Chandigarh: आठ साल से बिना वित्तीय लाभ काम कर रहे 700 से अधिक शिक्षक, प्रोबेशन पीरियड भी नहीं क्लीयर
2014 में प्रशासन ने जेबीटी, टीजीटी और पीजीटी के 1140 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला। जनवरी-फरवरी 2015 में अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई और अगस्त में ज्वाइनिंग। साल बाद 2016 में पंजाब विजिलेंस ने लिखित परीक्षा होने से पहले पेपर लीक होने का खुलासा किया। चंडीगढ़ पुलिस ने इसके आधार पर 29 जुलाई 2016 को केस दर्ज किया।
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विस्तार
चंडीगढ़ में 700 से अधिक शिक्षक आठ साल से बिना इनक्रीमेंट, चाइल्ड केयर लीव और अन्य वित्तीय लाभ के काम कर रहे हैं। इनमें 2015 की 1140 नियमित पदों के तहत हुई भर्ती के शिक्षक हैं, जो न तो नियमित और न ही कॉन्ट्रैक्चुअल अध्यापकों की श्रेणी में आते हैं। 700 से अधिक जेबीटी और टीजीटी पद पर तैनात शिक्षक अन्य अध्यापकों के जितना ही काम कर रहे हैं बस फर्क इतना है कि यह आठ सालों से प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। करीब 300 शिक्षक नौकरी छोड़ कर भी जा भी चुके हैं।
शिक्षकों का आठ साल से प्रोबेशन पीरियड क्लीयर नहीं किया है। 2015 भर्ती के सभी शिक्षकों का प्रतिनिधित्व कर रहे भवतरण सिंह ने बताया पंजाब सर्विस रूल्स के तहत प्रोबेशन पीरियड को तीन साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। हर साल शिक्षकों को तीन प्रतिशत इन्क्रीमेंट मिलता है लेकिन आज तक हमें इन्क्रीमेंट नहीं मिला और वह बेसिक पे पर ही काम कर रहे हैं।
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2014 में प्रशासन ने जेबीटी, टीजीटी और पीजीटी के 1140 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला। जनवरी-फरवरी 2015 में अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई और अगस्त माह में ज्वाइनिंग। साल बाद 2016 में पंजाब विजिलेंस ने लिखित परीक्षा होने से पहले पेपर लीक होने का खुलासा किया। चंडीगढ़ पुलिस ने इसके आधार पर 29 जुलाई 2016 को केस दर्ज किया। कार्रवाई में 36 शिक्षकों समेत कुल 49 लोगों को दोषी पाया गया। वहीं प्रशासक ने वित्त सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में सभी शिक्षकों को नौकरी से निकालने के लिए कहा जिस पर अमल किया गया। इस पर अध्यापकों ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रैटिव ट्रिब्यूनल (कैट) गए और प्रशासन के निर्णय पर रोक लगाई। प्रशासन मामले को उच्च न्यायालय में लेकर गया जहां शिक्षकों के पक्ष में निर्णय आया जिसे प्रशासन ने 2021 में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। ढाई साल से सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है।
प्रोबेशन पीरियड क्लीयर न होने से नहीं मिल रहे यह लाभ
- सालाना तीन प्रतिशत इनक्रीमेंट
- चाइल्ड केयर लीव
- छठां पंजाब वेतन आयोग
- सातवां केंद्रीय वेतन आयोग
- अश्योर्ड कॅरियर प्रोग्राम
- सरकारी आवास के लिए नहीं कर सकते आवेदन
केस 1
समझ नहीं आता कि विभाग में हैं या नहीं
नाम न बताने की शर्त पर एक टीजीटी शिक्षक ने बताया कि काम करते हुए बाल सफेद हो गए हैं लेकिन अब भी समझ नहीं आता कि हम विभाग का हिस्सा हैं या नहीं। हर वक्त एक अनिश्चितता की तलवार सिर पर लटकी रहती है कि कहीं नौकरी चली न जाए। परीक्षा पास करने पर नौकरी ली थी लेकिन किसी के नकल करने की सजा हमें क्यों दी जा रही है।
मानसिक रूप से थक चुके हैं
नाम न बताने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि शिक्षा विभाग का कोई ऐसा अधिकारी नहीं जिसके पास हम प्रोबेशन पीरियड क्लीयर करवाने के लिए न गए हों। इस साल अप्रैल माह में विभाग को एप्लिकेशन देकर आए थे लेकिन अभी तक उसका कोई जवाब नहीं मिला। सब मौखिक रूप से प्रोबेशन क्लीयर करने की हामी भर देते हैं लेकिन लिखित में कोई काम नहीं हो रहा। मानसिक रूप से हम थक चुके हैं।
अपनी लड़ाई पूरी लड़ेंगे
अभी मेरे साथ 2015 में नियुक्त हुए 537 शिक्षक सक्रिय रूप से जुड़े हैं। सभी शिक्षक अपनी योग्यता के आधार पर नियुक्त हुए हैं। हालांकि 300 के करीब शिक्षक प्रशासन से निराश होकर नौकरी छोड़ चुके हैं लेकिन न्याय के लिए हमारा संघर्ष जारी है। - भवतरण सिंह, 2015 भर्ती में नियुक्त शिक्षकों के प्रतिनिधि
मामला स्टेंडिंग काउंसिल के पास लंबित
कोर्ट में मामला जाने से शिक्षकों का प्रोबेशन पीरियड क्लीयर नहीं हो पाया है। शिक्षकों के मुद्दे को लेकर स्टेंडिंग काउंसिल के पास मामला भेजेंगे। स्टेंडिंग काउंसिल के निर्देशानुसार इस पर निर्णय लेंगे। - हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक