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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में 'हाथी' नहीं रहा किसी का पक्का साथी, मायावती ने नफा-नुकसान देखा
Wed, 13 Mar 2019 04:35 PM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 13 Mar 2019 04:35 PM IST
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Mayawati (File Photo)
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हरियाणा की राजनीति में लंबे समय से दखल करती आ रही बहुजन समाज पार्टी किसी की स्थायी साथी नहीं रही। बसपा सुप्रीमो मायावती सिर्फ राजनीतिक नफा-नुकसान देखती हैं। इस आधार पर वे प्रदेश में सियासी दलों के साथ गठबंधन तोड़ती और बनाती रही हैं। इस बार भी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा ने हरियाणा में ऐसा ही किया है। प्रदेश में 1998 में इनेलो-बसपा ने लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था। इनेलो ने चार और बसपा ने एक सीट जीती थी। अंबाला आरक्षित सीट से बसपा के अब तक के इकलौते सांसद अमन कुमार नागरा जीते थे।
इनेलो ने उस समय हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय के नाम से चुनाव लड़ा था और कुरुक्षेत्र में कैलाशो देवी, सोनीपत में कृष्ण सिंह, हिसार में सुरेंद्र सिंह बरवाला व सिरसा में डॉ. सुशील कुमार इंदौरा जीते थे। उस समय कांग्रेस को 26.02, भाजपा को 18.89 और हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय को 25.90 वोट मिले थे। बसपा ने 7.68 प्रतिशत मत हासिल किए थे। बावजूद इसके चुनाव के बाद बसपा और इनेलो का गठबंधन टूट गया। हरियाणा में 2009 में हजकां के साथ भी बसपा ने विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन किया, लेकिन ये चुनाव की दहलीज पार नहीं कर पाया। बसपा और हजकां चंद महीनों में ही अलग-अलग हो गए थे। 2018 में हरियाणा में बसपा और इनेलो के बीच एक बार फिर चुनावी गठबंधन हुआ। इसके बाद इनेलो दोफाड़ हुई और पारिवारिक रिश्तों में भी खटास आई।
जींद उपचुनाव में इनेलो-बसपा उम्मीदवार चार हजार मतों का आंकड़ा तक नहीं छू पाए। इसके बाद बसपा ने सवा नौ महीने के अंदर ही इनेलो से गठबंधन तोड़ लिया। अब हरियाणा में बसपा और लोसुपा का गठबंधन है। बसपा दलितों की राजनीति करते हुए सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले में विश्वास रखती है तो लोसुपा का गठन चंद महीने पहले ही हुआ है। लोसुपा के कर्णधार भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी हैं और पिछड़ा वर्ग की राजनीति प्रदेश में करते आ रहे हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में बसपा-लोसुपा दलितों और पिछड़ों को साथ लाकर बड़े दलों के राजनीतिक समीकरणों को गड़बड़ा सकती हैं।
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इनेलो ने उस समय हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय के नाम से चुनाव लड़ा था और कुरुक्षेत्र में कैलाशो देवी, सोनीपत में कृष्ण सिंह, हिसार में सुरेंद्र सिंह बरवाला व सिरसा में डॉ. सुशील कुमार इंदौरा जीते थे। उस समय कांग्रेस को 26.02, भाजपा को 18.89 और हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय को 25.90 वोट मिले थे। बसपा ने 7.68 प्रतिशत मत हासिल किए थे। बावजूद इसके चुनाव के बाद बसपा और इनेलो का गठबंधन टूट गया। हरियाणा में 2009 में हजकां के साथ भी बसपा ने विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन किया, लेकिन ये चुनाव की दहलीज पार नहीं कर पाया। बसपा और हजकां चंद महीनों में ही अलग-अलग हो गए थे। 2018 में हरियाणा में बसपा और इनेलो के बीच एक बार फिर चुनावी गठबंधन हुआ। इसके बाद इनेलो दोफाड़ हुई और पारिवारिक रिश्तों में भी खटास आई।
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जींद उपचुनाव में इनेलो-बसपा उम्मीदवार चार हजार मतों का आंकड़ा तक नहीं छू पाए। इसके बाद बसपा ने सवा नौ महीने के अंदर ही इनेलो से गठबंधन तोड़ लिया। अब हरियाणा में बसपा और लोसुपा का गठबंधन है। बसपा दलितों की राजनीति करते हुए सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले में विश्वास रखती है तो लोसुपा का गठन चंद महीने पहले ही हुआ है। लोसुपा के कर्णधार भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी हैं और पिछड़ा वर्ग की राजनीति प्रदेश में करते आ रहे हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में बसपा-लोसुपा दलितों और पिछड़ों को साथ लाकर बड़े दलों के राजनीतिक समीकरणों को गड़बड़ा सकती हैं।
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जीटी रोड बेल्ट, दक्षिण हरियाणा में बसपा का अच्छा-खासा वोट बैंक
बसपा का वोट बैंक जीटी रोड बेल्ट के अलावा जींद और यूपी से सटे फरीदाबाद, नूंह, पलवल में अच्छा खासा है। नारायणगढ़, जगाधरी, असंध, जुलाना, घरौंडा, सफीदों, पृथला, बड़खल, तिगांव, हथीन आदि सीटों पर भी बसपा की अच्छी पैठ है।
लोसुपा-बसपा गठबंधन से किसे फायदा, किसे नुकसान
लोसुपा और बसपा का गठबंधन अगर जारी रहता है तो लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को नुकसान झेलना पड़ सकता है। कांग्रेस के एससी वोट बैंक में भी गठबंधन सेंधमारी करेगा। हिसार सांसद दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के लिए भी यह झटका है, चूंकि उसका बसपा से गठबंधन होने की चर्चाएं चल रही थीं। मौजूदा स्थिति में सबसे अधिक और सीधा नुकसान इनेलो को हुआ है।
लोसुपा-बसपा गठबंधन से किसे फायदा, किसे नुकसान
लोसुपा और बसपा का गठबंधन अगर जारी रहता है तो लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को नुकसान झेलना पड़ सकता है। कांग्रेस के एससी वोट बैंक में भी गठबंधन सेंधमारी करेगा। हिसार सांसद दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के लिए भी यह झटका है, चूंकि उसका बसपा से गठबंधन होने की चर्चाएं चल रही थीं। मौजूदा स्थिति में सबसे अधिक और सीधा नुकसान इनेलो को हुआ है।