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Hindi News ›   Chandigarh ›   Lok Sabha Elections 2019: Devi Lal family fight Uncle and nephew face to face

ताऊ के बिखरते कुनबे में विरासत की जंग, ऐनक और झंडे की जंग खत्म, चाचा और भतीजे आमने-सामने

Sun, 07 Apr 2019 07:28 AM IST
देव कश्यप मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: देव कश्यप Updated Sun, 07 Apr 2019 07:28 AM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Devi Lal family fight Uncle and nephew face to face
- फोटो : फाइल फोटो

सियासत में देश के शक्तिशाली परिवारों में से एक ताऊ देवीलाल का कुनबा बिखर गया है। हरियाणा की राजनीति में यह पहला लोकसभा चुनाव होगा, जब परिवार बिखरे कुनबे के साथ शक्ति प्रदर्शन करेगा। यह चुनाव चाचा-भतीजे के बीच होने वाली जंग का गवाह बनेगा। लोकसभा का प्रदर्शन ही पांच माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तस्वीर तय करेगा। प्रधानमंत्री पद ठुकराने वाले देवीलाल के परिवार में यह पहला विघटन नहीं है।

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रार पहले भी पड़ी थी, जिसके बाद ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा की राजनीति के किंगमेकर बन कर उभरे थे। अब देवीलाल के दोनों पोतों और पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला के दोनों बेटों अजय और अभय चौटाला की राजनीतिक राहें जुदा हो चुकी हैं। ओमप्रकाश चौटाला और छोटे बेटे अभय इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का झंडा बुलंद कर रहे हैं, तो इनेलो से अलग होकर बनी जननायक जनता पार्टी (जजपा) की जिम्मेदारी बड़े बेटे अजय चौटाला के कंधों पर है। अजय अभी जेल में हैं इसलिए जजपा की बागडोर उनके सांसद बेटे दुष्यंत, छोटे बेटे दिग्विजय और पत्नी विधायक नैना चौटाला के हाथ में है। दोनों ही पार्टियां उप प्रधानमंत्री देवीलाल की विरासत को आगे बढ़ाने के दावे के साथ मैदान में हैं। 
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इनेलो और जजपा दोनों को जिताऊ और दमदार चेहरों की तलाश है। पिछली लोकसभा में इनेलो के दो सांसद थे। इस बार उसके दो विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। चार बागी हो चुकी हैं। उसके हाथ से हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी भी खिसक चुकी है। करीब पांच माह पहले ही गठित हुई जजपा जनवरी 2019 में जींद विधानसभा सीट पर उपचुनाव हार चुकी है। इसके बावजूद जजपा को स्थापित करने के लिए अजय चौटाला के दोनों बेटे और पत्नी मैदान में डटे हैं। दोनों ही दलों ने अभी तक लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। इनेलो अकेले लड़ने को तैयार है, तो जजजा की आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की अटकलें चल रही हैं। इनेलो नेता अभय चौटाला का दावा है कि उनसे जुड़े लोग देवीलाल की विचारधारा से जुड़े हैं। वहीं, जजपा नेता सांसद दुष्यंत चौटाला कहते हैं कि उनकी पार्टी को हरियाणा के लोगों का प्यार मिल रहा है।

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देवीलाल बोले- मुझे पीएम नहीं, ताऊ बने रहना पसंद

चौधरी देवीलाल को 1989 के आम चुनाव के बाद बहुमत से संसदीय दल का नेता मान लिया गया था। मगर, उन्होंने यह कहकर विश्वनाथ प्रताप सिंह को प्रधानमंत्री बनवा दिया कि मैं सबसे बुजुर्ग हूं। मुझे सब ताऊ कहते हैं। मुझे ताऊ बने रहना ही पंसद है। मैं यह पद वीपी सिंह को सौंपता हूं। हालांकि वह उपप्रधानमंत्री (1989-1991) बनने को तैयार हो गए। दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री (1977 व 1987) भी रहे। यूपी-बिहार की राजनीति में भले वह सक्रिय नहीं थे, लेकिन दोनों प्रदेशों का सियासी समीकरण बनाने और बिगाड़ने में उनका बड़ा दखल रहा है। देवीलाल ने जनता पार्टी और फिर जनता दल की अगुवाई की। बाद में समाजवादी जनता पार्टी टूटी, तो हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय का गठन हुआ और फिर यही इंडियन नेशनल लोकदल बन गया। आज इनेलो के टूटने के बाद जजपा का भी उदय हो चुका है।

