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अमर उजाला संवाद पंजाब: 'संघर्ष की सौगात' में बोले महिंद्रा फाइनेंस के MD-कोई जानबूझकर डिफॉल्टर नहीं होना चाहता

Mon, 07 Aug 2023 01:48 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 07 Aug 2023 01:48 PM IST
सार

एमडी रमेश अय्यर ने कहा कि महिंद्रा फाइनेंस ट्रैक्टर घर की मरम्मत बीमा पॉलिसी के लिए भी लोन देती है। लोन डिफॉल्टर पर उन्होंने कहा ज्यादातर डिफाल्टर परिस्थिति के अनुसार होते हैं। कोई जानबूझकर डिफाल्टर नहीं होना चाहता।

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Mahindra Finance MD Ramesh Iyer Dehat Startup Co-Founder Shyam Sunder in Amar Ujala Samvad Punjab
अमर उजाला संवाद पंजाब का दूसरा सत्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला संवाद पंजाब के सत्र 'संघर्ष की सौगात' में महिंद्रा फाइनेंस के एमडी व वीसी रमेश अय्यर ने कहा कि बैंक व फाइनेंस कंपनियों की बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वह लोन देते वक्त ग्राहकों की जरूरत को समझें और फिर उन्हें समझाएं कि जो लोन वह ले रहे हैं, उसके क्या परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सोच बिल्कुल नहीं होनी चाहिए कि लोन मिल रहा था तो इसलिए ले लिया। जब जरूरत हो तभी लोन लेना चाहिए। इस बात को उन्होंने एक उदाहरण से भी समझाया। 

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उन्होंने कहा, लोन मिल रहा था तो किसान ने ट्रैक्टर ले लिया। जबकि इसे इस तरह से सोचना चाहिए कि हमें ट्रैक्टर की जरूरत है तो क्या लोन मिलेगा। अगर लोन लेते वक्त किसान या ग्राहक इस तरह से सोचेंगे तो आत्महत्याएं की खबरें कम आएंगी। उन्होंने कहा कि फाइनेंस कंपनियों को स्वार्थी नहीं होना चाहिए। यह पाटर्नरशिप की गेम है। ग्राहकों के साथ रिश्ते बनाने चाहिए। लोन देने के बाद जब ग्राहक मुश्किल समय में फंसता है तो उस समय भी बैंक व फाइनेंस कंपनियों को ग्राहकों का साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिंद्रा फाइनेंस से ग्राहक एक बार लोन लेता है लेकिन उस ग्राहक को जीवन भर के लिए अपना बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि फाइनेंस कंपनी को प्रोडक्ट कंपनी नहीं बल्कि सॉल्यूशन कंपनी की तरह व्यवहार करना चाहिए।

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जानबूझकर कोई डिफॉल्टर नहीं बनता, बल्कि परिस्थितयां उसे बनाती है

रमेश अय्यर ने बताया कि हमारा अनुभव बताता है कि कोई भी ग्राहक जानबूझकर डिफाल्टर नहीं बनता है बल्कि परिस्थितियां उसे बनाती हैं। अगर बैंक ग्राहकों की परिस्थितियों को समझकर लोन दें तो परेशानी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि लोन एक प्रोडक्ट होता है। लोन देते वक्त यह देखना चाहिए कि ग्राहक की जरूरत क्या है। उसके सामने क्या परिस्थितियां हैं। ग्राहकों के साथ ऐसा कड़क रिश्ता होना चाहिए कि ग्राहक के सामने जब परेशानी आए तो वह हिम्मत कर अपने बैंक व फाइनेंस कंपनी को बताए, ताकि बैंक उसका समाधान ढूंढ़े।

ग्राहक भी डर की वजह से अपनी समस्या बैंक को नहीं बताता है। ग्राहक खुद से अपनी समस्या का समाधान ढूंढ़ता रहता है और वह बाद में कानूनी चक्कर में फंस जाता है। अगर ग्राहक अपनी समस्या बताए तो कंपनी उसका समाधान खोज लेती है।

कोविड के समय महिंद्रा ने ग्राहकों व कर्मियों का साथ दिया

कोविड के दौरान आई चुनौतियों के बारे में अय्यर ने बताया कि यह बहुत मुश्किल समय था। न तो हम ग्राहक के पास जा पा रहे थे और न ही ग्राहक हमारे पास आ रहे थे। स्थितियां ऐसी हो गईं कि पहली तिमाही में कंपनी को 1500 करोड़ का घाटा हो गया लेकिन कंपनी को अपने ग्राहक और कर्मचारियों पर पूरा विश्वास था। हमें हमारे बिजनेस मॉडल पर भरोसा था। हमने ग्राहकों के लोन अकाउंट को स्टडी किया। इसके बाद ग्राहकों को बताया कि आप फिलहाल के लिए अभी किस्त जमा न करें।





ग्राहकों को पांच से छह महीने का समय दिया। वहीं, हमारे कर्मचारी भी भयभीत थे। हमने अपने कर्मचारियों को भरोसे में लिया। हमनें कर्मचारियों को बताया कि हम क्या एक्शन ले रहे हैं और मुझे खुशी है कि कोविड टाइम में हमने किसी भी कर्मचारी को काम से नहीं निकाला। जिस साल पहली तिमाही में घाटा हुआ था, जब वह साल खत्म हुआ तो कंपनी एक हजार करोड़ के फायदे में थी।

महिंद्रा 70 लाख ग्राहकों को फाइनेंस कर चुका

रमेश अय्यर ने बताया कि महिंद्रा के 70 लाख ग्राहक हैं। कंपनी 70 लाख लोगों को फाइनेंस कर चुकी है। कंपनी के 80 फीसदी ग्राहक वे हैं, जो पहली बार लोन लेते हैं। कंपनी थ्री-व्हीलर, ट्रैक्टर, छोटी बिजनेस के लिए वर्किंग कैपिटल और घर को ठीक-ठाक करने के लिए एक से दो लाख का लोन देती है। उन्होंने बताया कि ऑटो के मालिक जब अपनी किस्त देते हैं तो 50 फीसदी राशि सिक्के में होते हैं लेकिन हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं होती है। मेरा मानना है कि जो समस्या दिखती है उसका सॉल्यूशन ढूंढ़ों तो वह अपने आप में अवसर बन जाती है और यही कारण है कि हमारी कंपनी सबसे ज्यादा थ्री-व्हीलर को फाइनेंस करती है।

जब एमडी साहब ने सुनाएं तरानें

सेशन के अंत में महिंद्रा फाइनेंस कंपनी के एमडी रमेश अय्यर ने कहा कि जब वह अपने काम से फ्री होते हैं तो गीत गुनगुनाते हैं। फिल्में देखते हैं। सत्र की समाप्ति पर उन्होंने राग यमन सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने गाया कि जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना...।
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