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लोकसभा चुनाव 2019: हॉट सीट गुरदासपुर में कांग्रेस की साख लगी दांव पर, सनी देओल कड़ी चुनौती
Fri, 17 May 2019 02:11 PM IST
खुशबू गोयल
मनन सैनी, अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
मनन सैनी, अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 17 May 2019 02:11 PM IST
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सनी देओल
- फोटो : Amar Ujala
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सूबे में सबसे हॉट मानी जा रही गुरदासपुर सीट पर पूरे देश की निगाहें टिकी है। स्टार सनी देओल के चुनाव लड़ने के कारण उनकी हर छोटी सी छोटी बात सुर्खियां बन रही है। एक तरफ जहां प्रधान सुनील जाखड़ के चुनाव लड़ने से कांग्रेस की साख दांव पर लगी है वहीं सनी के लिए कांग्रेस के चार विधायकों और तीन मंत्रियों के गढ़ में झंडा बुलंद करना सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।
कांग्रेस सही समय पर उम्मीदवार घोषित करने का पूरा लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकते हुए कैंपेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से भी गुरदासपुर में रैली की गई है। केवल राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा की गैर मौजूदगी ही विरोधियों के लिए मुद्दा बनी रही।
पठानकोट क्षेत्र में भाजपा का मजबूत जनाधार और अमित शाह की रैली को देखते हुए कांग्रेस ने प्रचार के अंतिम दिनों में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को बुलाकर उस जनाधार को भेदने की कोशिश की। गुरदासपुर में कुल नौ विधानसभा हलके हैं। जिसमें पठानकोट, भोआ (आरक्षित), सुजानपुर, गुरदासपुर, दीनानगर (आरक्षित), कादियां, बटाला, फतेहगढ़ चूड़िया और डेरा बाबा नानक शामिल हैं।
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कुल मतदाता : 15 लाख 95 हजार 284
पुरुष : 8 लाख 27 हजार 663
महिला : 7 लाख 45 हजार 079
थर्ड जेंडर : 44
पोलिंग स्टेशन : 1826
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कांग्रेस सही समय पर उम्मीदवार घोषित करने का पूरा लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकते हुए कैंपेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से भी गुरदासपुर में रैली की गई है। केवल राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा की गैर मौजूदगी ही विरोधियों के लिए मुद्दा बनी रही।
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पठानकोट क्षेत्र में भाजपा का मजबूत जनाधार और अमित शाह की रैली को देखते हुए कांग्रेस ने प्रचार के अंतिम दिनों में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को बुलाकर उस जनाधार को भेदने की कोशिश की। गुरदासपुर में कुल नौ विधानसभा हलके हैं। जिसमें पठानकोट, भोआ (आरक्षित), सुजानपुर, गुरदासपुर, दीनानगर (आरक्षित), कादियां, बटाला, फतेहगढ़ चूड़िया और डेरा बाबा नानक शामिल हैं।
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कुल मतदाता : 15 लाख 95 हजार 284
पुरुष : 8 लाख 27 हजार 663
महिला : 7 लाख 45 हजार 079
थर्ड जेंडर : 44
पोलिंग स्टेशन : 1826
भाजपा की ओर से उम्मीदवार की घोषणा में देरी जरूर हुई लेकिन पिछले उपचुनाव में हुई बड़ी हार से सबक लेते हुए सनी देओल को चुनावी दंगल में उतारा गया। सनी को अपने प्रचार के लिए समय कम मिला, जिसके चलते उन्होंने रैली मीटिंग करने के बजाय लोगों तक पहुंच बनाने के लिए रोड शो का ही सहारा लेना बेहतर समझा। सनी देओल के प्रचार के लिए उनके भाई बाबी देओल और उनके पिता धर्मेंद्र गुरदासपुर में डेरा डाले हैं।
सनी के प्रचार से गठबंधन पार्टी अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी नदारद हैं। सनी अपने प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से पूरी तरह दूर दिखे और किसी के खिलाफ नकारात्मक बयानबाजी नहीं की। सनी हलके में भीड़ एकत्र करने में तो कामयाब हुए हैं। आम आदमी पार्टी से पीटर मसीह उम्मीदवार हैं, लेकिन इन चुनाव में उनकी भूमिका केवल नाममात्र की है।
