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गवर्नर का ड्रीम प्रोजेक्ट, मुश्किल में नगर निगम, पढ़ें विशेष रिपोर्ट
राजेश ढल्ल/अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sat, 13 Aug 2016 12:57 PM IST
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multilevel parking sector 17
- फोटो : amar ujala
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गर्वनर कप्तान सिंह सोलंकी के ड्रीम प्रोजेक्टर को लेकर चंडीगढ़ नगर निगम मुश्किल में फंस गया है। पहले दिन मल्टीलेवल पार्किंग में 600 से ज्यादा वाहन पार्क करवाकर नगर निगम बेशक गदगद हो रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अगर इतने ही वाहन प्रतिदिन पार्क होते रहे तो नगर निगम को भी हर माह 5 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ेगा। अगर पार्किंग का खर्च वाहनों के किराए से निकालना है तो उसके लिए मल्टीलेवल पार्किंग में रोजाना 4000 गाड़ियां खड़ी होनी चाहिए।
मल्टीलेवल पार्किंग की अंडरग्राउंड फ्लोर में एक समय में एक साथ 764 कार पार्क हो सकती हैं। नो प्रोफिट नो लॉस में मल्टीलेवल पार्किंग चलाने के लिए यह जरूरी है कि वहां प्रतिदिन साढ़े तीन हजार से चार हजार वाहन पार्क हों। ऐसा तभी संभव है, जब नगर निगम सेक्टर-17 की साहिब सिंह और इंपायर स्टोर की पार्किंग बंद कर दे। जबकि सेक्टर 17 के व्यापारी ऐसा नहीं होने दे रहे हैं।
मल्टीलेवल पार्किंग का खर्चा पूरा न होने एक कारण यह भी है कि यहां पर कार पार्क करने का शुल्क शुरू के 4 घंटे के 5 रुपये है, जबकि उसके बाद हर घंटे का 5 रुपये अतिरिक्त चार्ज किया जाता है। जबकि अभी तक यह देखा गया है कि यहां पर कार पार्क करने वाले दो से तीन घंटे में शापिंग करके वापस चले जाते हैं। जो व्यापारी यहां पर अपनी कार पार्क कर रहे हैं वह मासिक 700 रुपये का पास बनवा रहे हैं।
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अब भी नगर निगम को 6 लाख रुपये प्रति माह चाहिए
नगर निगम खुद 30 कर्मचारियों के साथ पार्किंग चला रहा है। जिनको हर माह 4 लाख रुपये वेतन का भुगतान किया जाना है। जबकि एक लाख रुपये का बिजली के बिल का भुगतान भी किया जाएगा। जबकि पहले जब माक कंपनी मल्टीलेवल पार्किंग चलाती थी तो 8 लाख रुपये का खर्चा था। नगर निगम कंपनी को छह लाख 20 हजार अदा करता था। इसके अलावा रात की सिक्योरिटी के लिए अलग से एक लाख 10 हजार रुपये अदा किए जाते थे। नगर निगम ने प्रवेश और निकासी द्वार पर शटर लगाकर यह राशि बचा ली है।
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मल्टीलेवल पार्किंग की अंडरग्राउंड फ्लोर में एक समय में एक साथ 764 कार पार्क हो सकती हैं। नो प्रोफिट नो लॉस में मल्टीलेवल पार्किंग चलाने के लिए यह जरूरी है कि वहां प्रतिदिन साढ़े तीन हजार से चार हजार वाहन पार्क हों। ऐसा तभी संभव है, जब नगर निगम सेक्टर-17 की साहिब सिंह और इंपायर स्टोर की पार्किंग बंद कर दे। जबकि सेक्टर 17 के व्यापारी ऐसा नहीं होने दे रहे हैं।
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मल्टीलेवल पार्किंग का खर्चा पूरा न होने एक कारण यह भी है कि यहां पर कार पार्क करने का शुल्क शुरू के 4 घंटे के 5 रुपये है, जबकि उसके बाद हर घंटे का 5 रुपये अतिरिक्त चार्ज किया जाता है। जबकि अभी तक यह देखा गया है कि यहां पर कार पार्क करने वाले दो से तीन घंटे में शापिंग करके वापस चले जाते हैं। जो व्यापारी यहां पर अपनी कार पार्क कर रहे हैं वह मासिक 700 रुपये का पास बनवा रहे हैं।
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अब भी नगर निगम को 6 लाख रुपये प्रति माह चाहिए
नगर निगम खुद 30 कर्मचारियों के साथ पार्किंग चला रहा है। जिनको हर माह 4 लाख रुपये वेतन का भुगतान किया जाना है। जबकि एक लाख रुपये का बिजली के बिल का भुगतान भी किया जाएगा। जबकि पहले जब माक कंपनी मल्टीलेवल पार्किंग चलाती थी तो 8 लाख रुपये का खर्चा था। नगर निगम कंपनी को छह लाख 20 हजार अदा करता था। इसके अलावा रात की सिक्योरिटी के लिए अलग से एक लाख 10 हजार रुपये अदा किए जाते थे। नगर निगम ने प्रवेश और निकासी द्वार पर शटर लगाकर यह राशि बचा ली है।
