डॉक्टर साहब! मेरा बेटा पबजी गेम के मकड़ जाल में फंस कर अपना मानसिक संतुलन खो रहा है। सुबह से लेकर देर रात तक इसी गेम को खेलते हुए दो बार आत्महत्या के प्रयास कर चुका है। एक बार घर की छत से कूद गया। दूसरी बार एक निजी अस्पताल में अपना गला दबाकर मौत को गले लगाने के प्रयास किया। मोबाइल छीनने पर हिंसक हो जाता है।
इसे कोई सुधबुध नहीं रहती। खुद मेडिकल का स्टूडेंट है। पबजी गेम ने इसकी पढ़ाई पर गहरा असर डाला है। बीते दो महीने से इसको पबजी गेम खेलने की लत लगी थी। गुरदासपुर के एक किसान परिवार ने अपना दु:ख प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. हरजोत सिंह मक्कड़ को जब बयां किया तो वह भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए।
3 of 5
pubg game
- फोटो : gearnuke.com
छात्र की आयु महज 16 साल की है। अमर उजाला से बातचीत में डॉ. मक्क्ड़ ने बताया कि दिन में 18 से 22 घंटे तक मोबाइल में पबजी गेम खेलने के बाद इस स्टूडेंट के दिमाग में इस गेम का नक्शा घर कर गया है। गेम के अनुसार अपने को ढालने के प्रयास में लगे रहने के कारण वह अपनी सुधबुध खो बैठा है।
4 of 5
pubg
- फोटो : Digital Trends
डॉ. मक्कड़ ने बताया कि युवक का इलाज चल रहा है। उसकी काउंसिलिंग की गई है। कुछ जरूरी दवाएं दी गई हैं। यह युवक ऑनलाइन गेम के चक्कर में फंस चुका था। रात-रात जागकर गेम खेलने के कारण उसे यह लगने लगा था कि उसे कोई मार डालेगा। युवक के मां-बाप डरे हैं कि कहीं वह खुद को नुकसान न पहुंचा ले।
डॉ. मक्कड़ ने कहा कि 18 वर्ष की आयु से कम युवाओं को मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल न करने दें। अभिभावक अपने बच्चों पर नजर रखें कि वे मोबाइल पर क्या कर रहे हैं, क्योंकि ऑनलाइन गेम का ऐसा जाल बन चुका है जिससे युवा मुक्ति पाने में असमर्थ हो जाते हैं फिर मौत को गले लगाने के विषय में सोचते हैं।