानी से भी नृत्य की बारीकियां सीखीं और कला कौशल को निखारा।
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प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना समीरा कौसर ने आध्यात्मिक प्रस्तुति गणेश स्तुति, श्री गणेश के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की और उसके बाद पारंपरिक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जिस में गत, निकास थाट, आमद, उठान, परन, चक्रदार परन, उपज, प्रमिलु, लमछड़ परन आदि को मनमोहक और सुंदर चाल और बेहतरीन भावों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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नृत्य नाटिका काया स्वरूपा उनकी अगली प्रस्तुति थी, जिसमें उन्होंने कथक के अभिनय पहलू पर अपनी पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया। नृत्य में भावों को प्रस्तुत करने की अनोखी शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस नृत्य नाटिका में समीरा ने अपने नृत्य के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को चित्रित करने की कोशिश की। गुरु बृजमोहन गंगानी ने पढंत पर, महमूद खान ने तबले पर और रमेश परिहार ने गायन में बखूबी संगत की। इसके बाद नाट्यनोवा परफॉर्मिंग आर्ट्स सेंटर की संयुक्त निदेशक प्रियदर्शिनी घोष और मोहना अय्यर एवं समूह ने मंच संभाला।
उन्होंने अपने समूहक क साथ नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। इस समूह के आठ कलाकारों ने भाग लिया। इनमें प्रियदर्शिनी घोष, मोहना अय्यर, संपूर्णा मुखर्जी, सृजनी घोष, श्रीराधा घोष, सहेली सेनगुप्ता संजना घोष, देबांजलि बंद्योपाध्याय शामिल रहीं।
दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार हैं डॉ. समीरा कौसर
दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार समीरा को बचपन से ही नृत्य में गहरी रुचि और समझ थी। उन्होंने जयपुर घराने के प्रमुख गुरु कन्हैया लाल से इस शास्त्रीय नृत्य सीखने की शुरुआत की। कला के प्रति समीरा की अटूट निष्ठा और समर्पण को एक नया जीवन तब मिला जब कथक गुरु डॉ. शोभा कोसर ने उन्हें भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन दिया।
गुरु शोभा कौसर द्वारा दिए गए विशेष प्रशिक्षण ने समीरा को एक निपुण नर्तकी के रूप में ढाला। उन्हें जयपुर घराने के कथक की बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने गुरु बृज मोहन गंगानी से भी नृत्य की बारीकियां सीखीं और कला कौशल को निखारा।