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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब के 13 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे वोट बैंक, कुछ ऐसे हैं समीकरण

Fri, 26 Apr 2019 12:28 PM IST
खुशबू गोयल अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 26 Apr 2019 12:28 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Vote Banks Will Decide Future of Punjab Candidates on all 13 seats
पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन - फोटो : Amar Ujala
पंजाब में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी शतरंज की बिसात बिछ गई है। इस खेल में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे धर्म, जाति या अन्य आधार पर बने वोट बैंक। सभी प्रमुख पार्टियों ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, नामांकन भी शुरू हो गया है। इसी के साथ शुरू हो गया है वोटरों को अपनी ओर करने का खेल। सभी पार्टियां और उम्मीदवार वोट बैंक को लुभाने में जुट गए हैं। टिकट वितरण में भी इसका ध्यान रखा गया है। पंजाब में किसे सत्ता पर बैठाना है, शहरी हिंदू वोटरों की इसमें भूमिका अहम रहती है।
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जब ये कांग्रेस के साथ होता है तो वह सत्ता में आती है, जब भाजपा की तरफ गया तो शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी। पिछले लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी इसमें सेंध लगाई थी। हिंदू और दलित वोट बैंक के खिसकने के कारण कांग्रेस दस साल राज्य की सत्ता से दूर रही। इनके लौटने के बाद 2017 में फिर सरकार बनाई। इसलिए लोकसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस ने टिकट वितरण में यह ध्यान रखा कि कम से कम दो टिकटें हिंदुओं को दी जाएं। इसी वजह से सुनील जाखड़ के बाद मनीष तिवारी को कैंडिडेट बनाया गया।
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सभी प्रमुख शहरी सीटों पर हिंदू वोट बैंक निर्णायक भूमिका में है। सबसे ज्यादा हिंदू आबादी जालंधर जिले में 63.56 फीसदी, होशियारपुर में 63.07 फीसदी, गुरदासपुर में 46.74 प्रतिशत, फिरोजपुर में 44.67 फीसदी, रोपड़ में 44.47 प्रतिशत और लुधियाना में 42.94 प्रतिशत है। जोकि चुनाव में अहम भूमिका निभाएगी। मध्य वर्गीय इस वोट बैंक पर कांग्रेस का जादू चलेगा या मोदी मैजिक, यह वक्त बताएगा। पंजाब के सभी ग्रामीण हलकों में सिख वोट ही जीत-हार तय करता है। यह प्रमुख तौर पर शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच बंटा हुआ है।
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2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में आप को भी इसमें बड़ा हिस्सा मिला। 68.94 प्रतिशत सिख आबादी के चलते ही भाजपा ने अमृतसर से हरदीप पुरी को उम्मीदवार बनाया है।

कुछ ऐसे हैं सभी वोट बैंक के समीकरण

रविदास बिरादरी का प्रभाव कई सीटों पर है, पर दोआबा की दोनों सीटों जालंधर और होशियारपुर के अलावा फतेहगढ़ साहिब में यह निर्णायक होती है। इसलिए सभी पार्टियों के लिए रविदास बिरादरी को अपनी तरफ करना बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस ने इन तीनों ही सीटों पर इसी बिरादरी के उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा ने होशियारपुर और शिअद ने फतेहगढ़ साहिब से रविदास बिरादरी को ही टिकट दिया है। ऐेसे में बिरादरी के वोट बंटना तय हैं।

वाल्मीकि, मजहबी सिख
वाल्मीकि, मजहबी सिखों का प्रभाव सबसे ज्यादा ज्यादा जालंधर, लुधियाना, अमृतसर में है। फरीदकोट में मजहबी सिख सबसे बड़ा वोट बैंक है। शिअद ने यहां से इसी समुदाय के गुलजार सिंह रणिके को टिकट दिया है। लेकिन कांग्रेस जातीय संतुलन नहीं बैठा सकी। शिअद-भाजपा ने दो सीटें रविदास बिरादरी और दो वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज को देकर जातीय संतुलन बैठाया। लेकिन कांग्रेस नहीं कर सकी, वाल्मीकि-मजहबी सिख समाज को एक भी टिकट नहीं दी गई। जिससे काफी नाराजगी हुई, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दो चेयरमैन पद देने का आश्वासन देना पड़ा। चुनाव से पहले भी इस समुदाय के डॉ. राजकुमार वेरका को चेयरमैन बना कर भरपाई करने की कोशिश की थी।

राय सिख
राय सिख बिरादरी का प्रभाव फिरोजपुर हलके में सबसे ज्यादा है। यहां के करीब दो सौ गांव राय सिखों के हैं। अगर ये एकमुश्त होकर वोट करें तो निर्णायक भूमिका में हैं। इनके करीब ढाई लाख वोट हैं। इसके अलावा कपूरथला में इनके साठ गांव हैं। जालंधर और लुधियाना में भी करीब पचास गांव राय सिखों के हैं। फिरोजपुर से कांग्रेस इसी बिरादरी के शेर सिंह घुबाया को टिकट दिया है, जो लगातार दो बार से शिअद के टिकट पर जीत चुके हैं। उनके मुकाबले शिअद के प्रधान सुखबीर बादल ने ताल ठोंक कर इस जंग को दिलचस्प बना दिया है। शिअद को लग रहा है कि सारे राय सिख वोट घुबाया को नहीं मिलेंगे।

कंबोज
कंबोज बिरादरी का प्रभाव भी पंजाब के कई हलकों में है। फिरोजपुर में राय सिखों के बाद एक लाख वोटों के साथ यह बिरादरी भी निर्णायक भूमिका अदा करती है। कपूरथला, सुल्तानपुर लोधी, अमृतसर, पटियाला जिलों में भी इसके काफी वोटर हैं। पर इनका दर्द है कि कभी इस बिरादरी से कोई लोकसभा नहीं पहुंच सका।

मुस्लिम
सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी मलेरकोटला में है, इस विधानसभा सीट पर यही निर्णायक हैं। संगरूर जिले में सर्वाधिक आबादी 179116 है। इसके अलावा लुधियाना में इनकी आबादी 77713, जालंधर में 30233, गुरदासपुर में 27667 है। गुरदासपुर के कादियां हलके में यह अहम भूमिका अदा करते हैं। यह आमतौर पर कांग्रेस का ही वोट बैंक रहा है।

इसाई
पंजाब में ईसाइयों की कुल आबादी 348230 है। ईसाई समाज का सबसे ज्यादा प्रभाव गुरदासपुर हलके में है, जहां इनकी आबादी 176587 है। यहां सभी पार्टियां ईसाई भाईचारे को अपनी ओर करने की कोशिश में हैं। आप ने इसी भाईचारे को टिकट दिया है। इसके अलावा अमृतसर में 54344, जालंधर में 26016 और लुधियाना में 16517 ईसाई भी पार्टियों के लिए मायने रखते हैं।

पूर्व फौजी
पंजाब में पूर्व फौजियों का भी एक अहम वोट बैंक है। हालांकि ये एकजुट नहीं हैं, इनके कई संगठन हैं। पर सभी पार्टियां इन्हें लुभानेे की कोशिश करती हैं। वन रैंक वन पेंशन सभी दलों के एजेंडे में था।

जातीय स्थिति
अन्य पिछड़ा वर्ग - 31.3 फीसदी
अनुसूचित जातियां - 31.9
अगड़ी जातियां - 33.0
अन्य - 3.8
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