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मेयर चुनाव: कांग्रेस-भाजपा ने बड़े नेताओं को मैदान में उतारा
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 07 Jan 2016 01:53 PM IST
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मेयर चुनाव को भाजपा ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। इसलिए उसने केंद्रीय मंत्रियों के साथ -साथ पंजाब व हरियाणा के मंत्रियों को भी इस चुनाव में झोंक दिया है।
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इसका एक बड़ा कारण यह है कि चंडीगढ़ नगर निगम में 15 साल से कमल नहीं खिला है जबकि यह पंजाब और हरियाणा की राजधानी है। लेकिन इस बार के मेयर चुनाव में जीत और हार के कई मायने और भी हैं जिनका असर भविष्य की राजनीति पर पड़ेगा।
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पंजाब के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार तीक्ष्ण सूद, पंजाब भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार शाम को सेक्टर-28 में मनोनीत पार्षदों के साथ बैठक की।
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इस बैठक में सांसद किरण खेर भी शामिल हुईं। जबकि हाईकमान ने पूर्व प्रभारी आरती मेहरा को भी मनोनीत और अपने पार्षदों की गुटबाजी कम करने के लिए भेज दिया है। आरती मेहरा ने पार्टी नेता राजेश गुप्ता के घर पर बैठक की। गुप्ता भाजपा के अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं।
किसको कितना लाभ कितनी हानि
भाजपा के जीतने पर
अगर भाजपा 15 साल बाद नगर निगम में अपना मेयर बनवाने में कामयाब हो गई तो केंद्रीय नेतृत्व की नजर में शहर के नेताओं का कद बढ़ जाएगा। अभी तक हाईकमान शहर के सीनियर नेताओं की गुटबाजी से परेशान है। इसी के साथ साल के अंत में नगर निगम का चुनाव होना है। मेयर चुनाव जीतने से टंडन गुट का भी दबदबा बढ़ जाएगा और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उनके शामिल होने की संभावना बढ़ जाएगी।
हारने पर
इस समय भाजपा- अकाली गठबंधन के पास सांसद को मिलाकर 16 वोट हैं। इसके बावजूद अगर पार्टी मेयर आदि का चुनाव हार गई तो उसकी जमकर किरकिरी होगी। स्थानीय नेताओं और पार्षदों में गुटबाजी खुलकर सामने आ जाएगी। मेयर चुनाव के बाद 10 जनवरी को नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा होनी है। मेयर का चुनाव हारने की स्थिति में नए अध्यक्ष के लिए सभी को साथ लेकर चलना एक बड़ी चुनौती होगी।
कांग्रेस
अगर कांग्रेस जीती
अगर कांग्रेस का प्रत्याशी मेयर चुनाव जीत जाता है तो पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल और कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का कद हाईकमान के सामने बढ़ जाएगा। इस समय कांग्रेस के पास सिर्फ 8 पार्षद हैं। यह कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा के नेतृत्व में पहला चुनाव है। चुनाव जीतने में शहर में भी कांग्रेस का दबदबा बढ़ जाएगा। और अगले नगर निगम चुनाव में भी उसका फायदा मिलेगा।
अगर कांग्रेस हारी
अगर कांग्रेस मेयर का चुनाव हार जाती है तो 14 साल बाद वह विपक्षी पार्टी की भूमिका में होगी। शहर में लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के पास सिर्फ नगर निगम का प्लेटफार्म ही था जिससे वह भाजपा का मुकाबला कर रही है। इसलिए अभी तक प्रशासन में कांग्रेस का कुछ दबदबा है। लेकिन चुनाव हारने पर स्थिति विपरीत होंगी इसका असर आने वाले नगर निगम चुनाव पर भी पड़ेगा। इसके साथ ही शहर में बंसल का विरोधी तिवारी गुट शहर में ज्यादा सक्रिय हो जाएगा और कांग्रेस में गुटबाजी बढ़ जाएगी।
तीनों सीटों पर जीतेगी भाजपा: सूद
भाजपा उम्मीदवार अरुण सूद का कहना है कि 15 साल का बनवास समाप्त होने जा रहा है। उनका कहना है कि पार्टी तीनों सीटों पर जीत दर्ज कर रही है। उनका कहना है कि एक बड़े मार्जन से चुनाव जीता जाएगा।
मुकेश बस्सी, कांग्रेस उम्मीदवार ने बताया कि हर बार की तरह भाजपा को इस बार भी हार का सामना करना पड़ेगा। इसीलिए भाजपा बौखला कर अपने मंत्रियों और केंद्रीय नेताओं का सहारा ले रही है।