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Punjab: प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति तक दे चुकी है पंजाब की सियासी धरती, राजनीतिक फलक पर छा चुके हैं कई पंजाबी
Sat, 30 Mar 2024 11:12 AM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 30 Mar 2024 11:12 AM IST
सार
पंजाब के कई नेताओं ने प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है। इनमें दो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और इंदर कुमार गुजराल का नाम शामिल हैं। मनमोहन सिंह तो दो बार प्रधानमंत्री रहे। वहीं ज्ञानी जैल सिंह देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे।
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मनमोहन सिंह, ज्ञानी जैल सिंह, इंदर कुमार गुजराल।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
भारत की राजनीति में पंजाब की भूमिका हमेशा से अहम रही है। इस राज्य के कई नेताओं ने देश को नई दिशा देने का काम किया है। पंजाब की आबादी बेशक देश की जनसंख्या का तीन प्रतिशत ही है, लेकिन यहां की धरती से राजनीति सीखकर इंद्र कुमार गुजराल व मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने और ज्ञानी जैल सिंह राष्ट्रपति। इतना ही नहीं, पंजाब से केंद्रीय विदेश मंत्री व केंद्रीय वित्तमंत्री की कुर्सी तक भी नेता पहुंच कर सूबे का नाम चमका चुके हैं।
इंद्र कुमार गुजराल मूल रूप से जालंधर के रहने वाले थे। वह 1989 के आम चुनाव में जालंधर से लोकसभा के लिए चुने गए, पहली बार वीपी सिंह कैबिनेट में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया और फिर 1996 में एचडी देवेगौड़ा कैबिनेट में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। 1997 में केंद्र में गठबंधन दलों की ओर से गुजराल को देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए चुना गया, इस पद पर वह लगभग एक वर्ष तक रहे।
मनमोहन सिंह का जन्म यूं तो पाकिस्तानी पंजाब में हुआ, लेकिन ग्रेटर पंजाब के लिहाज से वह देश की राजनीति में बड़ा नाम हैं। वह यूपीए-1 और 2 में लगतार 10 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे। इससे पहले उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में काम किया और देश को उदारीकरण का मंत्र दिया।
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ज्ञानी जैल सिंह पंजाब की राजनीति से लेकर निकलकर देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का जन्म 15 मई, 1916 को फरीदकोट-कोटकपूरा हाईवे के किनारे स्थित गांव संधवां में हुआ था। 1972 में पंजाब विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल करके पंजाब के मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला। 1979 में लोक सभा सांसद बनने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया। 1982 में राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी का कार्यकाल खत्म होने पर ज्ञानी जैल सिंह को सर्वसम्मति से देश के सातवें राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने के लिए नामित किया गया था।
स्वर्ण सिंह पुरेवाल का जन्म पंजाब के जलंधर जिले के शंकर गांव में 10 अगस्त 1907 को हुआ था। वह एक कृषि परिवार में पैदा हुए थे। उन्होंने 1952 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कैबिनेट में प्रवेश किया। उन्होंने भारत सरकार में उच्च रैंकिंग कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने जीवन के 23 साल बिताए। भारत के विभिन्न मंत्रालयों के वह 23 साल कैबनिट मंत्री रहे और कई शक्तिशाली विभाग उनके पास रहे।
इन्होंने भी चमकाया पंजाब का नाम
-रघुनंदन लाल भाटिया पंजाब के अमृतसर जिले से 6 बार सांसद रहे। वे केरल और बिहार के राज्यपाल रहे। 23 जून 2004 से 10 जुलाई 2008 तक वह केरल और 10 जुलाई 2008 से लेकर 28 जून 2009 तक बिहार के राज्यपाल रहे। भाटिया 1992 में पीवी नरसिम्हा की सरकार में विदेश राज्यमंत्री भी रहे।
-प्रकाश सिंह बादल 1970 में 43 साल की उम्र में जब वे पंजाब के मुख्यमंत्री बने, तब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले भारत के सबसे युवा नेता थे। मालवा के लंबी विधानसभा क्षेत्र से लड़ने वाले प्रकाश सिंह बादल ने पांच बार सीएम की कुर्सी संभाली।चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में वह कृषि मंत्री बने थे।
-गुरदासपुर से सांसद रहीं स्वर्गीय सुखबंस कौर भिंडर के नाम छह बार संसद पहुंचने का रिकॉर्ड है। सुखबंस एक मात्र महिला सांसद है, जो लगातार पांच बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा और एक बार राज्यसभा से सांसद बनीं। 1992 से मई 1996 तक पर्यटन विभाग में केंद्रीय नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्री भी रहीं।
-विजय सांपला जालंधर के रहने वाले हैं, जिनहोंने 2014 में लोकसभा चुनाव होशियारपुर से लड़कर जीता था और केंद्रीय मंत्री की कुर्सी हासिल की। बाद में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन बनाए गए।
