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चंडीगढ़ में ऐतिहासिक बदलाव: मेयर इलेक्शन का बदला तरीका... बैलेट पेपर से नहीं, अब हाथ खड़े कर होगा चुनाव

Tue, 24 Jun 2025 09:51 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 24 Jun 2025 09:51 PM IST
सार

चंडीगढ़ में मेयर चुनाव का 29 साल पुराना तरीका अब बदल गया है। नगर निगम में मेयर चुनाव के लिए वोटिंग बैलेट पेपर से नहीं बल्कि हाथ खड़े करके होगी। 

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Mayor election in Chandigarh Municipal Corporation will be done through show of hands
चंडीगढ़ नगर निगम सदन की बैठक - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

चंडीगढ़ नगर निगम की सियासत में 29 साल बाद बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। अब मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव गुप्त मतदान के बजाय शो ऑफ हैंड्स यानी हाथ उठाकर किया जाएगा। 

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प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने निगम के एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी है। यह फैसला अनिल मसीह विवाद और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद लिया गया है। अगले मेयर चुनाव से यह नई प्रणाली लागू हो जाएगी।

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अनिल मसीह कांड के कारण फैसला 

इस बदलाव के लिए नगर निगम चंडीगढ़ (कार्यविधि और कार्य संचालन) विनियम, 1996 के विनियमन 6 में संशोधन किया गया है, जिसे गुलाब चंद कटारिया ने मंगलवार को मंजूरी दी। वर्तमान में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से होते रहे हैं, जिसमें एक-एक कर पार्षद गुप्त वोट डालते हैं। अनिल मसीह कांड के बाद यह सवाल उठे थे कि जब 35 पार्षदों ने ही वोट डालना है और वह सभी पार्षद किसी पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीतकर आए हैं। ऐसे में गुप्त मतदान क्यों कराया जाता है। इसकी जगह हाथ उठाकर चुनाव कराने की मांग की गई। 

यह भी पढ़ें: ब्लैक कैट कमांडो को जाना होगा जेल: ऑपरेशन सिंदूर में शामिल रहा... राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात कमांडो की अपील खारिज

पूर्व मेयर कुलदीप कुमार के कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2024 में नगर निगम हाउस में प्रस्ताव पारित हुआ। सांसद मनीष तिवारी ने भी साथ दिया। कुलदीप कुमार ने तो जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीक्रेट बैलेट हटाने की मांग की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह फैसला प्रशासन को लेना होगा। इसके बाद प्रशासन ने विचार शुरू किया था। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय ने इसका प्रस्ताव तैयार किया और अब प्रशासक ने इसे मंजूरी देकर लागू कर दिया है।

सामने आ जाएंगे पार्टी के खिलाफ जाने वाले पार्षद

हाथ उठाकर वोट कराने पर सबसे ज्यादा फायदा उस पार्टी को होगा, जिसके पास अधिक पार्षद हैं, क्योंकि कोई भी पार्षद यदि क्रॉस-वोटिंग करता है तो वह सार्वजनिक रूप से सामने आ जाएगा। इससे पार्टी के खिलाफ मतदान करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना आसान हो जाएगा। पिछले चुनाव में भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के कई पार्षदों ने भाजपा को वोट दिया, लेकिन गुप्त मतदान होने की वजह से आजतक किसी पार्षद पर कार्रवाई नहीं हो पाई।

भाजपा की मुश्किल बढ़ी, गठबंधन रहा तो आप-कांग्रेस की जीत तय

नए नियम से न केवल चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि राजनीतिक दलों की रणनीतियों पर भी बड़ा असर पड़ेगा। खासकर भाजपा के लिए यह चुनौती बन सकती है, क्योंकि अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन बरकरार रहा तो उनके लिए बहुमत साबित करना आसान हो जाएगा। वर्तमान में भाजपा के 16 पार्षद, आम आदमी पार्टी के पास 13 पार्षद, कांग्रेस के पास 6 पार्षद और एक सांसद का वोट है। ऐसे में भाजपा के पास 16 और गठबंधन के पास 20 वोट होंगे।

क्या था अनिल मसीह कांड 

2024 के मेयर चुनावों में तत्कालीन प्रीसाइडिंग ऑफिसर और मनोनीत पार्षद अनिल मसीह पर गुप्त रूप से आम आदमी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप कुमार के पक्ष में डाले गए आठ वोटों को जानबूझकर रद्द करने का आरोप लगा था। यह पूरा मामला कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस वोट टेम्परिंग को जानबूझकर की गई धांधली करार देते हुए कुलदीप कुमार को विजेता घोषित कर दिया था। इसके बाद पूरे देश में भाजपा की आलोचना हुई और पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।

क्रॉस वोटिंग से नहीं जाएगी पार्षदी

हाथ उठाकर मतदान के दौरान अगर कोई पार्षद दूसरे दल के उम्मीदवार के लिए वोटिंग करता है तो भी उसकी पार्षदी बची रहेगी। नगर निगम के पार्षदों पर मौजूदा दल-बदल कानून लागू नहीं होता है। हालांकि राजनीतिक जवाबदेही की वजह से पार्षद ऐसा करने से बचते हैं।
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