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फैब्रिकेशन इंडस्ट्री की हालत पस्त, एक मदर यूनिट की दरकार

Fri, 20 Nov 2015 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Fri, 20 Nov 2015 01:14 PM IST
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msme, panchkula fabirication industry in bad condition

पंचकूला की फैब्रिकेशन इंडस्ट्री अब मुसीबत में है। इनको न सरकार से राहत मिल रही है और न ही जिला प्रशासन से। ऐसा नहीं है कि इंडस्ट्री में दम नहीं। इस इंडस्ट्री को बूस्ट करने के लिए कोई बड़ी इकाई का निवेश यहां नहीं हो सका।

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जो बड़ी इंडस्ट्री हैं वह या तो पंजाब में हैं या फिर हिमाचल में, जिसकी वजह से काम मिलता है पर काफी कम। पंचकूला की फैब्रिकेशन इंडस्ट्री कार से लेकर रेलवे तक के लिए फैब्रिकेशन कर सकती है। इनकी बाधा है पंचकूला और आसपास कोई बड़ी यूनिट का न होना। जिसकी वजह से यह इंडस्ट्री अब पस्त होने लगी है।
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पंद्रह साल पहले हाल था कि इन इंडस्ट्री में रात दिन काम होता था, अब हाल है कि फैब्रिकेशन इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमी शाम के पांच बजने का इंतजार करते हैं कि घर लौटा जाए। फैब्रिकेशन इंडस्ट्री के कुछ प्लेयर्स जरूर हैं, जो रेलवे का काम करते हैं।
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फैब्रिकेशन इंडस्ट्री के पंचकूला में पनपने की मुख्य वजह थी एचएमटी। वह जमाना इस इंडस्ट्री के लिए स्वर्णिम काल था। उस समय इस इंडस्ट्री के पास समय तक नहीं था कि वह कोई दूसरा काम ले सकें। ट्रैक्टर के लिए फैब्रिकेशन उनके लिए दुधारू गाय की तरह बन गया था।

रेल कोच फैक्ट्री ने फूंकी थी जान
सोनीपत में रेल कोच फैक्ट्री की आहट से इंडस्ट्री में थोड़ी सांस आई थी पर प्रस्ताव ही सिरे नहीं चढ़ा तो उद्यमियों की हालत पस्त हो गई। उद्यमियों का कहना है कि हरेक इंडस्ट्री को पनपने के लिए एक लोकल मार्केट चाहिए, हरियाणा में यदि कोई बड़ी इंडस्ट्री आ जाए तो उनके पास काम ही काम होगा।

कार से आटो कंपोनेंट की दरकार
पंचकूला की फैब्रिकेशन इंडस्ट्री में कार से लेकर आटो इंडस्ट्री तक के लिए पार्ट्स को फैब्रिकेट करने की क्षमता है। इन इंडस्ट्री मेें लगाई गईं लाखों रुपये की मशीनरी से चाहे कारों के लिए जॉब वर्क भी कर सकती हैं और स्कूटर और मोटर साइकिल की बड़ी यूनिट के लिए भी। उद्यमी कहते हैं कि बड़ी आटो इंडस्ट्री या रेल फैक्ट्री की दरकार है।

बिजली के रेट्स हैं यहां पर ज्यादा
उद्यमियों के अनुसार पंचकूला की फैब्रिकेशन इंडस्ट्री का ज्यादा काम बिजली और लेबर पर टिका है। बिजली के रेट्स यहां 11 रुपये प्रति यूनिट हैं और लेबर के रेट्स 7600 रुपये प्रतिमाह। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टेशन कास्ट अब दोगुनी हो चुकी है। जिसके कारण लाभांश कम हो गया है।

हम आटो इंडस्ट्री के लिए जॉब वर्क कर सकते हैं। अब काम कम हो गया है, कारण है कंपटीशन और लोकलाइज इंडस्ट्री का न होना। मसलन, पंजाब से रॉ मैटेरियल आता है और पंजाब में ही माल चला जाता है। हमें काम भी कम मिलता है और लाभ भी नहीं होता।
- नलिन मेहता प्रमुख नेटवेल

पंचकूला में हमको एक मदर यूनिट की दरकार है। हमारी क्षमताएं किसी से कम नहीं हैं। फैब्रिकेशन इंडस्ट्री के लिए लोकल मार्केट जरूरी इसलिए है, क्योंकि प्रोडक्ट का ट्रांसपोर्टेशन ज्यादा दूरी तक नहीं किया जा सकता है।
- रतीश शर्मा सप्रू इंजीनियर्स

सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर तक के दायरे में ट्रैक्टर यूनिट्स या कार यूनिट्स को लगाएं तो बेहतर होगा। अभी यहां सोनालिका और पीटीएल और एचएमटी का थोड़ा काम होता है, इसके साथ ही सरकार को बिजली के रेट्स में कटौती करनी चाहिए।

- अशोक शर्मा डायरेक्टर नवकेतन फास्टनर्स

हरियाणा सरकार पंचकूला में एक मदर यूनिट लाए तो इंडस्ट्री एकदम ग्रूम कर जाएगी। पंचकूला में कोई बड़ी यूनिट नहीं है। हमको बिजली और ट्रासंपोर्टेशन कास्ट मार देती है। हरियाणा सरकार को स्माल स्केल इंडस्ट्री के लिए रियायत देनी चाहिए।
- सुमित भूटानी, सदस्य हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स

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