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Chandigarh News: एआई को बनाया कामयाबी का साथी, एचसीएस में मनमोहन ने रचा मुकाम
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एआई को बनाया कामयाबी का साथी, एचसीएस में मनमोहन ने रचा मुकाम
दो बार यूपीएससी इंटरव्यू तक पहुंचे, सफलता नहीं मिली तो भी नहीं मानी हार; रोज छह-सात घंटे पढ़ाई और तनाव दूर करने के लिए बैडमिंटन-वेब सीरीज का सहारा
चंडीगढ़। असफलता को मंजिल के रास्ते की रुकावट नहीं, सीख मानकर आगे बढ़ते रहे सेक्टर-19ए निवासी मनमोहन सिंह ने हरियाणा सिविल सर्विसेस (एचसीएस) परीक्षा में सफलता हासिल की है। हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के वीरवार को जारी परिणाम में 375.2 अंकों के साथ 16वें स्थान पर रहे मनमोहन ने तैयारी के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपना साथी बनाया। उनका कहना है कि पढ़ाई में एआई ने कई विषयों को समझने और तैयारी को बेहतर बनाने में अहम मदद की।
कुरुक्षेत्र एनआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने वाले मनमोहन इससे पहले यूपीएससी परीक्षा में दो बार इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ। उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी। रोज छह-सात घंटे पढ़ाई को लक्ष्य बनाया लेकिन किसी तय टाइम टेबल के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ते रहे। तनाव होने पर बैडमिंटन खेलते या वेब सीरीज देखते थे।
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मनमोहन ने युवाओं को बिना तनाव लक्ष्य पर केंद्रित रहने और नियमित समाचार पत्र पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया जिन्होंने यूपीएससी में असफलता के बाद भी उनका हौसला बनाए रखा। पिता रविंदर सिंह जुबली क्लब के वाइस प्रेसिडेंट, मां जगविंदर कौर होममेकर हैं। छोटा भाई जसकीरत सिंह बीए कर रहा है। सिविल सर्विस में जाने की प्रेरणा उन्हें रेलवे कर्मचारी रहे दादा से मिली।
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दो बार यूपीएससी इंटरव्यू तक पहुंचे, सफलता नहीं मिली तो भी नहीं मानी हार
चंडीगढ़। असफलता को मंजिल के रास्ते की रुकावट नहीं, सीख मानकर आगे बढ़ते रहे सेक्टर-19ए निवासी मनमोहन सिंह ने हरियाणा सिविल सर्विसेस (एचसीएस) परीक्षा में सफलता हासिल की है। हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के वीरवार को जारी परिणाम में 375.2 अंकों के साथ 16वें स्थान पर रहे मनमोहन ने तैयारी के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपना साथी बनाया। उनका कहना है कि पढ़ाई में एआई ने कई विषयों को समझने और तैयारी को बेहतर बनाने में अहम मदद की।
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कुरुक्षेत्र एनआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने वाले मनमोहन इससे पहले यूपीएससी परीक्षा में दो बार इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ। उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी। रोज छह-सात घंटे पढ़ाई को लक्ष्य बनाया लेकिन किसी तय टाइम टेबल के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ते रहे। तनाव होने पर बैडमिंटन खेलते या वेब सीरीज देखते थे।
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मनमोहन ने युवाओं को बिना तनाव लक्ष्य पर केंद्रित रहने और नियमित समाचार पत्र पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया जिन्होंने यूपीएससी में असफलता के बाद भी उनका हौसला बनाए रखा। पिता रविंदर सिंह जुबली क्लब के वाइस प्रेसिडेंट, मां जगविंदर कौर होममेकर हैं। छोटा भाई जसकीरत सिंह बीए कर रहा है। सिविल सर्विस में जाने की प्रेरणा उन्हें रेलवे कर्मचारी रहे दादा से मिली।