-संतोष चौधरी तीन बार सांसद रही। मूल रूप से होशियारपुर की रहने वाली संतोष चौधरी केंद्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं।
-अश्विनी कुमार पंजाब राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने पूर्व में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री और औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया । कई जिलों में डिप्टी कमिश्नर रह चुके आईएएस अधिकारी सोमप्रकाश मौजूदा समय में केंद्रीय राज्यमंत्री तक पहुंचे हैं।
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इंद्र कुमार गुजराल मूल रूप से जालंधर के रहने वाले थे। वह 1989 के आम चुनाव में जालंधर से लोकसभा के लिए चुने गए, पहली बार वीपी सिंह कैबिनेट में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया और फिर 1996 में एचडी देवेगौड़ा कैबिनेट में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। 1997 में केंद्र में गठबंधन दलों की ओर से गुजराल को देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए चुना गया, इस पद पर वह लगभग एक वर्ष तक रहे।
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मनमोहन सिंह का जन्म यूं तो पाकिस्तानी पंजाब में हुआ, लेकिन ग्रेटर पंजाब के लिहाज से वह देश की राजनीति में बड़ा नाम हैं। वह यूपीए-1 और 2 में लगतार 10 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे। इससे पहले उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में काम किया और देश को उदारीकरण का मंत्र दिया।
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ज्ञानी जैल सिंह पंजाब की राजनीति से लेकर निकलकर देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का जन्म 15 मई, 1916 को फरीदकोट-कोटकपूरा हाईवे के किनारे स्थित गांव संधवां में हुआ था। 1972 में पंजाब विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल करके पंजाब के मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला। 1979 में लोक सभा सांसद बनने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया। 1982 में राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी का कार्यकाल खत्म होने पर ज्ञानी जैल सिंह को सर्वसम्मति से देश के सातवें राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने के लिए नामित किया गया था।
स्वर्ण सिंह पुरेवाल का जन्म पंजाब के जलंधर जिले के शंकर गांव में 10 अगस्त 1907 को हुआ था। वह एक कृषि परिवार में पैदा हुए थे। उन्होंने 1952 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कैबिनेट में प्रवेश किया। उन्होंने भारत सरकार में उच्च रैंकिंग कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने जीवन के 23 साल बिताए। भारत के विभिन्न मंत्रालयों के वह 23 साल कैबनिट मंत्री रहे और कई शक्तिशाली विभाग उनके पास रहे।
इन्होंने भी चमकाया पंजाब का नाम
-रघुनंदन लाल भाटिया पंजाब के अमृतसर जिले से 6 बार सांसद रहे। वे केरल और बिहार के राज्यपाल रहे। 23 जून 2004 से 10 जुलाई 2008 तक वह केरल और 10 जुलाई 2008 से लेकर 28 जून 2009 तक बिहार के राज्यपाल रहे। भाटिया 1992 में पीवी नरसिम्हा की सरकार में विदेश राज्यमंत्री भी रहे।
-प्रकाश सिंह बादल 1970 में 43 साल की उम्र में जब वे पंजाब के मुख्यमंत्री बने, तब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले भारत के सबसे युवा नेता थे। मालवा के लंबी विधानसभा क्षेत्र से लड़ने वाले प्रकाश सिंह बादल ने पांच बार सीएम की कुर्सी संभाली।चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में वह कृषि मंत्री बने थे।
-गुरदासपुर से सांसद रहीं स्वर्गीय सुखबंस कौर भिंडर के नाम छह बार संसद पहुंचने का रिकॉर्ड है। सुखबंस एक मात्र महिला सांसद है, जो लगातार पांच बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा और एक बार राज्यसभा से सांसद बनीं। 1992 से मई 1996 तक पर्यटन विभाग में केंद्रीय नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्री भी रहीं।
-विजय सांपला जालंधर के रहने वाले हैं, जिनहोंने 2014 में लोकसभा चुनाव होशियारपुर से लड़कर जीता था और केंद्रीय मंत्री की कुर्सी हासिल की। बाद में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन बनाए गए।
-संतोष चौधरी तीन बार सांसद रही। मूल रूप से होशियारपुर की रहने वाली संतोष चौधरी केंद्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं।
-अश्विनी कुमार पंजाब राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने पूर्व में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री और औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया । कई जिलों में डिप्टी कमिश्नर रह चुके आईएएस अधिकारी सोमप्रकाश मौजूदा समय में केंद्रीय राज्यमंत्री तक पहुंचे हैं।