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लोकसभा चुनाव 2019 में किसके समीकरण बिगाड़ेंगें छोटे-छोटे दल, सभी ने लगा रखा है पूरा जोर
Mon, 22 Apr 2019 12:14 PM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 22 Apr 2019 12:14 PM IST
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भाजपा-अकाली दल गठबंधन
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब में लोकसभा चुनाव 2019 के रण में इस बार कई छोटी पार्टियां हैं। अब वे किसके समीकरण बिगाड़ेंगी, सबकी नजरें इसी पर लगी हुई हैं। सूबे में आमतौर पर लड़ाई हमेशा से परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन के बीच ही रही है। यही दोनों दल बारी-बारी से सरकार भी बनाते रहे हैं।
लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार लोगों ने आम आदमी पार्टी को करीब 25 फीसदी वोट और चार सीटें देकर सिर-माथे पर बिठाया। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी आप मजबूती से लड़ी और शिअद को पीछे धकेल कर प्रमुख विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल किया। इस बार भी आप ने सभी 13 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं।
हालांकि संगरूर को छोड़ कर पार्टी कहीं पर भी तिकोना मुकाबला बनाती नजर नहीं आ रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद जितने भी उपचुनाव हुए, उनमें पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। आप के सात विधायक बगावत कर अलग हो चुके हैं। आप के बागी सुखपाल खैरा ने पंजाबी एकता पार्टी बना ली और चुनाव मैदान में हैं।
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लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार लोगों ने आम आदमी पार्टी को करीब 25 फीसदी वोट और चार सीटें देकर सिर-माथे पर बिठाया। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी आप मजबूती से लड़ी और शिअद को पीछे धकेल कर प्रमुख विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल किया। इस बार भी आप ने सभी 13 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं।
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हालांकि संगरूर को छोड़ कर पार्टी कहीं पर भी तिकोना मुकाबला बनाती नजर नहीं आ रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद जितने भी उपचुनाव हुए, उनमें पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। आप के सात विधायक बगावत कर अलग हो चुके हैं। आप के बागी सुखपाल खैरा ने पंजाबी एकता पार्टी बना ली और चुनाव मैदान में हैं।
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आप में टूट के बाद बना प्रदेश में पहला गठबंधन
सुखपाल खैरा की अगुवाई में पहली बार सूबे में एक गठबंधन बनाया गया। इसमें पीईपी के अलावा बसपा, वाम दल, डॉ. धरमवीर गांधी का पंजाबी मंच और लोक इंसाफ पार्टी शामिल हुए। आपसी सहमति से सभी दलों ने अपने लिए सीटें चुनी हैं। बसपा और वाम दलों का हर हलके में अपना पक्का कैडर वोट है।
पिछले दोनों चुनाव में वह वोट आप को पड़ गया था, इस बार निश्चित तौर पर गठबंधन के उम्मीदवारों को ही जाएगा। शिरोमणि अकाली दल छोड़ कर टकसाली नेताओं ने शिअद-टकसाली बनाई, वे भी चुनाव मैदान में हैं। वहीं, पुराने दिग्गज सिमरनजीत सिंह मान की पार्टी शिअद-मान भी चुनाव लड़ रही है।
इतनी पार्टियों की मौजूदगी से किसे नफा-नुकसान होगा, सियासी माहिर इसके आंकलन में लगे हैं। सीधे तौर पर पीईपी से आप और शिअद-टकसाली से शिअद को नुकसान होता दिख रहा है। वहीं, शिअद-मान से कांग्रेस को नुकसान पहुंचेगा। अकाली समर्थकों का कहना है कि पिछले दो चुनाव में जो वोट आप को गया था, वे वापस शिअद को मिलेगा। जबकि, कांग्रेसियों की दलील है कि वे वोट उनको मिलेंगे।
पिछले दोनों चुनाव में वह वोट आप को पड़ गया था, इस बार निश्चित तौर पर गठबंधन के उम्मीदवारों को ही जाएगा। शिरोमणि अकाली दल छोड़ कर टकसाली नेताओं ने शिअद-टकसाली बनाई, वे भी चुनाव मैदान में हैं। वहीं, पुराने दिग्गज सिमरनजीत सिंह मान की पार्टी शिअद-मान भी चुनाव लड़ रही है।
इतनी पार्टियों की मौजूदगी से किसे नफा-नुकसान होगा, सियासी माहिर इसके आंकलन में लगे हैं। सीधे तौर पर पीईपी से आप और शिअद-टकसाली से शिअद को नुकसान होता दिख रहा है। वहीं, शिअद-मान से कांग्रेस को नुकसान पहुंचेगा। अकाली समर्थकों का कहना है कि पिछले दो चुनाव में जो वोट आप को गया था, वे वापस शिअद को मिलेगा। जबकि, कांग्रेसियों की दलील है कि वे वोट उनको मिलेंगे।
2012 में पीपीपी ने बिगाड़ा था कांग्रेस का खेल
मौजूदा वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने 2012 केविधानसभा चुनाव से पहले पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाई थी। जिसमें वाम दलों के साथ मिल कर पूरे पंजाब में मजबूती से चुनाव लड़ा था। पीपीपी के कांग्रेस से गठबंधन की बातें भी चलीं, पर कांग्रेस के अति आत्मविश्वास के कारण सिरे नहीं चढ़ीं। नतीजे आए तो पीपीपी को एक भी सीट नहीं मिली, मनप्रीत खुद दोनों जगह से हार गए। लेकिन पीपीपी करीब पांच प्रतिशत वोट ले गई। जिसने कांग्रेस से सत्त्ता छीन कर शिअद की झोली में डाल दी।
2014
पार्टी - वोट (प्रतिशत में)
कांग्रेस - 33
शिअद - 26.4
भाजपा -8.6
आप - 24.5
2009
पार्टी ---- वोट (प्रतिशत में)
सीपीआई - 0.33 प्रतिशत
सीपीएम - 0.14
बसपा -5.75
लोक जन शक्ति पार्टी -0.21
सपा -0.15
2004
पार्टी - वोट (प्रतिशत में)
सीपीआई -2.55
सीपीएम - 1.81
बसपा - 7.67
शिअद-मान - 3.79
सपा - 0.03
2014
पार्टी - वोट (प्रतिशत में)
कांग्रेस - 33
शिअद - 26.4
भाजपा -8.6
आप - 24.5
2009
पार्टी ---- वोट (प्रतिशत में)
सीपीआई - 0.33 प्रतिशत
सीपीएम - 0.14
बसपा -5.75
लोक जन शक्ति पार्टी -0.21
सपा -0.15
2004
पार्टी - वोट (प्रतिशत में)
सीपीआई -2.55
सीपीएम - 1.81
बसपा - 7.67
शिअद-मान - 3.79
सपा - 0.03