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गुड न्यूजः चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर खुल गया 'दवा दोस्त', यहां मिलेंगी सस्ती दरों पर जेनेरिक मेडिसिन
Fri, 21 Feb 2020 12:47 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 21 Feb 2020 12:47 PM IST
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लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 25 फरवरी से हर बीमारी की जेनेरिक दवाएं सस्ती दरों पर मिलेंगी। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के मुसाफिरखाना स्थित एस्केलेटर के पास मेडिसिन स्टाल तैयार किया गया है। इसका टेंडर आईआरएसडीसी की ओर से ‘दवा दोस्त’ कंपनी को अलॉट किया गया था।
यहां सिप्ला और टेल्कम जैसी ब्रांडेड कंपनियों की जेनेरिक मेडिसिन रेल यात्रियों को कंपनी की ओर से मुहैया करवाई जाएंगी। ये मेडिसिन इतीन सस्ती होगी कि अगर कोई बीपी और शुगर का मरीज महीने भर में दो हजार रुपये की दवा खरीदता है और अगर वही दवा रेलवे स्टेशन से खरीदी जाएगी तो उस जेनेरिक दवा की कीमती महज पांच से सात सौ रुपये के बीच होगी।
बता दें कि मौजूदा समय में अगर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर किसी यात्री की तबीयत खराब हो जाए तो दवा खरीदने के लिए रेलवे स्टेशन के बाहर चंडीगढ़ और पंचकूला साइड एक भी दवा की दुकान नहीं है। यात्रियों को दवा लेने के लिए अगर चंडीगढ़ साइड जाना है, तो आधा किमी दड़वा की तरफ या फिर रेलवे स्टेशन के पंचकूला साइड करीब तीन से चार किमी मीटर दूर जाना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है।
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यहां सिप्ला और टेल्कम जैसी ब्रांडेड कंपनियों की जेनेरिक मेडिसिन रेल यात्रियों को कंपनी की ओर से मुहैया करवाई जाएंगी। ये मेडिसिन इतीन सस्ती होगी कि अगर कोई बीपी और शुगर का मरीज महीने भर में दो हजार रुपये की दवा खरीदता है और अगर वही दवा रेलवे स्टेशन से खरीदी जाएगी तो उस जेनेरिक दवा की कीमती महज पांच से सात सौ रुपये के बीच होगी।
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बता दें कि मौजूदा समय में अगर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर किसी यात्री की तबीयत खराब हो जाए तो दवा खरीदने के लिए रेलवे स्टेशन के बाहर चंडीगढ़ और पंचकूला साइड एक भी दवा की दुकान नहीं है। यात्रियों को दवा लेने के लिए अगर चंडीगढ़ साइड जाना है, तो आधा किमी दड़वा की तरफ या फिर रेलवे स्टेशन के पंचकूला साइड करीब तीन से चार किमी मीटर दूर जाना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है।
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क्यों सस्ती होती हैं जेनेरिक दवाएं
एक ओर जहां ब्रांडेड दवाओं की कीमतें कंपनियां खुद तय करती हैं। वहीं जेनेरिक दवाओं की कीमत को निर्धारित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप होता है। जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक डॉक्टर अगर मरीजों को जेनेरिक दवाएं लिख दें तो विकसित देशों में स्वास्थ्य खर्च 70 फीसदी और विकासशील देशों में और भी अधिक कम हो सकता है।
बेंगलुरु और सिकंदराबाद में भी मेडिकल शॉप खोलने की तैयारी दवा दोस्त कंपनी के संस्थापक यश हरलालका ने फोन पर बताया कि चंडीगढ़ और आनंद विहार के बाद देश के दूसरे रेलवे स्टेशनों पर भी मेडिकल स्टोर खोलने की तैयारी है। यहां के बाद अगर टेंडर अलॉट हुआ तो बेंगलुरु और सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर मेडिकल स्टोर खोला जाएगा।
मेडिकल स्टोरों पर क्यों नहीं देते जेनेरिक दवाएं
किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्टडी के बाद एक रसायन (साल्ट) तैयार किया जाता है जिसे आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए दवा की शक्ल दे दी जाती है। इस साल्ट को हर कंपनी अलग-अलग नामों से बेचती है। कोई इसे महंगे दामों में बेचती है तो कोई सस्ते। इस साल्ट का जेनेरिक नाम साल्ट के कंपोजिशन और बीमारी को ध्यान रखते हुए एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है।
बेंगलुरु और सिकंदराबाद में भी मेडिकल शॉप खोलने की तैयारी दवा दोस्त कंपनी के संस्थापक यश हरलालका ने फोन पर बताया कि चंडीगढ़ और आनंद विहार के बाद देश के दूसरे रेलवे स्टेशनों पर भी मेडिकल स्टोर खोलने की तैयारी है। यहां के बाद अगर टेंडर अलॉट हुआ तो बेंगलुरु और सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर मेडिकल स्टोर खोला जाएगा।
मेडिकल स्टोरों पर क्यों नहीं देते जेनेरिक दवाएं
किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्टडी के बाद एक रसायन (साल्ट) तैयार किया जाता है जिसे आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए दवा की शक्ल दे दी जाती है। इस साल्ट को हर कंपनी अलग-अलग नामों से बेचती है। कोई इसे महंगे दामों में बेचती है तो कोई सस्ते। इस साल्ट का जेनेरिक नाम साल्ट के कंपोजिशन और बीमारी को ध्यान रखते हुए एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है।