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बुड़ैल जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे से मिला मोबाइल, हड़कंप
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चंडीगढ़। बुडै़ल जेल में सर्च ऑपरेशन के दौरान वीरवार को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे मंजीत सिंह से मोबाइल बरामद होने से हड़कंप मच गया। मंजीत सिंह प्रॉपर्टी डीलर सोनू शाह की हत्या के मामले में जेल में है। जेल डिप्टी सुपरिंटेंडेंट प्रमोद खत्री की शिकायत पर सेक्टर-49 थाना पुलिस ने मंजीत के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ करेगी कि उसके पास मोबाइल कैसे पहुंचा और जेल तक मोबाइल पहुंचाने में किसने मदद की।
जेल अधिकारियों को सूचना मिली थी कि जेल में 12 नंबर चक्की के 9 नंबर सेल में बंद गैंगस्टर मंजीत सिंह के पास मोबाइल है। जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट प्रवीन कुमार और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट मुकेश कुमार ने वीरवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे 9 नंबर सेल में छापा मारा। तलाशी में पहले तो कुछ नहीं मिला लेकिन जब मंजीत के कपड़े उतरवाए गए तो उसके अंडरवियर से एक मोबाइल बरामद हुआ। मोबाइल में सिम भी था और कई लोगों को कॉल भी की गई थी। जेल अधिकारियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सेक्टर-49 थाना प्रभारी जय प्रकाश सिंह मौके पर पहुंचे और मोबाइल को कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने कहा आरोपी से पूछताछ के लिए उसे प्रोडक्शन पर लिया जाएगा। पूछताछ की जाएगी कि उसके पास मोबाइल कैसे पहुंचा? पुलिस जांच कर रही है कि इस मोबाइल से मंजीत ने किन-किन लोगों को कॉल की और वह किन लोगों के संपर्क में था।
बॉक्स
बैरकों में 24 घंटे पहरा, फिर भी मोबाइल चार्ज कर लेते हैं कैदी
जेल के भीतर बिजली के सॉकेट बैरकों के बाहर लगे हैं, जहां वार्डर व सुरक्षाकर्मियों का 24 घंटे पहरा रहता है। यहां से मोबाइल को सीधे चार्ज नहीं किया जा सकता। जेल में वायरिंग भी पूरी तरह से अंडरग्राउंड है। जेल में विरोधियों के बीच मोबाइल को चार्ज करना भी जोखिम भरा होता है। ऐसे में सवाल कि जेल में फोन की बैटरी चार्ज कहां से होती है? खुद अधिकारी भी इस मामले से अनजान हैं। सूत्रों का कहना है कि कैदी जेल में जुगाड़ कर बल्ब, पंखे व तारों के सर्किट को चार्जिंग प्वाइंट बनाते हैं और यहीं से मोबाइल चार्ज करते हैं।
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बुड़ैल जेल में बंद हैं पांच आतंकी, मिल चुका है आरडीएक्स
बुड़ैल जेल में जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, लखविंदर लक्खा, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह जैसे खतरनाक आतंकवादी बंद हैं। बीते 23 अप्रैल की शाम को बुड़ैल जेल के पीछे आरडीएक्स मिला था। इस घटना के तार जर्मनी में बैठे आतंकी जसविंदर सिंह मुल्तानी से जुड़े। ऐसे में जेल में मोबाइल मिलना किसी खतरे से कम नहीं। बता दें कि इससे पहले भी कई बार जेल में मोबाइल मिल चुके हैं। खुद जेल अधिकारियों ने बैरक और सेल से मोबाइल पकड़े हैं।
जेल में मोबाइल ले जाना है असंभव तो कैसे पहुंचा
जेल स्टाफ पर भी संदेह जताया जा रहा है क्योंकि जेल में आम लोगों की एंट्री नहीं है। कैदी को पेशी के लिए जेल से बाहर भी लेकर जाना होता है तो वापसी मेें उनकी कई जगह चेकिंग होती है। ऐसे में मोबाइल को जेल के अंदर ले जाना असंभव है। जेल में मोबाइल का इस्तेमाल न हो इसलिए प्रशासन ने जैमर तक लगाया है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मंजीत जेल में मोबाइल का कैसे इस्तेमाल कर रहा था।
गोलियां बरसाकर की गई थी सोनू की हत्या, वर्ष 2019 में गिरफ्तार हुआ था मंजीत
28 सितंबर 2019 को बुड़ैल स्थित ऑफिस में सोनू शाह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने सोनू की हत्या की जिम्मेवारी ली थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने हत्यारों को पनाह देने वाले होटल मैनेजर धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा। बाद में टीम गैंगस्टर शुभम और मंजीत सिंह को प्रोडक्शन पर लेकर आई थी। शूटर मंजीत उर्फ राहुल उर्फ मोटा उर्फ परवा को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ने तीन नवंबर 2019 को सोनीपत के गांव फरमाना से गिरफ्तार किया था। मंजीत पर पंजाब, हरियाणा समेत राजस्थान में हत्या और फिरौती समेत कई अन्य धाराओं में दर्जनों मामले दर्ज हैं।
बुड़ैल जेल में कब कब मिले मोबाइल
फरवरी 2022 को 8 नंबर बैरक से दीपक (37) और रजिंदर सिंह (38) से एक मोबाइल फोन, डिजिटल घड़ी, चार्जर, बैटरी, डाटा केबल और बिजली के तार बरामद हुए थे।
22 अप्रैल 2021 को एक खूंखार अपराधी के सेल से एक मोबाइल फोन और ईयरफोन बरामद हुआ था।
27 सितंबर 2020 को तीन कैदियों से तीन मोबाइल फोन बरामद हुए थे। पुलिस ने इस मामले में एक वार्डर और जेल इलेक्ट्रीशियन को गिरफ्तार किया।
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जेल अधिकारियों को सूचना मिली थी कि जेल में 12 नंबर चक्की के 9 नंबर सेल में बंद गैंगस्टर मंजीत सिंह के पास मोबाइल है। जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट प्रवीन कुमार और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट मुकेश कुमार ने वीरवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे 9 नंबर सेल में छापा मारा। तलाशी में पहले तो कुछ नहीं मिला लेकिन जब मंजीत के कपड़े उतरवाए गए तो उसके अंडरवियर से एक मोबाइल बरामद हुआ। मोबाइल में सिम भी था और कई लोगों को कॉल भी की गई थी। जेल अधिकारियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सेक्टर-49 थाना प्रभारी जय प्रकाश सिंह मौके पर पहुंचे और मोबाइल को कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने कहा आरोपी से पूछताछ के लिए उसे प्रोडक्शन पर लिया जाएगा। पूछताछ की जाएगी कि उसके पास मोबाइल कैसे पहुंचा? पुलिस जांच कर रही है कि इस मोबाइल से मंजीत ने किन-किन लोगों को कॉल की और वह किन लोगों के संपर्क में था।
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बैरकों में 24 घंटे पहरा, फिर भी मोबाइल चार्ज कर लेते हैं कैदी
जेल के भीतर बिजली के सॉकेट बैरकों के बाहर लगे हैं, जहां वार्डर व सुरक्षाकर्मियों का 24 घंटे पहरा रहता है। यहां से मोबाइल को सीधे चार्ज नहीं किया जा सकता। जेल में वायरिंग भी पूरी तरह से अंडरग्राउंड है। जेल में विरोधियों के बीच मोबाइल को चार्ज करना भी जोखिम भरा होता है। ऐसे में सवाल कि जेल में फोन की बैटरी चार्ज कहां से होती है? खुद अधिकारी भी इस मामले से अनजान हैं। सूत्रों का कहना है कि कैदी जेल में जुगाड़ कर बल्ब, पंखे व तारों के सर्किट को चार्जिंग प्वाइंट बनाते हैं और यहीं से मोबाइल चार्ज करते हैं।
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बुड़ैल जेल में बंद हैं पांच आतंकी, मिल चुका है आरडीएक्स
बुड़ैल जेल में जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, लखविंदर लक्खा, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह जैसे खतरनाक आतंकवादी बंद हैं। बीते 23 अप्रैल की शाम को बुड़ैल जेल के पीछे आरडीएक्स मिला था। इस घटना के तार जर्मनी में बैठे आतंकी जसविंदर सिंह मुल्तानी से जुड़े। ऐसे में जेल में मोबाइल मिलना किसी खतरे से कम नहीं। बता दें कि इससे पहले भी कई बार जेल में मोबाइल मिल चुके हैं। खुद जेल अधिकारियों ने बैरक और सेल से मोबाइल पकड़े हैं।
जेल में मोबाइल ले जाना है असंभव तो कैसे पहुंचा
जेल स्टाफ पर भी संदेह जताया जा रहा है क्योंकि जेल में आम लोगों की एंट्री नहीं है। कैदी को पेशी के लिए जेल से बाहर भी लेकर जाना होता है तो वापसी मेें उनकी कई जगह चेकिंग होती है। ऐसे में मोबाइल को जेल के अंदर ले जाना असंभव है। जेल में मोबाइल का इस्तेमाल न हो इसलिए प्रशासन ने जैमर तक लगाया है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मंजीत जेल में मोबाइल का कैसे इस्तेमाल कर रहा था।
गोलियां बरसाकर की गई थी सोनू की हत्या, वर्ष 2019 में गिरफ्तार हुआ था मंजीत
28 सितंबर 2019 को बुड़ैल स्थित ऑफिस में सोनू शाह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने सोनू की हत्या की जिम्मेवारी ली थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने हत्यारों को पनाह देने वाले होटल मैनेजर धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा। बाद में टीम गैंगस्टर शुभम और मंजीत सिंह को प्रोडक्शन पर लेकर आई थी। शूटर मंजीत उर्फ राहुल उर्फ मोटा उर्फ परवा को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ने तीन नवंबर 2019 को सोनीपत के गांव फरमाना से गिरफ्तार किया था। मंजीत पर पंजाब, हरियाणा समेत राजस्थान में हत्या और फिरौती समेत कई अन्य धाराओं में दर्जनों मामले दर्ज हैं।
बुड़ैल जेल में कब कब मिले मोबाइल
फरवरी 2022 को 8 नंबर बैरक से दीपक (37) और रजिंदर सिंह (38) से एक मोबाइल फोन, डिजिटल घड़ी, चार्जर, बैटरी, डाटा केबल और बिजली के तार बरामद हुए थे।
22 अप्रैल 2021 को एक खूंखार अपराधी के सेल से एक मोबाइल फोन और ईयरफोन बरामद हुआ था।
27 सितंबर 2020 को तीन कैदियों से तीन मोबाइल फोन बरामद हुए थे। पुलिस ने इस मामले में एक वार्डर और जेल इलेक्ट्रीशियन को गिरफ्तार किया।