पीटर मसीह जो वोट भी लेंगे वह उनके समुदाय से ही संबंधित होगी। आम आदमी पार्टी का गुरदासपुर हलके में ज्यादा आधार नहीं है और न ही उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में कोई बड़ी रैली की है और न ही किसी बड़े नेता को बुलाया है। पीडीए की ओर से लालचंद कटारुचक्क मैदान में है। उन्हें अकाली दल (टकसाली), पंजाबी एकता पार्टी (सुखपाल खैरा), बसपा आदि का समर्थन प्राप्त है और वह डोर टू डोर प्रचार व छोटी मीटिंगें कर लोगों का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
सनी के प्रचार से गठबंधन पार्टी अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी नदारद हैं। सनी अपने प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से पूरी तरह दूर दिखे और किसी के खिलाफ नकारात्मक बयानबाजी नहीं की। सनी हलके में भीड़ एकत्र करने में तो कामयाब हुए हैं। आम आदमी पार्टी से पीटर मसीह उम्मीदवार हैं, लेकिन इन चुनाव में उनकी भूमिका केवल नाममात्र की है।
पीटर मसीह जो वोट भी लेंगे वह उनके समुदाय से ही संबंधित होगी। आम आदमी पार्टी का गुरदासपुर हलके में ज्यादा आधार नहीं है और न ही उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में कोई बड़ी रैली की है और न ही किसी बड़े नेता को बुलाया है। पीडीए की ओर से लालचंद कटारुचक्क मैदान में है। उन्हें अकाली दल (टकसाली), पंजाबी एकता पार्टी (सुखपाल खैरा), बसपा आदि का समर्थन प्राप्त है और वह डोर टू डोर प्रचार व छोटी मीटिंगें कर लोगों का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुनील जाखड़ (कांग्रेस)
मजबूती : गुरदासपुर में नवोदय स्कूल, सैनिक स्कूल, पठानकोट और गुरदासपुर में मेडिकल कालेज, शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट, पठानकोट में पेप्सीको प्लांट, तजुर्बा और अन्य विकास कार्य कांग्रेस को मजबूती प्रदान करते है।
कमजोरी : कांग्रेस को पंचायती चुनाव के दौरान उन पर लगे आरोप, कैप्टन सरकार की ओर से किए गए स्मार्ट फोन, घर घर रोजगार, नशे का खात्मा, किसानों की फसल की अदायगी आदि मुद्दे भारी पड़ सकते हैं।
सनी देओल (भाजपा)
मजबूती : विनोद खन्ना की अच्छी इमेज, करतारपुर कॉरिडोर, सर्जिकल स्ट्राइक, राष्ट्रवाद, सिखों के कत्लेआम को सजाएं दिलवाना इत्यादि फायदा पहुंचा सकते हैं।
कमजोरी : राजनीतिक समझ न होना, गुटबाजी, नोटबंदी, जीएसटी, कालाधन, दस करोड़ नौकरियों का वायदा, स्मार्ट सिटी, राम मंदिर, बेअदबी और धारा 370 आदि मुख्य मुद्दे भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पीटर मसीह (आम आदमी पार्टी)
मजबूती : मसीह समुदाय के लोगों का समर्थन, अच्छे वक्ता
कमजोरी : लोकसभा हलके में आधार न होना, पार्टी की अंदरूनी फूट
लालचंद कटारुचक्क (पीडीए)
मजबूती : सेवा सिंह सेखवां का हलकों में आधार, कामरेड वोट और निचले तबके तक पहुंच
कमजोरी : पूरे हलके में कोई विशेष जनाधार न होना और केवल कुछ हलकों तक सीमित
मजबूती : गुरदासपुर में नवोदय स्कूल, सैनिक स्कूल, पठानकोट और गुरदासपुर में मेडिकल कालेज, शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट, पठानकोट में पेप्सीको प्लांट, तजुर्बा और अन्य विकास कार्य कांग्रेस को मजबूती प्रदान करते है।
कमजोरी : कांग्रेस को पंचायती चुनाव के दौरान उन पर लगे आरोप, कैप्टन सरकार की ओर से किए गए स्मार्ट फोन, घर घर रोजगार, नशे का खात्मा, किसानों की फसल की अदायगी आदि मुद्दे भारी पड़ सकते हैं।
सनी देओल (भाजपा)
मजबूती : विनोद खन्ना की अच्छी इमेज, करतारपुर कॉरिडोर, सर्जिकल स्ट्राइक, राष्ट्रवाद, सिखों के कत्लेआम को सजाएं दिलवाना इत्यादि फायदा पहुंचा सकते हैं।
कमजोरी : राजनीतिक समझ न होना, गुटबाजी, नोटबंदी, जीएसटी, कालाधन, दस करोड़ नौकरियों का वायदा, स्मार्ट सिटी, राम मंदिर, बेअदबी और धारा 370 आदि मुख्य मुद्दे भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पीटर मसीह (आम आदमी पार्टी)
मजबूती : मसीह समुदाय के लोगों का समर्थन, अच्छे वक्ता
कमजोरी : लोकसभा हलके में आधार न होना, पार्टी की अंदरूनी फूट
लालचंद कटारुचक्क (पीडीए)
मजबूती : सेवा सिंह सेखवां का हलकों में आधार, कामरेड वोट और निचले तबके तक पहुंच
कमजोरी : पूरे हलके में कोई विशेष जनाधार न होना और केवल कुछ हलकों तक सीमित