{"_id":"656a436fde20bb584403b015","slug":"mother-was-facing-difficulty-in-cleaning-high-windows-made-automatic-wiper-chandigarh-news-c-16-pkl1043-296715-2023-12-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: मां को ऊंची खिड़कियों की सफाई में होती थी दिक्कत, बेटे ने बना डाला ऑटोमेटिक वाइपर मॉडल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: मां को ऊंची खिड़कियों की सफाई में होती थी दिक्कत, बेटे ने बना डाला ऑटोमेटिक वाइपर मॉडल
Sat, 02 Dec 2023 02:04 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 02:04 AM IST
सार
जीएमएसएसएस-27 के विद्यार्थी मोहम्मद आकिब ने 10 इंच डुअल साइडेड मेग्नेटिक विंडो ग्लास क्लीनर का मॉडल तैयार किया है। विंडो क्लीनर में गोलाकार वाइपर की दो शीट बनाई हैं, जिसके बीच में शीशे को साफ किया जा सकेगा। विंडो क्लीनर में मोटर के प्रयोग से उसे ऑन ऑफ किया जा सकता है जिसमें वाइपर की शीट झाग के साथ शीशा साफ करेगी।
विज्ञापन
मॉडल तैयार करते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मां को ऊंची खिड़कियों को साफ करने में होती परेशानी देख चंडीगढ़ जीएमएसएसएस-27 के 11वीं के विद्यार्थी मोहम्मद आकिब ने ऑटोमेटिक वाइपर का मॉडल बना डाला। आकिब की तरह शहर के 11 स्कूलों से 55 बच्चों ने अपने घर और आस-पास की समस्याओं को देखा और वैज्ञानिक दृष्टि से उनके समाधान ढूंढकर रोचक मॉडल तैयार किए। इंस्पायर मानक अवार्ड के लिए ये मॉडल इन बच्चों ने महज 17 दिन में बनाए।
शिक्षकों, उपकरणों और फंड की कमी में अक्सर सरकारी स्कूल के बच्चे अन्य गतिविधियों में आगे आने से रह जाते हैं हालांकि शिक्षा मंत्रालय, साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग से बच्चों के विकास के लिए कई तरह की प्रदर्शनी और प्रतियोगिताएं आयोजित की जातीं हैं। स्कूलों में वैज्ञानिक सोच की कमी को महसूस करते हुए पीयू के प्रो. गौरव वर्मा ने सितंबर 2022 में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था।
प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने जीएमएचएस-22 के चार बच्चों को राष्ट्रीय प्रतियोगिता इंस्पायर मानक अवॉर्ड के लिए तैयार किया, जिनमें दो को 10 हजार रुपये की इनामी राशि मिली। परिणामस्वरूप सत्र 2023 में प्रो. जसप्रीत कौर, प्रो. राजेश और प्रो. गौरव सप्रा के सहयोग क्रिक (चंडीगढ़ रीजन इनोवेशन एंड नॉलेज क्लस्टर) के अंतर्गत शिक्षा विभाग के साथ मिलकर इग्नाइटिंग यंग माइंड्स प्रोग्राम शुरू किया।
विज्ञापन
इस प्रोग्राम में स्वयंसेवक बने 32 पीएचडी स्कॉलर और स्नातक के विद्यार्थियों ने छठी से लेकर 12वीं के 55 बच्चों की इंस्पायर मानक अवॉर्ड और अन्य की नेशनल चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस की तैयारी करवाई। प्रोग्राम के तहत चयनित 10 स्कूलों को फंड भी मिले हैं। हालांकि पीयू विद्यार्थी एक अन्य 11वें स्कूल के बच्चों को भी मेंटर कर रहे हैं। बच्चों द्वारा इंस्पायर अवॉर्ड को दिए प्रोजेक्ट के नतीजे आना बाकी है।
लाइट पॉइंट पर नहीं रुकेगी एंबुलेंस, नीली लाइट देगी रास्ता
जीएमएसएसएस-27 के विद्यार्थी मोहम्मद आकिब ने 10 इंच डुअल साइडेड मेग्नेटिक विंडो ग्लास क्लीनर का मॉडल तैयार किया है। विंडो क्लीनर में गोलाकार वाइपर की दो शीट बनाई हैं, जिसके बीच में शीशे को साफ किया जा सकेगा। विंडो क्लीनर में मोटर के प्रयोग से उसे ऑन ऑफ किया जा सकता है जिसमें वाइपर की शीट झाग के साथ शीशा साफ करेगी।
