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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में रोचक हुआ 'दंगल' हुड्डा बाप-बेटा जीते तो चित भी उनकी पट भी
Mon, 22 Apr 2019 11:47 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 22 Apr 2019 11:47 AM IST
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भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा में लोकसभा चुनाव 2019 का दंगल अब बेहद रोचक हो गया है। भाजपा के बाद कांग्रेस के भी दस महारथी चुनाव मैदान में उतर आए हैं। कांग्रेस ने सबसे बड़ा दांव दो बार के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर खेलकर ये संकेत दे दिए हैं कि पार्टी हरियाणा का रण हर हाल में जीतना चाहती है। हाईकमान का मानना है कि हुड्डा के चुनावी दंगल में दो-दो हाथ करने के लिए उतरने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश आएगा।
वहीं, दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि हुड्डा को उनके विरोधियों ने चुनावी चक्रव्यूह में फंसा दिया है। उनके विरोधी शुरू से ही दिल्ली में यह फील्डिंग कर रहे थे कि सोनीपत से हुड्डा को ही उतारा जाए, वही जिताऊ उम्मीदवार हैं। हुड्डा भी साफ करते रहे कि उनकी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं, मगर हाईकमान के आदेश नहीं टालूंगा। अब हुड्डा के सामने एक नहीं, दो-दो चुनौतियां हैं।
सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक से जिताकर अपना पारंपरिक गढ़ बचाना है तो खुद भी जीत हासिल कर दिल्ली में अपनी धमक बरकरार रखनी है। सोनीपत जाटलैंड हैं, ऐसे में हुड्डा अपनी बादशाहत बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्हें लोकसभा चुनाव का पुराना अनुभव है, इसलिए वह रोहतक व सोनीपत में ऐसी बिसात बिछाना चाहेंगे, जिसे विरोधी काट न सकें। अगर हुड्डा दोनों सीट जीत गए तो चित भी अपनी और पट भी।
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हुड्डा के आने से सोनीपत सीट बेहद हॉट हो गई है। कुरुक्षेत्र में अभय चौटाला बेटे अर्जुन चौटाला को उतार चुके हैं, भाजपा की ओर से राज्य मंत्री नायब सैनी मैदान में हैं, कांग्रेस निर्मल सिंह को लाई है। अब जजपा पर निगाहें हैं कि वह कहीं दिग्विजय चौटाला को न उतार दे। जिससे मुकाबला देवीलाल परिवार की चौथी पीढ़ी के बीच हो जाएगा।
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वहीं, दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि हुड्डा को उनके विरोधियों ने चुनावी चक्रव्यूह में फंसा दिया है। उनके विरोधी शुरू से ही दिल्ली में यह फील्डिंग कर रहे थे कि सोनीपत से हुड्डा को ही उतारा जाए, वही जिताऊ उम्मीदवार हैं। हुड्डा भी साफ करते रहे कि उनकी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं, मगर हाईकमान के आदेश नहीं टालूंगा। अब हुड्डा के सामने एक नहीं, दो-दो चुनौतियां हैं।
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सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक से जिताकर अपना पारंपरिक गढ़ बचाना है तो खुद भी जीत हासिल कर दिल्ली में अपनी धमक बरकरार रखनी है। सोनीपत जाटलैंड हैं, ऐसे में हुड्डा अपनी बादशाहत बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्हें लोकसभा चुनाव का पुराना अनुभव है, इसलिए वह रोहतक व सोनीपत में ऐसी बिसात बिछाना चाहेंगे, जिसे विरोधी काट न सकें। अगर हुड्डा दोनों सीट जीत गए तो चित भी अपनी और पट भी।
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हुड्डा के आने से सोनीपत सीट बेहद हॉट हो गई है। कुरुक्षेत्र में अभय चौटाला बेटे अर्जुन चौटाला को उतार चुके हैं, भाजपा की ओर से राज्य मंत्री नायब सैनी मैदान में हैं, कांग्रेस निर्मल सिंह को लाई है। अब जजपा पर निगाहें हैं कि वह कहीं दिग्विजय चौटाला को न उतार दे। जिससे मुकाबला देवीलाल परिवार की चौथी पीढ़ी के बीच हो जाएगा।