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फर्जी वेबसाइट केस, मिल्खा सिंह के वकील ने जवाब दाखिल किया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 06 Mar 2016 01:34 AM IST
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मिल्खा सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
मिल्खा सिंह के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से विज्ञापन के जरिए पैसे ऐंठने के मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से उनके वकील तरमिंदर सिंह ने जवाब दाखिल किया। इस मामले में नेट गेंस इंडिया इंटरनेट प्रा.लि. कंपनी से जुड़े आरोपियों की ओर से जिला अदालत में खुद को आरोपमुक्त करने संबंधी याचिका का उन्होंने विरोध किया और इसे आधारहीन बताया। साथ ही कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं।
इस मामले में पुलिस चालान पेश कर चुकी है और दोनों पक्षों में अब तक कोई समझौता भी नहीं हुआ है। तरमिंदर सिंह ने याचिका को खारिज कर आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर केस का ट्रायल शुरू करने की अपील की है। ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट ने जवाब पर 27 अप्रैल के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जुलाई 2014 में आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में केस रद्द करने की याचिका दायर की थी, जिसे वापस ले लिया गया था। इसमें आरोपी पक्ष ने कहा था कि वह सीपीसी की धारा 239 के तहत ट्रायल कोर्ट से राहत लेना चाहते हैं।
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मिल्खा सिंह की ओर से उनके वकील ने फरवरी 2014 में पुलिस हेडक्वार्टर सेक्टर-9 में धोखाधड़ी, जालसाजी जैसी धाराओं में केस दर्ज करने की शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस ने इनके खिलाफ 21 अप्रैल 2014 में आईटी एक्ट समेत सबूत नष्ट करने की आपराधिक धाराओं में केस दर्ज किया था। इस पर तीनों आरोपियों ने सरेंडर कर जमानत ले ली थी।
सेक्टर-3 थाना पुलिस ने दिल्ली स्थित नेट गेंस इंडिया इंटरनेट प्रा.लि. से जुड़े आतिर खान, संजीव व सईद अजफर खान के खिलाफ 18 नवंबर 2014 को चालान पेश किया था। आरोप के मुताबिक कंपनी मिल्खा सिंह से संबंधित सामग्री अपलोड कर लोगों से विज्ञापन के जरिए कमाई करना चाहती थी। आरोपियों ने मिल्खा सिंह के नाम से एक फर्जी फेसबुक आईडी भी बनाई हुई थी।
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इस मामले में पुलिस चालान पेश कर चुकी है और दोनों पक्षों में अब तक कोई समझौता भी नहीं हुआ है। तरमिंदर सिंह ने याचिका को खारिज कर आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर केस का ट्रायल शुरू करने की अपील की है। ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट ने जवाब पर 27 अप्रैल के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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जुलाई 2014 में आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में केस रद्द करने की याचिका दायर की थी, जिसे वापस ले लिया गया था। इसमें आरोपी पक्ष ने कहा था कि वह सीपीसी की धारा 239 के तहत ट्रायल कोर्ट से राहत लेना चाहते हैं।
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मिल्खा सिंह की ओर से उनके वकील ने फरवरी 2014 में पुलिस हेडक्वार्टर सेक्टर-9 में धोखाधड़ी, जालसाजी जैसी धाराओं में केस दर्ज करने की शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस ने इनके खिलाफ 21 अप्रैल 2014 में आईटी एक्ट समेत सबूत नष्ट करने की आपराधिक धाराओं में केस दर्ज किया था। इस पर तीनों आरोपियों ने सरेंडर कर जमानत ले ली थी।
सेक्टर-3 थाना पुलिस ने दिल्ली स्थित नेट गेंस इंडिया इंटरनेट प्रा.लि. से जुड़े आतिर खान, संजीव व सईद अजफर खान के खिलाफ 18 नवंबर 2014 को चालान पेश किया था। आरोप के मुताबिक कंपनी मिल्खा सिंह से संबंधित सामग्री अपलोड कर लोगों से विज्ञापन के जरिए कमाई करना चाहती थी। आरोपियों ने मिल्खा सिंह के नाम से एक फर्जी फेसबुक आईडी भी बनाई हुई थी।