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बिना संगठन दिग्गजों के सहारे कांग्रेस: गुटबाजी के चलते दस साल से न बन पाया संगठन, ये हैं चुनौतियां; प्लान बदला
Sat, 16 Mar 2024 11:43 AM IST
शाहरुख खान
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 16 Mar 2024 11:43 AM IST
सार
बिना संगठन कांग्रेस को पुराने दिग्गजों और एंटी इंकमबेंसी का सहारा है। गुटबाजी के चलते दस साल से कांग्रेस का संगठन नहीं बन पाया। कांग्रेस समर्थकों के दम पर ही चुनावी ताल ठोकने की तैयारी में है।
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Lok Sabha Elections
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दस साल पहले की तर्ज पर इस बार भी हरियाणा कांग्रेस लोकसभा चुनाव में बिना संगठन ताल ठोकेगी। वर्तमान में हरियाणा कांग्रेस धड़ों में बंटी और सभी धड़ों की अपनी डफली और अपना राग है। पिछले दस साल से सत्ता से बेदखल कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में अपने पुराने दिग्गजों और सरकार के खिलाफ एंटी इंकमबेंसी के सहारे जीत मिलने की आस है।
बूथ लेवल तक अपना संगठन करने वाली भाजपा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस लगातार रणनीति बदल रही है। पहले नए चेहरों को मौका देने की तैयारी थी, लेकिन अब पार्टी हाईकमान ने पुराने दिग्गजों और अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत चेहरों को लोकसभा चुनाव में उतारने की मन बनाया है।
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश में अपना संगठन खड़ा नहीं कर पाना है। बिना संगठन के चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव प्रबंधन और बूथों को संभालना आसान नहीं है। दूसरी ओर, भाजपा, जजपा, इनेलो और आप के मजबूत संगठन हैं। कांग्रेस ने जिला प्रभारी और लोकसभा कोऑर्डिनेटर तो नियुक्त किए हैं, लेकिन जिला व ब्लाक अध्यक्ष के पद खाली हैं।
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ऐसे में बिना सेना के ही कांग्रेस चुनावी ताल ठोकेगी। 2019 में भी कांग्रेस बिना संगठन के चुनावों में उतरी थी और एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इतना ही नहीं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत और दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से चुनाव हार गए थे। इनके अलावा पार्टी के कई बड़े चेहरों को हार का मुंह देखना पड़ा था।
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बूथ लेवल तक अपना संगठन करने वाली भाजपा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस लगातार रणनीति बदल रही है। पहले नए चेहरों को मौका देने की तैयारी थी, लेकिन अब पार्टी हाईकमान ने पुराने दिग्गजों और अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत चेहरों को लोकसभा चुनाव में उतारने की मन बनाया है।
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कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश में अपना संगठन खड़ा नहीं कर पाना है। बिना संगठन के चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव प्रबंधन और बूथों को संभालना आसान नहीं है। दूसरी ओर, भाजपा, जजपा, इनेलो और आप के मजबूत संगठन हैं। कांग्रेस ने जिला प्रभारी और लोकसभा कोऑर्डिनेटर तो नियुक्त किए हैं, लेकिन जिला व ब्लाक अध्यक्ष के पद खाली हैं।
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ऐसे में बिना सेना के ही कांग्रेस चुनावी ताल ठोकेगी। 2019 में भी कांग्रेस बिना संगठन के चुनावों में उतरी थी और एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इतना ही नहीं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत और दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से चुनाव हार गए थे। इनके अलावा पार्टी के कई बड़े चेहरों को हार का मुंह देखना पड़ा था।
गुटबाजी से पार पाना चुनौती, एक मंच पर आने का इंतजार
सत्ताधारी पार्टी भाजपा से लड़ने के साथ-साथ कांग्रेस में अंदरुनी लड़ाई से पार पाना बड़ी चुनौती है। पार्टी में पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और एसआरके दो बड़े गुट हैं। प्रदेशाध्यक्ष उदयभान हुड्डा गुट में हैं और दूसरी ओर कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे बीरेंद्र सिंह भी कांग्रेस में लौट आए हैं।