जीएमएसएसएस-27 के ही आठवीं छात्र शिव ने पर्यावरण के अनुकूल एक वाटर रॉकेट बनाया है। गैस उत्सर्जन से पर्यावरण पर विपरित प्रभाव पड़ता है। ऐसे में शिव ने रॉकेट लॉन्च के लिए पानी से पर्यावरण अनुकूल प्रोपल्शन तकनीक विकसित की है। विद्यार्थी ने साइकिल पंप से बोतल में कंप्रेस्ड हवा भरी जिसके प्रेशर से बोतल के ऊपरी हिस्से में लगे रॉकेट का लॉन्च किया।
इसके अलावा जीएमएचएस-22 की छात्रा रितु ने एंबुलेंस को ट्रैफिक लाइट पर न रुकना पड़े इसके लिए इमरजेंसी ब्लू लाइट सिस्टम का विकास किया है। इसमें ट्रैफिक लाइट में नीली लाइट जोड़ी गई जो एंबुलेंस की आवाज डिटेक्ट कर ऑन होगी, जिससे उसे जाने के लिए रास्ता क्लीयर होगा और जैसी ही वह चौक पास करेगी तो नीली लाइट बंद हो जाएगी। पिछले साल बनाए इस मॉडल के लिए रितु को 10 हजार रुपये की राशि मिली।
बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना मकसद
प्रोग्राम का उद्देश्य बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना है और समस्याओं के प्रति समाधान प्रमुख सोच का विकास करना है। जहां बच्चों को रिसर्च स्कॉलर की मेंटरशिप मिल रही है वहीं पीयू विद्यार्थियों को बच्चों से नए आइडिया और समाज की समस्याओं के बारे में जानने को मिल रहा है। दोनों मिलकर कल के भारत के लिए एक बेहतर इकोसिस्टम बना रहे हैं। - प्रो. गौरव वर्मा, इंगनाइटिड यंग माइंडस
बच्चों के पास कई इनोवेटिव आइडिया
बच्चों को जब मॉडल बनाने के लिए समस्याओं के आधार पर मॉडल लाने के लिए कहा तो किसी ने एंबुलेंस का रास्ता आसान करने का आइडिया दिया तो किसी ने कहा पापा को ईंट उठाते समय दिक्कत होती है, उनके लिए क्या कर सकता हूं। बच्चों के पास ढेर सारे आइडिया हैं जरूरत है तो बस उनकी क्षमता को सही दिशा में लगाने की। - अक्षप्रीत कौर, पीएचडी स्कॉलर, यूआइईटी डीआईसी लैब
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करने में मिली मदद
बच्चों में प्रैक्टिकल नॉलेज बढ़ाने के लिए हम क्षेत्र के प्रोफेशनल संस्थानों का सहयोग चाहते थे और क्रिक से हमारे बच्चों को साइंस प्रोजेक्ट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी करने में सहायता मिली है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा भी इस प्रपोजल को लेकर पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला जिसके तहत प्रोग्राम के लिए फंड भी मिले हैं। - हरसुंहिदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक
विज्ञापन
शिक्षकों, उपकरणों और फंड की कमी में अक्सर सरकारी स्कूल के बच्चे अन्य गतिविधियों में आगे आने से रह जाते हैं हालांकि शिक्षा मंत्रालय, साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग से बच्चों के विकास के लिए कई तरह की प्रदर्शनी और प्रतियोगिताएं आयोजित की जातीं हैं। स्कूलों में वैज्ञानिक सोच की कमी को महसूस करते हुए पीयू के प्रो. गौरव वर्मा ने सितंबर 2022 में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था।
विज्ञापन
प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने जीएमएचएस-22 के चार बच्चों को राष्ट्रीय प्रतियोगिता इंस्पायर मानक अवॉर्ड के लिए तैयार किया, जिनमें दो को 10 हजार रुपये की इनामी राशि मिली। परिणामस्वरूप सत्र 2023 में प्रो. जसप्रीत कौर, प्रो. राजेश और प्रो. गौरव सप्रा के सहयोग क्रिक (चंडीगढ़ रीजन इनोवेशन एंड नॉलेज क्लस्टर) के अंतर्गत शिक्षा विभाग के साथ मिलकर इग्नाइटिंग यंग माइंड्स प्रोग्राम शुरू किया।