फायर विभाग के सामने की सड़क पर खड़ी कारों पर कार्रवाई से डर
multilevel parking sector 17
- फोटो : amar ujala
दूसरे दिन 625 वाहन पार्क हुए
शुक्रवार को मल्टीलेवल पार्किंग में 625 गाड़ियां पार्क की गईं। जबकि वीरवार को 600 वाहन पार्क किए गए थे। अगर वीरवार की तरह रोजाना 600 वाहन मल्टीलेवल पार्किग में खड़े हों तब भी किराए से रोजाना तीन हजार रुपये ही आएंगे। इस तरह माह में 90 हजार रुपये पार्किंग शुल्क मिलेगा। ऐसे में छह लाख रुपये की आमदनी के लिए रोजाना चार हजार वाहन पार्क होने चाहिए।
ई रिक्शा 12 बजे के बाद चल रहे
नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ दस्ता ई रिक्शा की सुविधा 12 बजे चालू कर रहा है, जबकि मल्टीलेवल पार्किंग सुबह 8 बजे शुरू हो जाती है। ई रिक्शा की सुविधा उन लोगों के लिए है जो मल्टीलेवल में वाहन पार्क करके प्लाजा जाना चाहते हैं।
फायर विभाग के सामने की सड़क पर खड़ी कारों पर कार्रवाई से डर
ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ दस्ते के सब इंस्पेक्टर प्लाजा के आसपास नो पार्किंग में वाहन खड़े करने वालों पर तो कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम के फायर विभाग और हरियाणा मिनी सचिवालय के सामने वाली सड़क के किनार पार्क होने वाली कारों पर कार्रवाई करने से डरते हैं।
रेट बढ़ा देना चाहिए: बिट्टू
फॉसवेक चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि मल्टीलेवल पार्किंग में वाहन ज्यादा सेफ रहते हैं। नगर निगम को इसके शुल्क में इजाफा कर देना चाहिए । लेकिन अन्य सरफेस की पार्किंग का रेट दोगुने होने कर दिए जाने चाहिए। इससे लोग मल्टीलेवल पार्किंग में वाहन पार्क करेंगे। लेकिन अगर शोरूमों के सामने बनी पार्किंगों में वाहन खड़ा करना चाहते हैं तो उनसे ज्यादा शुल्क वसूला जाना चाहिए।
नगर निगम कमाई करने वाली कंपनी नहीं है, लेकिन वेलफेयर के लिए कोई काम ऐसा भी नहीं होना चाहिए, जिससे खर्च पूरा ही न हो। मल्टीलेवल पार्किंग के सरफेस पर विज्ञापन की मंजूरी के लिए प्रशासन से बात की जा रही है। अगर मंजूरी मिल जाती है तो इससे नगर निगम को सभी खर्चे निकालने के बाद कमाई भी हो जाएगी।
अरुण सूद, मेयर
शुक्रवार को मल्टीलेवल पार्किंग में 625 गाड़ियां पार्क की गईं। जबकि वीरवार को 600 वाहन पार्क किए गए थे। अगर वीरवार की तरह रोजाना 600 वाहन मल्टीलेवल पार्किग में खड़े हों तब भी किराए से रोजाना तीन हजार रुपये ही आएंगे। इस तरह माह में 90 हजार रुपये पार्किंग शुल्क मिलेगा। ऐसे में छह लाख रुपये की आमदनी के लिए रोजाना चार हजार वाहन पार्क होने चाहिए।
ई रिक्शा 12 बजे के बाद चल रहे
नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ दस्ता ई रिक्शा की सुविधा 12 बजे चालू कर रहा है, जबकि मल्टीलेवल पार्किंग सुबह 8 बजे शुरू हो जाती है। ई रिक्शा की सुविधा उन लोगों के लिए है जो मल्टीलेवल में वाहन पार्क करके प्लाजा जाना चाहते हैं।
फायर विभाग के सामने की सड़क पर खड़ी कारों पर कार्रवाई से डर
ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ दस्ते के सब इंस्पेक्टर प्लाजा के आसपास नो पार्किंग में वाहन खड़े करने वालों पर तो कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम के फायर विभाग और हरियाणा मिनी सचिवालय के सामने वाली सड़क के किनार पार्क होने वाली कारों पर कार्रवाई करने से डरते हैं।
रेट बढ़ा देना चाहिए: बिट्टू
फॉसवेक चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि मल्टीलेवल पार्किंग में वाहन ज्यादा सेफ रहते हैं। नगर निगम को इसके शुल्क में इजाफा कर देना चाहिए । लेकिन अन्य सरफेस की पार्किंग का रेट दोगुने होने कर दिए जाने चाहिए। इससे लोग मल्टीलेवल पार्किंग में वाहन पार्क करेंगे। लेकिन अगर शोरूमों के सामने बनी पार्किंगों में वाहन खड़ा करना चाहते हैं तो उनसे ज्यादा शुल्क वसूला जाना चाहिए।
नगर निगम कमाई करने वाली कंपनी नहीं है, लेकिन वेलफेयर के लिए कोई काम ऐसा भी नहीं होना चाहिए, जिससे खर्च पूरा ही न हो। मल्टीलेवल पार्किंग के सरफेस पर विज्ञापन की मंजूरी के लिए प्रशासन से बात की जा रही है। अगर मंजूरी मिल जाती है तो इससे नगर निगम को सभी खर्चे निकालने के बाद कमाई भी हो जाएगी।
अरुण सूद, मेयर