केंद्र में गए देवीलाल तो परिवार में छिड़ी कुर्सी की लड़ाई
करीब 29 साल पहले देवीलाल की सियासी विरासत में फूट का बीज तब पड़ा जब वह केंद्र की सियासत में गए। दिसंबर 1989 में उनके बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने अपने छोटे भाई और तत्कालीन कृषि मंत्री रणजीत सिंह चौटाला को हाशिये पर करके खुद को देवीलाल की विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर सीएम की कुर्सी पर काबिज हुए थे। इस उठापटक से देवीलाल भी खुश नहीं थे, क्योंकि विधायक न होते हुए भी ओमप्रकाश मुख्यमंत्री बन बैठे थे। इससे नाराज रणजीत सिंह ने लोकदल से किनारा कर लिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। 

29 साल बाद... खानदान में फिर वही कहानी

चौटाला परिवार में 29 साल बाद इतिहास ने खुद को फिर दोहाराया है। तब यह जंग देवीलाल के दो बेटों ओमप्रकाश व रणजीत के बीच थी। अब पूर्व सीएम ओमप्रकाश के दो बेटों अजय और अभय चौटाला के बीच है। फूट का लावा कुछ समय से धधक ही रहा था, लेकिन 7 अक्तूबर 2018 को दिवंगत ताऊ देवीलाल के जन्मदिवस पर गोहाना में आयोजित सम्मान दिवस रैली में फूट खुलकर सामने आ गई। अजय के सांसद बेटे दुष्यंत चौटाला के समर्थकों ने इस रैली में मंच पर आसीन पेरोल पर आए ओमप्रकाश के समक्ष ही न केवल दुष्यंत के समर्थन में 'भावी सीएम' के नारे लगाने शुरू किए, बल्कि जब ओमप्रकाश के छोटे बेटे अभय भाषण देने आए तो उनके खिलाफ जमकर हूटिंग की। इस पर ओमप्रकाश ने मंच से ही नाराजगी जाहिर की और मामले को इनेलो की अनुशासन समिति को कार्रवाई के लिए सौंप दिया। जांच के बाद अजय के बेटे दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बाद में ओमप्रकाश के बड़े बेटे अजय को भी निष्कासित कर दिया गया। इनेलो से अलग होकर अजय चौटाला ने जननायक जनता पार्टी का गठन किया। 

ओमप्रकाश के जेल जाने के बाद लड़खड़ाई थी इनेलो
जनवरी 2013 में इनेलो सुप्रीमो एवं पूर्व सीएम ओमप्रकाश और उनके बड़े बेटे अजय को जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) टीचर भर्ती घोटाले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई थी। दोनों पिता-पुत्र अभी भी जेल में हैं। हालांकि राजनीति में फिर भी सक्रिय हैं। दरअसल ओमप्रकाश के जेल जाने के बाद से ही इनेलो लड़खड़ा गई थी। ओमप्रकाश और अजय के जेल जाने के बाद छोटे बेटे अभय ने इनेलो की बागडोर संभाली। अक्तूबर 2014 का विधानसभा चुनाव भी अभय के नेतृत्व में ही लड़ा गया और इनेलो ने 19 सीटें जीतकर नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी हासिल की। इसी दौरान अजय का बड़ा बेटा दुष्यंत हिसार से सांसद चुना गया, तो छोटा बेटा दिग्विजय इनेलो की छात्र इकाई इनसो का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना। अजय की पत्नी नैना चौटाला भी विधायक चुनी गईं। उधर, अभय के दोनों बेटों करण और अर्जुन चौटाला ने भी कुनबे की सियासत में सक्रियता दिखानी शुरू की। मगर अक्तूबर 2018 आते-आते ओमप्रकाश के दोनों बेटों अजय और अभय में सियासी विरासत के लिए फूट की खाई गहरी होती चली गई।

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