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लोकसभा चुनाव: चंडीगढ़ में भाजपा का इतिहास, जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा, उसे टिकट ही नहीं मिला

Tue, 26 Mar 2019 01:53 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 26 Mar 2019 01:53 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Political History of BJP in Chandigarh
Chandigarh BJP
चंडीगढ़ में भारतीय जनता पार्टी का इतिहास रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले जिस नाम की चर्चा टिकट के लिए सबसे ज्यादा रही है, उसे टिकट ही नहीं मिला है। पार्टी द्वारा या तो उम्मीदवार बाहर से लाए गए या फिर टिकट उस व्यक्ति को दे दिया गया, जिसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था। चंडीगढ़ के बसने के बाद से यहां अब तक 13 बार लोकसभा के  चुनाव हो चुके हैं, जिनमें भाजपा महज तीन बार ही जीत पाई है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानें तो ऐसा उम्मीदवार के चयन की वजह से हुआ है।
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1989 में चर्चा किसी और की, टिकट मिला हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को
साल 1989 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सागर जैन और महामंत्री राज कुमार महाजन के नाम की जोरदार चर्चा थी लेकिन चुनाव से कुछ दिन पहले भाजपा ने चंडीगढ़ से हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज धर्मवीर सहगल को टिकट देकर सभी को चौंका दिया। पार्टी के इस फैसले को कोई समझ नहीं पाया। शायद यही वजह रही कि धर्मवीर सहगल को कुल 28 हजार वोट मिले। इस चुनाव में जनता दल से खड़े हुए हरमोहन धवन जीतकर शहर के सांसद बने थे।
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जयराम जोशी को टिकट नहीं मिला तो कार्यकर्ता ने कर लिया आत्मदाह

साल 1996 का लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए काफी हंगामेदार रहा। उस समय भाजपा के संगठन मंत्री नरेंद्र मोदी (वर्तमान देश के प्रधानमंत्री) थे, टिकट देने के लिए उन्होंने पार्टी के सभी पदाधिकारियों को अग्रसेन भवन में बुलाया। उन्होंने दावेदारों के नाम लिए और कार्यकर्ताओं से उनके पक्ष में हाथ खड़ा करने को कहा। जयराम जोशी का नाम लेने के बाद लगभग सभी कार्यकर्ताओं ने हाथ खड़े कर दिए।

बावजूद इसके कुछ दिन बाद सत्यपाल जैन को टिकट दे दिया गया। इसके बाद कई कार्यकर्ताओं ने आत्महत्या करने की धमकी दी और जिस दिन सत्यपाल जैन नामांकन भरने वाले थे, उसी दिन सेक्टर-25 के पशुराम ने पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगा लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। बावजूद इसके सत्यपाल जैन ने नामांकन भरा और चुनाव जीतकर शहर के सांसद बने।

साल 1999 में जैन का टिकट काटकर दिल्ली से बुलाया उम्मीदवार
साल 1999 में तत्कालीन सांसद सत्यपाल जैन का टिकट काटकर कृष्ण लाल शर्मा को भाजपा ने उम्मीदवार बना दिया। कृष्ण लाल शर्मा दिल्ली के थे और वहां से सांसद भी रह चुके थे। चुनाव से पहले शहर में भाजपा दो गुट बंट गई थी। सत्यपाल जैन गुट और ज्ञानचंद गुप्ता गुट।

ज्ञानचंद गुप्ता टिकट पाने के लिए काफी जोर लगा रहे थे, वहीं सत्यपाल जैन मानकर चल रहे के कि तत्कालीन सांसद होने के चलते टिकट उन्हें ही मिलेगा। उस वक्त भाजपा शहर में काफी मजबूत थी लेकिन बढ़ती गुटबाजी को उस वक्त संगठन मंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने भांप लिया और दिल्ली से कृष्ण लाल शर्मा को लाकर टिकट दे दिया। इसके बाद हरमोहन धवन कांग्रेस में शामिल हो गए और नजीता यह निकला कि भाजपा महज 4500 वोटों से हार गई।

2004 में सत्यपाल जैन को टिकट मिला लेकिन वह हार गए

साल 2004 एक ऐसा साल रहा जब भाजपा में टिकट मांगने वालों की संख्या कम थी। हालांकि फिर भी पार्टी के कुछ नेताओं ने टिकट के लिए काफी हाथ-पैर मारे लेकिन उस समय पार्टी के पास सत्यपाल जैन एक मजबूत नेता के रूप में मौजूद थे। कांग्रेस से पवन बंसल, भाजपा से सत्यपाल जैन और हमनोहन धवन इनेलो से चुनाव लड़ रहे थे। इस चुनाव में सत्यपाल जैन 45248 वोटों से हार गए।

2009 में खूब चला ज्ञानचंद गुप्ता व हीरालाल महाजन का नाम, टिकट जैन को
साल 2009 के चुनाव में एक बार फिर भाजपा के सत्यपाल जैन, कांग्रेस के कद्दावर नेता पवन बंसल से 59 हजार वोटों से हार गए। वहीं, बहुजन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हरमोहन धवन तीसरे नंबर पर रहे, जिन्हें 61434 वोट मिले। इस चुनाव में भी भाजपा से टिकट पाने के लिए सत्यपाल जैन को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी।

उस समय टिकट के लिए ज्ञानचंद गुप्ता व हीरालाल महाजन के नामों की खूब चर्चा थी लेकिन अंत में दिल्ली से फैसला आया और टिकट सत्यपाल जैन की झोली में गया। सूत्रों की मानें तो जैन को टिकट दिलाने में वर्तमान केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का काफी अहम रोल रहा था।
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2014 में टंडन और धवन की थी चर्चा, टिकट मिला किरण खेर को

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सभी स्थानीय नेताओं को झटका लगा था। टिकट के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के नाम की जोरदार चर्चा थी। पार्टी ने इन्हीं तीन नामों को केंद्रीय समिति को भी भेजा। इस बीच उम्मीदवार चुनने के लिए तत्कालीन संगठन मंत्री अजय जम्वाल ने पंजाब भाजपा दफ्तर में एक बैठक बुलाई। इसमें सभी कार्यकर्ताओं से पूछा कि वह किसे उम्मीदवार के रूप में देखना चाहते हैं।

उस वक्त सभी 3 नामों पर चर्चा कर रहे थे, तब अजय जम्वाल ने पहली बार कहा कि किरण खेर भी चौथा ऑप्शन हैं। सभी कार्यकर्ता हैरान थे, उस वक्त काफी गहमागहमी का माहौल बन गया था। आखिर में जिनकी चर्चा सालों से थी उनकी बजाय किरण खेर को टिकट मिला। गौरतलब है कि किरण खेर ने साल 2011 के दिसंबर में हुए नगर निगम चुनावों में भाजपा के लिए प्रत्येक वार्ड में जाकर चुनाव प्रचार किया था।

इस बार भी तीन नामों को केंद्रीय समिति में भेजा गया
भाजपा ने इस बार भी लोकसभा चुनाव के लिए शहर से तीन नाम सर्वसम्मति से फाइनल कर केंद्रीय समिति को भेज दिए हैं। इनमें मौजूदा सांसद किरण खेर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन और पूर्व सांसद सतपाल जैन का नाम है। इन नामों में से अब किसको शहर से भाजपा का टिकट मिलेगा, इसका फैसला केंद्रीय चुनाव समिति को करना है।
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