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Hindi News ›   Chandigarh ›   Manimahesh Yatra from 24 August till 6 September, Lord Shiva, Manimahesh Lake

मणिमहेश यात्राः मणि के रूप में दर्शन देते हैं भगवान शिव, जानिए क्या होगा रूट, बरतें 5 सावधानियां

Fri, 23 Aug 2019 10:30 AM IST
खुशबू गोयल सौरभ खन्ना/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
सौरभ खन्ना/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 23 Aug 2019 10:30 AM IST
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Manimahesh Yatra from 24 August till 6 September, Lord Shiva, Manimahesh Lake
श्री मणिमहेश यात्रा - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
श्री अमरनाथ यात्रा से भी मुश्किल मानी जाने वाली उत्तर भारत की प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा अधिकारिक तौर पर शुरू होने जा रही है। यह 24 अगस्त शनिवार से शुरू होगी और छह सितंबर चक चलेगी। इस यात्रा का आगाज श्री कृष्ण जन्माष्टमी से शुरू होकर श्री राधा अष्टमी तक होता हैं। मान्यता है कि शिवकुंड में भगवान शिव के मणि रूप के दर्शन होते हैं।
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एक प्रकाश कैलाश पर प्रकट होकर मणिमहेश झील की ओर बढ़कर उसी में विलीन हो जाता है। इस प्रकाश की तुलना भगवान शिव के गले में पड़े शेषनाग की मणि से की जाती है। यह प्रकाश इस बात का प्रतीक है कि भगवान शिव कैलाश में विराजमान हैं। श्री अमरनाथ गुफा 12 हजार 756 मीटर ऊंची है। श्री मणिमहेश यात्रा में शिवकुंड की ऊंचाई 13 हजार 500 मीटर ऊंची है।
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श्री अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन श्री मणिमहेश यात्रा के लिए कोई पंजीकरण नहीं होता। इस बार श्री अमरनाथ यात्रा को बीच में रोक दिया गया था, जिस कारण अब श्री मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक है।
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वहीं संसाधनों के अभाव के बीच भक्तों का सहारा देश भर की संस्थाएं बन रही हैं जो भक्तों के ठहरने, मेडिकल और लंगर की सेवाएं दे रही हैं। हालांकि संस्थाओं की तरफ से यात्रा की तैयारियां 10 से 15 दिन पहले ही शुरू होने लगती हैं, क्योंकि जन्माष्टमी से पहले ही तमाम भक्त यात्रा पर जाना शुरू कर देते हैं। जालंधर शहर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा यात्रा के मार्ग पर कई तरह के लंगर लगाए जाते हैं।

भरमौर से गौरी कुंड तक हवाई सेवा

श्री मणिमहेश यात्रा पर जाने के लिए जालंधर से पठानकोट 115 किलोमीटर, पठानकोट से चंबा 120 किलोमीटर, चंबा से भरमौर 60 किलोमीटर, भरमौर से हड़सर 13 किलोमीटर तक सड़क मार्ग के बाद पैदल यात्रा हड़सर से धनछो 6 किलोमीटर, धनछो से गौरी कुंड 6 किलोमीटर और गौरी कुंड से मणिमहेश झील का एक किलोमीटर का रास्ता है। इसके अलावा भरमौर से सीधा गौरी कुंड तक हवाई सेवा भी है।

भरमौर में है विश्व का एकमात्र धर्मराज महादेव मंदिर
भरमौर के पड़ाव में ही 84 प्राचीन मंदिर हैं, जिनमें विश्व का एकमात्र मंदिर धर्मराज महादेव का है। यहां 84 मंदिर होने के कारण इसे भरमौर चौरासी के नाम भी विख्यात है। मान्यता है कि मनुष्य के मरने के बाद उसकी आत्मा का फैसला धर्मराज यहीं करते हैं।

ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण हार्ट पेशेंट को आ सकती है दिक्कत
यात्रा पर जाने से पहले डॉक्टर से चेकअप जरूर करवा लेना चाहिए। यात्रा पर जाते समय जरूरत के अनुसार आवश्यक वस्तुएं टार्च, रेनकोट, गर्म टोपी, गर्म इनर और दवाएं लेकर जाएं।
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