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लोकसभा चुनाव 2019: टकसालियों और 'आप' में नहीं बनी बात, तो अब 'दंगल' में अकेले ही उतरेगी पार्टी
Mon, 18 Mar 2019 02:40 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 18 Mar 2019 02:40 PM IST
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अकाली दल टकसाली
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शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) और आम आदमी पार्टी के बीच आखिर बात बन ही नहीं सकी। औपचारिक तौर पर टकसाली दल के सीनियर नेता सेवा सिंह सेखवां ने इसका एलान कर दिया। सेखवां ने कहा कि अब पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। बीर दविंदर सिंह आनंदपुर साहिब और जनरल जेजे सिंह खडूर साहिब से पार्टी उम्मीदवार होंगे। बाकी उम्मीदवारों पर बाद में विचार किया जाएगा।
आप पहले ही कह चुकी थी कि वह आनंदपुर साहिब से अपने प्रत्याशी नरिंदर शेरगिल को नहीं हटाएगी। लेकिन सूत्र बताते हैं कि आनंदपुर साहिब सीट ही गठबंधन न होने का कारण नहीं थी, कुछ और बातों पर भी सुई अड़ गई थी। टकसालियों ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर आप का देश भर में कहीं भी कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ तो पंजाब में यह गठबंधन टूट जाएगा। दिल्ली में आप और कांग्रेस का गठबंधन होने की चर्चाएं चल रही हैं।
आप के लिए दिल्ली ज्यादा अहम है। आप की पूरी चुनावी मुहिम पीएम नरेंद्र मोदी के विरोध पर टिकी है। आप की शर्त थी कि गठबंधन होने की स्थिति में टकसाली भी उतने ही पुरजोर ढंग से मोदी के खिलाफ बोलें। लेकिन टकसाली दल के प्रधान रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने इससे साफ इंकार कर दिया था। ब्रह्मपुरा का कहना था कि उनकी पार्टी का भाजपा या मोदी से कोई विरोध नहीं है। जिसके बाद दोनों पार्टियों ने गठबंधन की बात खत्म करने का फैसला किया।
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आप पहले ही कह चुकी थी कि वह आनंदपुर साहिब से अपने प्रत्याशी नरिंदर शेरगिल को नहीं हटाएगी। लेकिन सूत्र बताते हैं कि आनंदपुर साहिब सीट ही गठबंधन न होने का कारण नहीं थी, कुछ और बातों पर भी सुई अड़ गई थी। टकसालियों ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर आप का देश भर में कहीं भी कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ तो पंजाब में यह गठबंधन टूट जाएगा। दिल्ली में आप और कांग्रेस का गठबंधन होने की चर्चाएं चल रही हैं।
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आप के लिए दिल्ली ज्यादा अहम है। आप की पूरी चुनावी मुहिम पीएम नरेंद्र मोदी के विरोध पर टिकी है। आप की शर्त थी कि गठबंधन होने की स्थिति में टकसाली भी उतने ही पुरजोर ढंग से मोदी के खिलाफ बोलें। लेकिन टकसाली दल के प्रधान रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने इससे साफ इंकार कर दिया था। ब्रह्मपुरा का कहना था कि उनकी पार्टी का भाजपा या मोदी से कोई विरोध नहीं है। जिसके बाद दोनों पार्टियों ने गठबंधन की बात खत्म करने का फैसला किया।
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