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ई-रवाना: खनन बिलों के फर्जीवाड़े पर अब नकेल कसने को बदला सिस्टम, ऐसे चलता है 'खेल'
Thu, 26 Dec 2019 10:31 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 26 Dec 2019 10:31 AM IST
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फाइल फोटो
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अवैध खनन का खेल बिलों के फर्जीवाड़े पर भी बड़े स्तर पर चलता है। लेकिन अब इस पर नकेल कसने का तरीका तलाश लिया गया है। मैनुअल तरीके से फर्जी बिल और पर्चियां काटकर अवैध रूप से बड़े वाहनों के जरिये रेत, बालू, पत्थर इत्यादि अपने गंतव्यों तक पहुंचा दिए जाते हैं।
इससे न केवल नदियों और पहाड़ों का गलत ढंग से अत्यधिक दोहन होता है, बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान झेलना पड़ता है। इसी फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए खनन विभाग अब ‘ई-रवाना’ की व्यवस्था लागू करने जा रहा है। यह एक ऑनलाइन सिस्टम है, जिसके जरिये खनन के दौरान कटने वाले तमाम बिल अथवा पर्ची आनलाइन ही जनरेट होंगे।
इसकी जानकारी बिल कटते ही वाहन चालक से लेकर विभिन्न निगरानी एजेंसियों समेत क्रशर मालिक तक आटोमैटिक पहुंच जाएगी। इस सॉफ्टवेयर को हरियाणा सरकार के इलेक्ट्रानिक्स एंड इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के अधीनस्थ हरियाणा नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड (एचकेसीएल) की ओर से विशेष तौर इसी फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए ही तैयार किया गया है।
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इस साफ्टवेयर को ‘ई-रवाना’ का नाम दिया गया है। एचकेसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर दीपक बताते हैं कि काफी हद तक इस सिस्टम पर काम पूरा हो चुका है। उनके अनुसार इससे अवैध खनन रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
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इससे न केवल नदियों और पहाड़ों का गलत ढंग से अत्यधिक दोहन होता है, बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान झेलना पड़ता है। इसी फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए खनन विभाग अब ‘ई-रवाना’ की व्यवस्था लागू करने जा रहा है। यह एक ऑनलाइन सिस्टम है, जिसके जरिये खनन के दौरान कटने वाले तमाम बिल अथवा पर्ची आनलाइन ही जनरेट होंगे।
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इसकी जानकारी बिल कटते ही वाहन चालक से लेकर विभिन्न निगरानी एजेंसियों समेत क्रशर मालिक तक आटोमैटिक पहुंच जाएगी। इस सॉफ्टवेयर को हरियाणा सरकार के इलेक्ट्रानिक्स एंड इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के अधीनस्थ हरियाणा नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड (एचकेसीएल) की ओर से विशेष तौर इसी फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए ही तैयार किया गया है।
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इस साफ्टवेयर को ‘ई-रवाना’ का नाम दिया गया है। एचकेसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर दीपक बताते हैं कि काफी हद तक इस सिस्टम पर काम पूरा हो चुका है। उनके अनुसार इससे अवैध खनन रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