सत्ताधारी पार्टी भाजपा से लड़ने के साथ-साथ कांग्रेस में अंदरुनी लड़ाई से पार पाना बड़ी चुनौती है। पार्टी में पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और एसआरके दो बड़े गुट हैं। प्रदेशाध्यक्ष उदयभान हुड्डा गुट में हैं और दूसरी ओर कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे बीरेंद्र सिंह भी कांग्रेस में लौट आए हैं।
हुड्डा गुट जन आक्रोश रैलियां कर रहा है, जबकि एसआरके गुट संदेश यात्रा निकाल रहा है। प्रदेश ये दिग्गज नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान एक मंच पर आए थे, इसके बाद से दोबारा एकजुट नहीं हुए हैं।
तीन प्रदेशाध्यक्ष मिले, संगठन नहीं
पिछले दस साल में कांग्रेस को तीन प्रदेशाध्यक्ष मिले, लेकिन कोई भी संगठन खड़ा नहीं कर पाया। इनमें पूर्व प्रधान अशोक तंवर, कुमारी सैलजा और मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान के नाम शामिल हैं। उदयभान को प्रदेशाध्यक्ष बने दो साल हो चुके हैं और एक साल से हाईकमान के पास जिलाध्यक्षों की सूची अटकी है। जिलाध्यक्षों के बाद ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने हैं, लेकिन गुटबाजी के चलते सूची जारी नहीं हो पाई।
पिछले दस साल में कांग्रेस को तीन प्रदेशाध्यक्ष मिले, लेकिन कोई भी संगठन खड़ा नहीं कर पाया। इनमें पूर्व प्रधान अशोक तंवर, कुमारी सैलजा और मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान के नाम शामिल हैं। उदयभान को प्रदेशाध्यक्ष बने दो साल हो चुके हैं और एक साल से हाईकमान के पास जिलाध्यक्षों की सूची अटकी है। जिलाध्यक्षों के बाद ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने हैं, लेकिन गुटबाजी के चलते सूची जारी नहीं हो पाई।
ये हैं उम्मीदें
दस साल से भाजपा के सत्ता में होने के चलते एंटी इंकमेंसी का लाभ होगा
भाजपा के सांसदों की टिकट कटने पर उनको कांग्रेस में लाने की तैयारी
बुढ़ापा पेंशन, गैस सिलेंडर व ओपीएस के मुद्दों से लुभाने की कोशिश
दस साल से भाजपा के सत्ता में होने के चलते एंटी इंकमेंसी का लाभ होगा
भाजपा के सांसदों की टिकट कटने पर उनको कांग्रेस में लाने की तैयारी
बुढ़ापा पेंशन, गैस सिलेंडर व ओपीएस के मुद्दों से लुभाने की कोशिश
ये हैं चुनौतियां
दस साल से प्रदेश में कांग्रेस अपना संगठन नहीं बना पाई
पार्टी अलग-अलग धड़ों में बंटी है और गुटबाजी हावी है
दिग्गज नेताओं के एक-दूसरे के क्षेत्र में मदद करने की संभावना कम
दस साल से प्रदेश में कांग्रेस अपना संगठन नहीं बना पाई
पार्टी अलग-अलग धड़ों में बंटी है और गुटबाजी हावी है
दिग्गज नेताओं के एक-दूसरे के क्षेत्र में मदद करने की संभावना कम
ये हैं कांग्रेस के दावेदार
कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों की बात करें तो रोहतक से भूपेंद्र सिंह हुड्डा या दीपेंद्र हुड्डा चुनाव लड़ सकते हैं। सोनीपत और करनाल से कुलदीप शर्मा या अरविंद शर्मा, भिवानी लोकसभा क्षेत्र से श्रुति चौधरी या विधायक राव दान सिंह, हिसार बृजेंद्र सिंह, गुरुग्राम कैप्टन से अजय यादव, फरीदाबाद महेंद्र प्रताप सिंह, अंबाला से वरुण चौधरी या कुमारी सैलजा, सिरसा से कुमारी सैलजा या पूर्व सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी के नाम शामिल हैं। कुरुक्षेत्र की सीट कांग्रेस गठबंधन के तौर पर आप को दे चुकी है।
कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों की बात करें तो रोहतक से भूपेंद्र सिंह हुड्डा या दीपेंद्र हुड्डा चुनाव लड़ सकते हैं। सोनीपत और करनाल से कुलदीप शर्मा या अरविंद शर्मा, भिवानी लोकसभा क्षेत्र से श्रुति चौधरी या विधायक राव दान सिंह, हिसार बृजेंद्र सिंह, गुरुग्राम कैप्टन से अजय यादव, फरीदाबाद महेंद्र प्रताप सिंह, अंबाला से वरुण चौधरी या कुमारी सैलजा, सिरसा से कुमारी सैलजा या पूर्व सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी के नाम शामिल हैं। कुरुक्षेत्र की सीट कांग्रेस गठबंधन के तौर पर आप को दे चुकी है।
बीते तीन लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन
| वर्ष | लोकसभा क्षेत्र | विधानसभा क्षेत्र |
| 2009 | 9 | 40 |
| 2014 | 1 | 15 |
| 2019 | 0 | 30 |
यह कहना ठीक नहीं है कि कांग्रेस का संगठन नहीं है। रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ बताती है कि कांग्रेस की सोच वालों की संख्या कितनी है। कांग्रेस पूरी ताकत के साथ लोकसभा चुनाव लड़ेगी और भाजपा की नीतियों से तंग जनता ही कांग्रेस के लिए काम करेगी। 18 मार्च को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक है, उसके बाद उम्मीदवार घोषित किए जाएंगे। -चौधरी उदयभान, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस