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Chandigarh News: महेंद्रगढ़ के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे मनोहर लाल
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अलग-अलग लगाए जा रहे हैं कयास
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। महेंद्रगढ़ के पाली में आयोजित पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, मगर राज्य के पूर्व सीएम व कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल नहीं पहुंचे। यह पहली बार है जब राज्य में पार्टी के कार्यक्रम में मनोहर लाल न आए हों। कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी न होने से अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से बताया गया है कि उनका दिल्ली में पहले से कार्यक्रम तय था, इसलिए वह नहीं आए। इसके उलट एक चर्चा यह भी है कि राव इंद्रजीत केंद्र में राज्य मंत्री बनाए जाने से काफी खफा चल रहे हैं। वह कई बार अपना दर्द सार्वजनिक बता चुके हैं कि उनके जूनियर सांसदों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया। इतने सीनियर होने के बावजूद उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अहीरवाल बेल्ट में राव इंद्रजीत की अहमियत को अच्छी तरह से समझता है। इसका जीता जागता उदाहरण शाह के कार्यक्रम में देखने को मिला। शाह ने अपने कार्यक्रम में उन्हें पूरी तवज्जो दी है। सैनी को हटाकर उन्होंने राव को अपने साथ खड़ा किया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में मनोहर लाल को न लाना पार्टी की एक रणनीति हो सकती है। क्योंकि राव का इशारा कहीं न कहीं मनोहर लाल की तरफ है। मनोहर लाल पहली बार सांसद बने और उन्हें कैबिनेट का दर्जा दिया गया। कार्यक्रम में यदि मनोहर लाल आते तो प्रोटोकॉल के हिसाब से राव से पहले मनोहर लाल को ही बोलना पड़ता।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। महेंद्रगढ़ के पाली में आयोजित पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, मगर राज्य के पूर्व सीएम व कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल नहीं पहुंचे। यह पहली बार है जब राज्य में पार्टी के कार्यक्रम में मनोहर लाल न आए हों। कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी न होने से अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से बताया गया है कि उनका दिल्ली में पहले से कार्यक्रम तय था, इसलिए वह नहीं आए। इसके उलट एक चर्चा यह भी है कि राव इंद्रजीत केंद्र में राज्य मंत्री बनाए जाने से काफी खफा चल रहे हैं। वह कई बार अपना दर्द सार्वजनिक बता चुके हैं कि उनके जूनियर सांसदों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया। इतने सीनियर होने के बावजूद उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अहीरवाल बेल्ट में राव इंद्रजीत की अहमियत को अच्छी तरह से समझता है। इसका जीता जागता उदाहरण शाह के कार्यक्रम में देखने को मिला। शाह ने अपने कार्यक्रम में उन्हें पूरी तवज्जो दी है। सैनी को हटाकर उन्होंने राव को अपने साथ खड़ा किया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में मनोहर लाल को न लाना पार्टी की एक रणनीति हो सकती है। क्योंकि राव का इशारा कहीं न कहीं मनोहर लाल की तरफ है। मनोहर लाल पहली बार सांसद बने और उन्हें कैबिनेट का दर्जा दिया गया। कार्यक्रम में यदि मनोहर लाल आते तो प्रोटोकॉल के हिसाब से राव से पहले मनोहर लाल को ही बोलना पड़ता।