अभी इस तरह चलता है खेल
मौजूदा व्यवस्था में नदियों व पहाड़ों से खनन के लिए सरकार ने जिन ठेकेदारों को लाइसेंस जारी किया है। उन्हें खनन विभाग द्वारा बिल बुक दी जाती है। साइट से जितने भी वाहनों में माल भरकर निकलता है, उनके मैनुअली बिल काटे जाते हैं और वाहन चालकों को बिल थमाकर उन्हें रवानगी दे दी जाती है। सूत्रों ने बताया कि इसी मैनुअल बिलिंग में बड़ा खेल चलता है।
मौके पर इन बिलों को मनमर्जी से अगली-पिछली तारीखों में काटकर अवैध रूप से वाहनों में माल भरकर उन्हें साइट से आगे रवाना कर दिया जाता है। इतना ही कई बार तो कुछ वाहन चालकों को फर्जी बिल व पर्ची थमाकर उन्हें रवानगी दे दी जाती है, ताकि कहीं चेकिंग हो जाए, तो अवैध खनन में लिप्त वाहन चालक उस फर्जी बिल को दिखाकर आगे बढ़ जाए।
मौके पर चेकिंग करने वाले भी इस बिल की सत्यता एकदम से नहीं जान पाते।
मौके पर इन बिलों को मनमर्जी से अगली-पिछली तारीखों में काटकर अवैध रूप से वाहनों में माल भरकर उन्हें साइट से आगे रवाना कर दिया जाता है। इतना ही कई बार तो कुछ वाहन चालकों को फर्जी बिल व पर्ची थमाकर उन्हें रवानगी दे दी जाती है, ताकि कहीं चेकिंग हो जाए, तो अवैध खनन में लिप्त वाहन चालक उस फर्जी बिल को दिखाकर आगे बढ़ जाए।
मौके पर चेकिंग करने वाले भी इस बिल की सत्यता एकदम से नहीं जान पाते।
अब आटोमैटिक एजेंसियों तक पहुंचेगा एसएमएस
इन नए सॉफ्टवेयर से साइट पर मैनुअल बिलिंग अब खत्म हो जाएगी। ठेकेदार को तमाम डिटेल के साथ बिल ऑनलाइन जनरेट करना पड़ेगा। इस दौरान कौन सा वाहन, किस नंबर का, कौन ड्राइवर, किस साइट से चला, किस क्रशर तक पहुंचना है, क्रशर मालिक का नाम, ड्राइवर का नाम व पता, मोबाइल नंबर, वाहन में क्या और कितनी मात्रा में माल है इत्यादि जानकारियां भरनी होगी।
ऑनलाइन बिल जनरेट होते ही जरूरी जानकारियों से संबंधित आटो जनरेट एसएमएस वाहन चालक , संबंधित इलाके के पुलिस अधिकारी व खनन अधिकारी से लेकर माल रिसीव करने वाले क्रशर मालिक तक पहुंच जाएगा। ऑनलाइन ही मालूम चल जाएगा कि कितने बजे किस नंबर का वाहन साइट से किस क्रशर के लिए कितना माल लेकर निकला है।
अवैध खनन का शक होने पर आमजन भी खनन विभाग को शिकायत कर संबंधित वाहन की चेकिंग करवा सकता है और इससे चेकिंग भी तुरंत हो जाएगी। ठेकेदार जिन वाहनों से खनन करवाना चाहते हैं, उन वाहनों को पहले पहले ‘ई-रवाना’ रजिस्टर्ड करवाने होंगे। बिना रजिस्टर्ड वाहन में यदि खनन हुआ, तो उसे अवैध माना जाएगा।
ये साफ्टवेयर मोबाइल एप के रूप में भी काम करेगा। जिसमें बिल नंबर डालते ही तमाम जानकारियां सामने होंगी।
ऑनलाइन बिल जनरेट होते ही जरूरी जानकारियों से संबंधित आटो जनरेट एसएमएस वाहन चालक , संबंधित इलाके के पुलिस अधिकारी व खनन अधिकारी से लेकर माल रिसीव करने वाले क्रशर मालिक तक पहुंच जाएगा। ऑनलाइन ही मालूम चल जाएगा कि कितने बजे किस नंबर का वाहन साइट से किस क्रशर के लिए कितना माल लेकर निकला है।
अवैध खनन का शक होने पर आमजन भी खनन विभाग को शिकायत कर संबंधित वाहन की चेकिंग करवा सकता है और इससे चेकिंग भी तुरंत हो जाएगी। ठेकेदार जिन वाहनों से खनन करवाना चाहते हैं, उन वाहनों को पहले पहले ‘ई-रवाना’ रजिस्टर्ड करवाने होंगे। बिना रजिस्टर्ड वाहन में यदि खनन हुआ, तो उसे अवैध माना जाएगा।
ये साफ्टवेयर मोबाइल एप के रूप में भी काम करेगा। जिसमें बिल नंबर डालते ही तमाम जानकारियां सामने होंगी।