{"_id":"602f9d084ba29279be45b741","slug":"marriage-in-lockdown-is-not-wrong-if-rules-were-followed-says-punjab-and-haryana-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउन में शादी, पंडित-प्रेमी जोड़े पर दर्ज हुई एफआईआर, हाईकोर्ट ने रद्द करवा दी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉकडाउन में शादी, पंडित-प्रेमी जोड़े पर दर्ज हुई एफआईआर, हाईकोर्ट ने रद्द करवा दी
Fri, 19 Feb 2021 04:42 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 19 Feb 2021 04:42 PM IST
विज्ञापन
लॉकडाउन में नियमों के साथ शादी करना अपराध नहीं है।
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉकडाउन के दौरान प्रेम विवाह करने वाले प्रेमी जोड़े और पंड़ित पर फरीदाबाद जिला अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस आदेश को गलत करार देते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि नियमों का पालन किया गया हो तो लॉकडाउन में विवाह करना भी अपराध नहीं है।
विज्ञापन
प्रेमी जोड़े लोकेश और सोनिया और पंडित राकेश की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए एफआईआर रद्द करने की अपील की गई थी। याची ने बताया कि उन्होंने फरीदाबाद के आर्य समाज मंदिर में 7 मई 2020 को शादी की थी। शादी के बाद प्रेमी जोड़े ने सुरक्षा के लिए फरीदाबाद जिला अदालत में याचिका दाखिल की थी।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - किसान आंदोलन : लंबे आंदोलन से बढ़ रही ऊब, दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ घटी, किसान नेताओं ने की ये अपील
विज्ञापन
अदालत ने जोड़े की सुरक्षा से जुड़ी याचिका को मंजूर कर लिया था। लेकिन शादी लॉकडाउन के दौरान हुई थी, इसे आधार बनाते हुए प्रेमी जोड़े और शादी करवाने वाले पंडित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया। अदालत ने कहा था कि शादी के लिए अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई और ऐसे में तीनों पर केस चलना चाहिए।
याची पक्ष की ओर से कहा गया कि लॉक डाउन के दौरान विवाह में 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति का प्रावधान था। ऐसे में विवाह आयोजित करने के लिए पूर्व अनुमति की कोई अनिवार्यता नहीं थी। विवाह में केवल दंपती, दो गवाह और पंडित मौजूद थे। हाईकोर्ट के नोटिस के जवाब में पुलिस याची पक्ष की दलीलों को झुठलाने में नाकामयाब रही। इसको आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।