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Chandigarh News: चंडीगढ़ क्लब में सांसद की चाय पार्टी से बढ़ी कांग्रेस में अंदरूनी हलचल

Sat, 07 Feb 2026 11:11 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 07 Feb 2026 11:11 PM IST
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MP's tea party at Chandigarh Club sparks internal turmoil in Congress
कांग्रेस अध्यक्ष और पार्षद नहीं बुलाए गए, पार्टी में गुटबाजी की चर्चा तेज
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ क्लब में शनिवार को आयोजित सांसद मनीष तिवारी की चाय पार्टी कांग्रेस के भीतर चर्चा और सियासी हलचल का बड़ा कारण बन गई। इस अनौपचारिक बैठक में कांग्रेस के कई पुराने समर्थक, वरिष्ठ नेता और पार्टी से जुड़े अनुभवी चेहरे मौजूद रहे, लेकिन चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की समेत पार्टी के सभी छह पार्षदों की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए। अब चर्चा है कि इस चाय पार्टी से कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं होने को लेकर कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा नाराज है। इसी नाराजगी का असर इस चाय पार्टी में भी देखने को मिला। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे कांग्रेस के अंदर मतभेद और गहरे होने की चर्चा तेज हो गई। इस बैठक में कांग्रेस के पुराने चेहरे और सांसद के करीबी माने जाने वाले नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक संकेत भी दिए हैं।
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चाय पार्टी में शामिल नेताओं के बीच संगठन की वर्तमान स्थिति, नगर निगम की राजनीति, मेयर चुनाव के बाद बने हालात और आने वाले समय की रणनीति पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई। बैठक में मौजूद कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व और हालिया फैसलों को लेकर असंतोष भी जाहिर किया। कांग्रेस के भीतर इसे संगठनात्मक संतुलन बिगड़ने और नेतृत्व को लेकर बढ़ती बेचैनी के तौर पर देखा जा रहा है।
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राजनीतिक बैठक के तौर पर देखना गलत
हालांकि इस पूरे मामले पर अमर उजाला से बात करते हुए सांसद मनीष तिवारी ने स्पष्ट किया कि इस चाय पार्टी को राजनीतिक बैठक के रूप में देखना गलत है। उन्होंने कहा कि यह उनके पुराने जानने वालों, मित्रों और समर्थकों की एक निजी चाय पार्टी थी, जिसका पार्टी या संगठन से कोई औपचारिक संबंध नहीं था। तिवारी के मुताबिक इसमें लुधियाना से लेकर चंडीगढ़ तक के उनके पुराने मित्र, दोस्त और हमदर्द शामिल हुए थे, जहां सामान्य और सामाजिक चर्चाएं हुईं। उन्होंने कहा कि इसे पार्टी अध्यक्ष या पार्षदों की अनुपस्थिति से जोड़ना बेवजह का मुद्दा बनाना है। हालांकि इसके बावजूद, चंडीगढ़ कांग्रेस में यह चाय पार्टी कई राजनीतिक संदेश छोड़ गई है।
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