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Chandigarh News: मेमोग्राफी के लिए पीजीआई में लंबी कतार, जीएमएसएच-16 को मरीजों का इंतजार

Sat, 25 Feb 2023 01:21 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Feb 2023 01:21 AM IST
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Long queue in PGI for mammography, GMSH-16 waiting for patients
चंडीगढ़। स्तन कैंसर से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से तीन साल पहले जीएमएसएच 16 में डेढ़ करोड़ खर्च कर मेमोग्राफी जांच की मशीन लगाई गई लेकिन वहां जानकारी के अभाव में महिलाएं जांच कराने नहीं पहुंच रहीं। वहीं पीजीआई में जांच के लिए लंबी कतार लग रही है। वहां मरीजों की जांच का दबाव इतना ज्यादा है कि उन्हें उसी दिन जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही। एक तरफ मरीजों की लंबी कतार लग रही है जबकि दूसरी तरफ जानकारी के अभाव में डॉक्टर मरीजों के आने का इंतजार कर रहे हैं।बता दें कि पीजीआई में मेमोग्राफी जांच शुल्क 200 रुपये है, जबकि निजी सेंटर इसके लिए दो से ढाई हजार रुपये ले रहे हैं। वहीं जीएमएसएच 16 में यह जांच निशुल्क की जा रही है। जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल का कहना है कि डेढ़ करोड़ की लागत से आधुनिक मेमोग्राफी मशीन 2019 में अस्पताल में इंस्टॉल की गई थी जिसका प्रतिदिन संचालन किया जा रहा है।
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लक्षण दिखे तो हो जाएं सचेत
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल मोंगा के अनुसार स्तन कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए 45 साल के बाद मेमोग्राफी जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। इसके साथ ही ब्रेस्ट में गांठ या स्किन मोटी होने, ब्रेस्ट और कंधे के नीचे की ओर दर्द या सूजन हो, ब्रेस्ट का आकार व रंग में बदलाव हो, रेशेज आएं और गांठ महसूस हो तो मेमोग्राफी टेस्ट तत्काल कराएं।
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मेमोग्राफी से आसान हुई डाइग्नोसिस
डॉ. पारुल ने बताया कि मौजूदा समय में मेमोग्राफी टेस्ट को ब्रेस्ट कैंसर के डाइग्नोसिस का सबसे सटीक और आसान तरीका माना जा रहा है। इसमें डाइग्नोस के लिए कम रेंज वाली एक्स-रे का उपयोग किया जाता है। इसमें रिपोर्ट को डिजिटल रूप में भी देखा जा सकता है। ब्रेस्ट में बनी छोटी से छोटी गांठ का भी बहुत आसानी से सटीक पता चल जाता है।
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स्तन कैंसर बढ़ रहा तेजी से (पीजीआई के आंकड़े)
वर्ष स्तन कैंसर गर्दन और सिर का कैंसर फेफड़े का कैंसर

2020 570 509 175

2021 622 538 176

2022 857 928 279

कोट-
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखते ही तत्काल जांच जरूरी है। इलाज में देरी मरीज की जिंदगी खतरे में डाल सकती है। कैंसर के इलाज में देरी खतरनाक साबित हो सकती है। जागरूकता के अभाव के कारण ही स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

-प्रो राकेश कपूर, रेडियोथेरेपी और ऑन्कोलॉजी व टेरेटरी सेंटर प्रमुख पीजीआई
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