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फरमानः 3 हफ्ते में नहीं सुलझा विवाद, तो इस ट्रेन का मालिक बनेगा किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Sun, 19 Mar 2017 09:26 AM IST
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शताब्दी एक्सप्रेस
- फोटो : File Pic
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लुधियाना का एक किसान, जिसकी जमीन का अधिग्रहण हो गया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। लेकिन तारीख पर तारीख पड़ने के बाद जब अधिग्रहण का पैसा नहीं मिला, तो कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। अदालत ने किसान के नाम पूरी ट्रेन कर दी।
हांलाकि शनिवार को हुई सुनवाई में अदालत की तरफ से साफ किया गया है कि अगर रेलवे तीन सप्ताह के बीच किसान को मुआवजा नहीं देता। तो स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर को किसान के नाम कर दिया जाएगा।
रेलवे ने मांगा तीन सप्ताह का वक्त
एडिशनल सेशन जज जसपाल वर्मा की अदालत में रेलवे अधिकारियों ने किसान को पेमेंट देने के लिए तीन सप्ताह का वक्त मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अदालत ने पेमेंट के लिए रेलवे को सात अप्रैल तक का वक्त दिया है। शिकायतकर्ता किसान ने कुर्क की गई संपत्ति की नीलामी के लिए अदालत में आवेदन किया था, जबकि रेलवे ने भी पेमेंट करने के लिए तीन सप्ताह का वक्त मांगा।
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इस पर अदालत ने रेलवे को और वक्त दे दिया। साथ ही कुर्क की गई संपत्ति स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर के कमरे की सुपुर्ददारी रेलवे अधिकारियों के पास ही रहेगी। अदालत ने संपत्ति की नीलामी के आवेदन को भी फिलहाल पेंडिंग कर लिया है।
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हांलाकि शनिवार को हुई सुनवाई में अदालत की तरफ से साफ किया गया है कि अगर रेलवे तीन सप्ताह के बीच किसान को मुआवजा नहीं देता। तो स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर को किसान के नाम कर दिया जाएगा।
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रेलवे ने मांगा तीन सप्ताह का वक्त
एडिशनल सेशन जज जसपाल वर्मा की अदालत में रेलवे अधिकारियों ने किसान को पेमेंट देने के लिए तीन सप्ताह का वक्त मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अदालत ने पेमेंट के लिए रेलवे को सात अप्रैल तक का वक्त दिया है। शिकायतकर्ता किसान ने कुर्क की गई संपत्ति की नीलामी के लिए अदालत में आवेदन किया था, जबकि रेलवे ने भी पेमेंट करने के लिए तीन सप्ताह का वक्त मांगा।
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इस पर अदालत ने रेलवे को और वक्त दे दिया। साथ ही कुर्क की गई संपत्ति स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर के कमरे की सुपुर्ददारी रेलवे अधिकारियों के पास ही रहेगी। अदालत ने संपत्ति की नीलामी के आवेदन को भी फिलहाल पेंडिंग कर लिया है।
रेलवे की ये लापरवाही बन गई बड़ी मुसीबत
शताब्दी एक्सप्रेस
- फोटो : File Photo
लुधियाना चंडीगढ़ रेल लाइन के निर्माण के लिए 2007 में जमीन का किसानों से अधिग्रहण किया गया था, लेकिन किसानों को इसका पूरा मूल्य नहीं दिया गया। इस पर गांव कटाणा के किसान संपूर्ण सिंह ने कोर्ट में क्लेम देने के लिए आवेदन किया। इसे अदालत ने मंजूर किया। अदालत ने किसानों को बढ़ाई गई राशि एक करोड़ पांच लाख 38 हजार 231 रुपये और 51 पैसे की अदायगी करने को कहा। बावजूद इसके रेलवे ने संपूर्ण सिंह को मुआवजा राशि नहीं दी।
संपूर्ण ने अदालत के आदेशों को लागू कराने के लिए एग्जीक्यूशन का आवेदन किया। रेलवे ने फिर भी अनदेखी की, इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा रेलवे विभाग की संपत्ति की सूची व शताब्दी एक्सप्रेस की सूची दिए जाने के बाद इसे 18 मार्च तक अटैच कर रिपोर्ट देने को कहा। 15 मार्च की शाम को अदालती आदेश के अनुसार अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर स्वर्ण शताब्दी और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर के कमरे को अटैच कर दिया।
बाद में रेल के सेक्शन इंजीनियर प्रदीप कुमार द्वारा लिखित सुपुर्दगी दिए जाने के बाद इसे कुछ ही मिनटों में रिलीज कर दिया गया। संपूर्ण सिंह के वकील राकेश गांधी का कहना है कि इस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जसपाल वर्मा की अदालत ने अब रेलवे अधिकारियों को सात अप्रैल तक पेमेंट करने का वक्त दिया है।
संपूर्ण ने अदालत के आदेशों को लागू कराने के लिए एग्जीक्यूशन का आवेदन किया। रेलवे ने फिर भी अनदेखी की, इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा रेलवे विभाग की संपत्ति की सूची व शताब्दी एक्सप्रेस की सूची दिए जाने के बाद इसे 18 मार्च तक अटैच कर रिपोर्ट देने को कहा। 15 मार्च की शाम को अदालती आदेश के अनुसार अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर स्वर्ण शताब्दी और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर के कमरे को अटैच कर दिया।
बाद में रेल के सेक्शन इंजीनियर प्रदीप कुमार द्वारा लिखित सुपुर्दगी दिए जाने के बाद इसे कुछ ही मिनटों में रिलीज कर दिया गया। संपूर्ण सिंह के वकील राकेश गांधी का कहना है कि इस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जसपाल वर्मा की अदालत ने अब रेलवे अधिकारियों को सात अप्रैल तक पेमेंट करने का वक्त दिया है।