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सुखना पर आने वाले हैं माइग्रेटरी बर्ड्स, इस बार की गई विशेष तैयारियां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 12 Sep 2016 09:53 PM IST
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माइग्रेटरी बर्ड्स
- फोटो : डेमो फोटो
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कुछ दिनों में माइग्रेटरी बर्ड्स सुखना लेक पर आने शुरू हो जाएंगे। इसके लिए फारेस्ट डिपार्टमेंट ने खास तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत सुखना के साथ लगते कैचमेंट एरिया में माइग्रेटरी बर्ड्स के लिए एक स्पेशल वाटर बाडी बनाई गई है। ये मुख्य रूप से बर्ड्स की ब्रीडिंग के लिए बनाई गई है। सुखना लेक के बहुत ही करीब होने के कारण किनारों पर भी खास इंतजाम किए गए हैं। अक्तूबर के आखिरी हफ्ते से माइग्रेटरी बर्ड्स आने लगेंगे। हालांकि अभी वाचिंग वाले स्पॉट के पास कुछ माइग्रेटरी बर्ड्स देखे जा सकते हैं।
कम हो रही है माइग्रेटरी बर्ड्स की संख्या
विशेषज्ञों ने बताया कि सुखना लेक पर माइग्रेटरी बर्ड्स की संख्या कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण लेक पर बढ़ता ध्वनि प्रदूषण है। रोइंग और बोटिंग की वजह से बर्ड्स की संख्या में कमी आ रही है। हालांकि कभी इस बारे में कोई स्टडी नहीं हुई है, लेकिन जो बर्ड्स वाचिंग पर नजर रखते हैं, उनका मानना है कि इनकी संख्या आधी रह गई है।
कुल चार वाटर बॉडीज बनाई
सुखना के केचमेंट एरिया में इस बार काफी काम किया गया है। फारेस्ट डिपार्टमेंट की ओर से बताया गया है कि कुल चार वाटर बाडी बनाई गईं हैं। पहली वाटर बाडी कांसल से आ रहे ट्रीट पानी के पास बनाई गई है। इसमें कांसल का ट्रीट पानी इकट्ठा किया जा रहा है। दूसरी वाटर बाडी नेचर ट्रेल में वॉच टावर के सामने बनाई गई है। इसमें 50 एकड़ भूमि पर कई फलदार पौधे लगाए गए हैं, ताकि पक्षी आकर बैठें।
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वॉच टावर से इन पक्षियों को निहारा जा सकता है। तीसरी वाटर बाडी माइग्रेटरी बर्ड्स के लिए इन्सपेक्शन हाउस के सामने बनाई गई है। चौथी वाटर बाडी कन्फ्लूअंस प्वाइंट पर बनाई गई है। इसमें नेपली व कांसल नदी का पानी आता है। साथ ही कैंबवाला का दूषित पानी भी आ रहा है। इसमें पानी इकट्ठा होगा और सुखना में जाएगा। इससे रेत और सिल्ट सुखना में आने से रोका जाएगा।
कुछ माइग्रेटरी बर्ड्स ने बनाया रेगुलर ठिकाना
सुखना लेक पर कुछ माइग्रेटरी बर्ड्स ने रेगुलर ठिकाना बना लिया है। इसमें मुख्य रूप से ब्रह्मी डक व कोरमोरेंट्स (जलकाक) शामिल हैं। इन्हें बर्ड्स वाचिंग वाले एरिया से आसानी से देखा जा सकता है। जिस जगह पर कांसल का पानी ट्रीट किया जा रहा है, वहां भी कुछ माइग्रेटरी बर्ड्स देखने को मिलते हैं।
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कम हो रही है माइग्रेटरी बर्ड्स की संख्या
विशेषज्ञों ने बताया कि सुखना लेक पर माइग्रेटरी बर्ड्स की संख्या कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण लेक पर बढ़ता ध्वनि प्रदूषण है। रोइंग और बोटिंग की वजह से बर्ड्स की संख्या में कमी आ रही है। हालांकि कभी इस बारे में कोई स्टडी नहीं हुई है, लेकिन जो बर्ड्स वाचिंग पर नजर रखते हैं, उनका मानना है कि इनकी संख्या आधी रह गई है।
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कुल चार वाटर बॉडीज बनाई
सुखना के केचमेंट एरिया में इस बार काफी काम किया गया है। फारेस्ट डिपार्टमेंट की ओर से बताया गया है कि कुल चार वाटर बाडी बनाई गईं हैं। पहली वाटर बाडी कांसल से आ रहे ट्रीट पानी के पास बनाई गई है। इसमें कांसल का ट्रीट पानी इकट्ठा किया जा रहा है। दूसरी वाटर बाडी नेचर ट्रेल में वॉच टावर के सामने बनाई गई है। इसमें 50 एकड़ भूमि पर कई फलदार पौधे लगाए गए हैं, ताकि पक्षी आकर बैठें।
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वॉच टावर से इन पक्षियों को निहारा जा सकता है। तीसरी वाटर बाडी माइग्रेटरी बर्ड्स के लिए इन्सपेक्शन हाउस के सामने बनाई गई है। चौथी वाटर बाडी कन्फ्लूअंस प्वाइंट पर बनाई गई है। इसमें नेपली व कांसल नदी का पानी आता है। साथ ही कैंबवाला का दूषित पानी भी आ रहा है। इसमें पानी इकट्ठा होगा और सुखना में जाएगा। इससे रेत और सिल्ट सुखना में आने से रोका जाएगा।
कुछ माइग्रेटरी बर्ड्स ने बनाया रेगुलर ठिकाना
सुखना लेक पर कुछ माइग्रेटरी बर्ड्स ने रेगुलर ठिकाना बना लिया है। इसमें मुख्य रूप से ब्रह्मी डक व कोरमोरेंट्स (जलकाक) शामिल हैं। इन्हें बर्ड्स वाचिंग वाले एरिया से आसानी से देखा जा सकता है। जिस जगह पर कांसल का पानी ट्रीट किया जा रहा है, वहां भी कुछ माइग्रेटरी बर्ड्स देखने को मिलते हैं।