विज्ञापन
इस प्रोग्राम में स्वयंसेवक बने 32 पीएचडी स्कॉलर और स्नातक के विद्यार्थियों ने छठी से लेकर 12वीं के 55 बच्चों की इंस्पायर मानक अवॉर्ड और अन्य की नेशनल चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस की तैयारी करवाई। प्रोग्राम के तहत चयनित 10 स्कूलों को फंड भी मिले हैं। हालांकि पीयू विद्यार्थी एक अन्य 11वें स्कूल के बच्चों को भी मेंटर कर रहे हैं। बच्चों द्वारा इंस्पायर अवॉर्ड को दिए प्रोजेक्ट के नतीजे आना बाकी है।
लाइट पॉइंट पर नहीं रुकेगी एंबुलेंस, नीली लाइट देगी रास्ता
जीएमएसएसएस-27 के विद्यार्थी मोहम्मद आकिब ने 10 इंच डुअल साइडेड मेग्नेटिक विंडो ग्लास क्लीनर का मॉडल तैयार किया है। विंडो क्लीनर में गोलाकार वाइपर की दो शीट बनाई हैं, जिसके बीच में शीशे को साफ किया जा सकेगा। विंडो क्लीनर में मोटर के प्रयोग से उसे ऑन ऑफ किया जा सकता है जिसमें वाइपर की शीट झाग के साथ शीशा साफ करेगी।
जीएमएसएसएस-27 के ही आठवीं छात्र शिव ने पर्यावरण के अनुकूल एक वाटर रॉकेट बनाया है। गैस उत्सर्जन से पर्यावरण पर विपरित प्रभाव पड़ता है। ऐसे में शिव ने रॉकेट लॉन्च के लिए पानी से पर्यावरण अनुकूल प्रोपल्शन तकनीक विकसित की है। विद्यार्थी ने साइकिल पंप से बोतल में कंप्रेस्ड हवा भरी जिसके प्रेशर से बोतल के ऊपरी हिस्से में लगे रॉकेट का लॉन्च किया।
इसके अलावा जीएमएचएस-22 की छात्रा रितु ने एंबुलेंस को ट्रैफिक लाइट पर न रुकना पड़े इसके लिए इमरजेंसी ब्लू लाइट सिस्टम का विकास किया है। इसमें ट्रैफिक लाइट में नीली लाइट जोड़ी गई जो एंबुलेंस की आवाज डिटेक्ट कर ऑन होगी, जिससे उसे जाने के लिए रास्ता क्लीयर होगा और जैसी ही वह चौक पास करेगी तो नीली लाइट बंद हो जाएगी। पिछले साल बनाए इस मॉडल के लिए रितु को 10 हजार रुपये की राशि मिली।
बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना मकसद
प्रोग्राम का उद्देश्य बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना है और समस्याओं के प्रति समाधान प्रमुख सोच का विकास करना है। जहां बच्चों को रिसर्च स्कॉलर की मेंटरशिप मिल रही है वहीं पीयू विद्यार्थियों को बच्चों से नए आइडिया और समाज की समस्याओं के बारे में जानने को मिल रहा है। दोनों मिलकर कल के भारत के लिए एक बेहतर इकोसिस्टम बना रहे हैं। - प्रो. गौरव वर्मा, इंगनाइटिड यंग माइंडस
बच्चों के पास कई इनोवेटिव आइडिया
बच्चों को जब मॉडल बनाने के लिए समस्याओं के आधार पर मॉडल लाने के लिए कहा तो किसी ने एंबुलेंस का रास्ता आसान करने का आइडिया दिया तो किसी ने कहा पापा को ईंट उठाते समय दिक्कत होती है, उनके लिए क्या कर सकता हूं। बच्चों के पास ढेर सारे आइडिया हैं जरूरत है तो बस उनकी क्षमता को सही दिशा में लगाने की। - अक्षप्रीत कौर, पीएचडी स्कॉलर, यूआइईटी डीआईसी लैब
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करने में मिली मदद
बच्चों में प्रैक्टिकल नॉलेज बढ़ाने के लिए हम क्षेत्र के प्रोफेशनल संस्थानों का सहयोग चाहते थे और क्रिक से हमारे बच्चों को साइंस प्रोजेक्ट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी करने में सहायता मिली है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा भी इस प्रपोजल को लेकर पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला जिसके तहत प्रोग्राम के लिए फंड भी मिले हैं। - हरसुंहिदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक