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अभि वर्मा की हत्या करने वाले पिता के दोस्त और एक अन्य की रहम की अपील खारिज, फांसी तय

Sat, 27 Jul 2019 01:14 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 27 Jul 2019 01:14 AM IST
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Mercy Petition Of Abhi's killers rejected By Punjab And Haryana High Court
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

अभि वर्मा के हत्यारों विक्रम और जसबीर की फांसी की सजा की दया याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने दया याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपने अधिकारों की बात तो करता है लेकिन हम पीड़ित परिवार का दर्द कैसे नजरंदाज कर दें। अगर याचिकाकर्ता की दलीलें मान ली गईं तो यह न्याय प्रक्रिया के साथ अन्याय होगा।

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दोनों याचिकाकर्ताओं विक्रम और जसवीर और उनकी सहयोगी सोनिया ने फरवरी 2005 में फिरौती वसूलने के इरादे से सुनार रवि वर्मा के बेटे अभि वर्मा का अपहरण कर हत्या कर दी थी। होशियारपुर की जिला अदालत ने 21 दिसंबर, 2006 को इस मामले में तीनों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद 30 मई, 2008 को हाईकोर्ट ने भी तीनों की फांसी की सजा पर अपनी मुहर लगा दी। 
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बाद में सुप्रीम कोर्ट ने विक्रम और जसबीर की फांसी को बहाल रखा था जबकि सोनिया की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। विक्रम और जसबीर ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका प्रस्तुत की लेकिन राष्ट्रपति ने इसे खारिज कर दिया था। 
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इसके बाद दोनों ने याचिका के जरिए अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की हाईकोर्ट से मांग की है। याचिका में दोनों की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति के समक्ष उनकी दया की अपील लंबे समय तक विचाराधीन रही और इसे बाद इसे खारिज किया गया। 

फांसी की सजा में देरी के आधार पर की थी दया की अपील 

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि अनेक मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा में देरी के आधार को स्वीकार करते हुए कई मामलों में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला गया है। इस केस में भी सुप्रीम कोर्ट उनकी एक महिला साथी की फांसी को उम्रकैद में बदल चुका है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा को बरकरार रखने के आदेश के बाद सात साल बीत चुके हैं। 

ऐसे में हाईकोर्ट उन पर रहम करते हुए देरी के आधार पर उनकी सजा को उम्रकैद में बदल दे। हाईकोर्ट से सभी पक्षों को सुनने के बाद दो दोषियों की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने दोनों की फांसी पर मोहर लगाते हुए दोनों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। 

यह था मामला
14 फरवरी 2005 की सुबह नौवीं कक्षा के हैरी उर्फ अभि वर्मा को कच्चा टोबा के पास से उसके पिता के मित्र विक्रम वालिया उर्फ विक्की ने गाड़ी में स्कूल छोड़ने के बहाने किडनैप कर लिया था। विक्की की पत्नी सोनिया बच्चे की टीचर थी। तीन घंटे बाद अपहरणकर्ताओं ने अभी के परिजनों से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी। 

इस बीच शहर के बाहरी इलाके में एक घर में हैरी को नशे के इंजेक्शन देकर बेहोश रखा गया और इंजेक्शन दकर ही उसकी हत्या कर दी गई। इस दौरान विक्की हैरी के परिजनों के साथ तलाश का नाटक करता रहा था। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर गोकुल नगर इलाके के एक घर से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और उनकी निशानदेही पर अगली सुबह हैरी का शव अलावलपुर के पास खेतों में पड़ा मिला था। 

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