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53 लोगों का हत्यारा 'डाकू' अब गांधीवादी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 27 Nov 2014 04:45 PM IST
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53 हत्या, 87 अपहरण, अनगिनत डकैती की वारदात को अंजाम देने वाले बागी नेत्रपाल अब गांधीवादी विचारधारा से जुड़े हैं। लेकिन डाकू रहते हुए और अब भी उनका खून महिलाओं पर अत्याचार की सुन खौल उठता है। कभी 65 हजार रुपये के इनामी डकैत रहे वृद्ध की की कमजोर हड्डियां अब उनका साथ नहीं दे पातीं।
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इसका मलाल तो है, पर उम्मीद भी है। युवाओं से अपील की है कि वे महिलाओं व लड़कियों के लिए देश में सुरक्षित माहौल बनाने में भूमिका निभाएं। वे बुधवार को रणबीर सिंह जयंती समारोह में शिरकत करने यहां पहुंचे थे।
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परदादा पर कटाक्ष से हुए बागी
डकैत से गांधीवादी बने बागी नेत्रपाल ने बताया कि वे अब 78 वर्ष के हैं। 1954 में हाई स्कूल की परीक्षा सोरामगढी चंबल से पास करने के बाद 1955 में सेना में भर्ती हुए। 1956 में पटवारी लगे और 1958 में बागी हो गए। इसकी वजह परदादा पर एक जमींदार का कटाक्ष रहा।
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लाखन सिंह के गैंग में शामिल हुए और अपमान का बदला लेने के लिए सोराम की गढ़ी गांव में डकैती डलवा दी। पुलिस मुठभेड़ में लाखन मारे गए। अपने चाचा राजनाथ के साथ गैंग बनाया। पुलिस मुठभेड़ में चाचा भी मारे गए। 18 साल चंबल के जंगलों में बिताए। गरीबों को सताने वालों की हत्याएं की। किसी से कोई पैसा नहीं लिया। महिलाओं को कभी परेशान नहीं किया। उनके ऊपर मध्यप्रदेश व राजस्थान पुलिस ने ईनाम घोषित कर दिया। 3 जून 1976 को डॉ. एस. एन. सुब्बाराव जंगल में आए और उन्हें आत्म समर्पण कर हिंसा त्यागने के लिए प्रेरित किया।
उन्हें इंदिरा गांधी की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि उन्हें फांसी नहीं होने दी जाएगी। 10 साल कारागार के बाद उन्हें 90 बीघा जमीन दे कर छोड़ दिया जाएगा। आज वे गांधीवादी विचारधारा के साथ सभी को अमन चैन से रहने का संदेश दे रहे हैं।