हरियाणा में नई आबकारी नीति को मंजूरी: देश में बनी विदेशी शराब सस्ती, देशी का मेट्रो ब्रांड होगा महंगा
सीएम मनोहर लाल ने बताया कि जब किसी दूसरे राज्य की शराब हरियाणा से होकर निकलेगी, उसका पंजीकरण होगा। जब वह हरियाणा को पार करेगी, उसके लिए समय निर्धारित किया जाएगा।
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हरियाणा में अब देशी व देश में बनी विदेशी शराब सस्ती होगी। देशी के मेट्रो ब्रांड (देशी शराब की अच्छी श्रेणी) में मामूली वृद्धि की गई है, यह दस रुपये के भीतर ही रहेगी। ठेकेदारों को राहत दिए जाने से शराब तस्करी रुकेगी। डिस्टलरीज पर ई-फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। दूसरे राज्यों की शराब आवाजाही की कड़ी निगरानी होगी। सीमाओं पर वाहनों के प्रवेश व निकासी का समय दर्ज किया जाएगा। प्रदेश की नई आबकारी नीति में यह प्रावधान किए गए हैं। मनोहर लाल सरकार ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल बैठक में 2022-23 के लिए नई नीति को मंजूरी दे दी। इससे 9200 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। चालू आबकारी वर्ष में 7900 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा गया। यह 2016-17 के बाद सर्वाधिक है।
नई नीति में सरकार ने वाइन पर आयात व आबकारी शुल्क घटाया है। आयातित व्हिस्की पर भी आबकारी शुल्क में कटौती की गई है। आयातित विदेशी शराब पर वैट को कम किया गया है। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद यहां सचिवालय में प्रेस वार्ता कर नई नीति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई आबकारी नीति 12 जून 2022 से 11 जून 2023 तक लागू रहेगी। चालू आबकारी नीति 11 जून 2022 तक लागू है। लगातार दूसरे वर्ष लाइसेंस शुल्क के भुगतान में कोई विलंब नहीं होगा। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है।
वित्त वर्ष 2020-21 में 6791.98 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2021-22 में 7938.8 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व एकत्रित हुआ, यह 17 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2022-23 में खुदरा क्षेत्र (अधिकतम 4 खुदरा दुकानें शामिल हैं) में ई-निविदा के माध्यम से शराब के ठेकों की नीलामी की जाएगी। एक ठेकेदार चार ठेके ले सकेगा। अभी तक एक जोन में दो ही ठेके शामिल थे, जिन्हें बढ़ाकर चार किया गया है।
कारोबार की सहूलियत
जिन ब्रांड-लेबल में पिछले वर्ष की तुलना में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, उन्हें अनुमोदित करने की शक्तियां डीईटीसी को सौंपी गई हैं। कारखानों को त्रैमासिक आधार की बजाय अब वार्षिक आधार पर अतिरिक्त शिफ्ट में संचालन की अनुमति प्रदान की जाएगी। लाइसेंस का नवीनीकरण करने और मौजूदा बार में अतिरिक्त अंक देने की शक्तियां डीईटीसी को सौंपी गई हैं। नए लेबल-ब्रांड का अनुमोदन ऑनलाइन किया जाएगा।
वाइन पर आयात शुल्क घटाया गया
शराब पर आयात शुल्क 7 रुपये से घटाकर 2 रुपये प्रति बीएल किया गया है। शराब कारखाना स्थापित करने के लिए आशय पत्र का शुल्क 15 लाख रुपये से घटाकर एक लाख रुपये किया है। बार लाइसेंस के शुल्क में कोई वृद्धि नहीं होगी। मोरनी को उन स्थानों की सूची में जोड़ा गया है, जहां पर्यटन और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए बार लाइसेंस दिए जा सकते हैं। बार और खुदरा विक्रेता अब अतिरिक्त शुल्क का भुगतान कर लंबे समय तक अपना संचालन कर सकेंगे। सीएल और आईएमएफएल का मूल कोटा क्रमश 1100 लाख प्रूफ लीटर और 650 लाख प्रूफ लीटर होगा। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत अधिक है। डिस्टिलरीज को आवंटित देशी शराब का कोई निर्धारित कोटा नहीं होगा। इसलिए लाइसेंसधारकों को किसी भी डिस्टिलरी के ब्रांड चुनने की पूरी आजादी होगी। देशी शराब (सीएल) और आईएमएफएल के थोक लाइसेंस के शुल्क में मामूली वृद्धि होगी।
अधिकांश ब्रांड के न्यूनतम खुदरा बिक्री मूल्य में कोई बदलाव नहीं
देशी शराब और भारत में बनी अंग्रेजी शराब के अधिकांश ब्रांड के न्यूनतम खुदरा बिक्री मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करने के लिए अब 950 रुपये के मुकाबले 1050 रुपये कम के एक्स डिस्टिलरी इश्यू प्राइस (ईडीपी) के आईएमएफएल ब्रांड की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। डिस्टिलर्स, नॉन-डिस्टिलर्स के थोक लाइसेंस शुल्क को तर्कसंगत बनाया गया है। आईएमएफएल ब्रांड के आबकारी शुल्क में कोई वृद्धि नहीं हुई है। पड़ोसी राज्य से आने वाली चुनौती को दूर करने के लिए 5000 रुपये प्रति पेटी से अधिक के आईएमएफएल ब्रांड पर कम आबकारी शुल्क लिया जाएगा।
आयातित विहस्की और वाइन पर आबकारी शुल्क घटाया गया
किसी भी पड़ोसी राज्य से आयातित विदेशी शराब की तस्करी को रोकने के लिए व्हिस्की और वाइन के आबकारी शुल्क को 225 रुपये प्रति पीएल, बीएल से घटाकर 75 रुपये प्रति पीएल-बीएल किया गया है। इसी प्रकार बार की आपूर्ति के लिए एसेंसमेंट शुल्क को भी कम किया है। आयातित विदेशी शराब पर वैट 10 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत और देशी शराब, वाइन, बीयरऔर आईएमएफएल आदि के मामले में 13-14 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया है।
किराया कलेक्टर दर का 6 प्रतिशत वार्षिक
शहरी क्षेत्रों में सरकारी एजेंसियों की भूमि का किराया 500 मीटर से कम आकार के लिए कलेक्टर दर का 6 प्रतिशत वार्षिक निर्धारित किया गया है। उच्च सुरक्षा वाले होलोग्राम के साथ ट्रक व ट्रैक सिस्टम शुरू किया जाएगा। सभी डिस्टिलरी और बॉटलिंग प्लांट में फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। हाई सिक्योरिटी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से शराब कारखानों की सुविधाओं की निगरानी की जाएगी। शराब की अंतरराज्यीय आवाजाही के बेहतर नियंत्रण के लिए ट्रांजिट स्लिप शुरू की जाएगी। सभी शराब ठेकों और बार में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें लगाई जाएंगी। ये उपाय अधिकांश गैर आबकारी भुगतान वाली शराब की जांच कर कर चोरी के मामलों को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे।