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लोकसभा चुनाव 2019: आनंदपुर साहिब सीट बन गई प्रतिष्ठा का सवाल, और नहीं हो सकता गठबंधन
Tue, 12 Mar 2019 03:39 PM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 12 Mar 2019 03:39 PM IST
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गठबंधनों के दौर में पंजाब की आनंदपुर साहिब सीट सभी पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई। इसके चलते आम आदमी पार्टी और बसपा का गठबंधन नहीं हो सका। वहीं, पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस ने समझौता किया और बसपा को यह सीट दे दी, जिसके बाद गठबंधन बन गया। बसपा का वोट बैंक मुख्य तौर पर दोआबा में है। सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति की आबादी भी यहीं है।
इसमें जालंधर, होशियारपुर और आनंदपुर साहिब सीट का काफी इलाका आता है। बसपा शुरू से ही इस बात पर अड़ी थी कि अगर उसे किसी भी गठबंधन में तीन सीटों पर लड़ना है तो उसे दोआबा की तीनों सीटें ही चाहिए। क्योंकि पंजाब में बाकी जगह उसका उतना आधार नहीं है। बसपा इन तीनों सीटों पर अपने उम्मीदवार भी फाइनल कर चुकी थी। पहले पीडीए के साथ बातचीत चली।
लेकिन बसपा को आनंदपुर साहिब सीट देने पर सहमति नहीं बनी। जिसके बाद बसपा ने पीडीए छोड़ कर आप के साथ बातचीत शुरू कर दी। आप की पहले ही टकसालियों के साथ गठबंधन की बात चल रही थी। तीनों पार्टियों में बाकी तालमेल तो बन गया। समझौते के तहत आप ने जालंधर, होशियारपुर और साथ में विकल्प के तौर पर फिरोजपुर देने पर सहमति जताई। वहीं, टकसालियों को खडूर साहिब, फिरोजपुर और विकल्प के तौर पर गुरदासपुर देने की बात थी।
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लेकिन आनंदपुर साहिब सीट पर पेंच फंसा रहा। आप, शिअद-टकसाली और बसपा, तीनों ही यह सीट चाहते थे। जिसके चलते कई दिनों से गतिरोध चल रहा था। इस बीच सुखपाल खैरा की अगुवाई वाले पीडीए ने फिर मंथन किया। दूसरी पार्टियों को आनंदपुर साहिब सीट बसपा को देने के लिए राजी किया। सोमवार को खैरा के आवास पर हुई बैठक में डील फाइनल हो गई। साथ ही बसपा दोबारा पीडीए का हिस्सा बन गई।
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इसमें जालंधर, होशियारपुर और आनंदपुर साहिब सीट का काफी इलाका आता है। बसपा शुरू से ही इस बात पर अड़ी थी कि अगर उसे किसी भी गठबंधन में तीन सीटों पर लड़ना है तो उसे दोआबा की तीनों सीटें ही चाहिए। क्योंकि पंजाब में बाकी जगह उसका उतना आधार नहीं है। बसपा इन तीनों सीटों पर अपने उम्मीदवार भी फाइनल कर चुकी थी। पहले पीडीए के साथ बातचीत चली।
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लेकिन बसपा को आनंदपुर साहिब सीट देने पर सहमति नहीं बनी। जिसके बाद बसपा ने पीडीए छोड़ कर आप के साथ बातचीत शुरू कर दी। आप की पहले ही टकसालियों के साथ गठबंधन की बात चल रही थी। तीनों पार्टियों में बाकी तालमेल तो बन गया। समझौते के तहत आप ने जालंधर, होशियारपुर और साथ में विकल्प के तौर पर फिरोजपुर देने पर सहमति जताई। वहीं, टकसालियों को खडूर साहिब, फिरोजपुर और विकल्प के तौर पर गुरदासपुर देने की बात थी।
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लेकिन आनंदपुर साहिब सीट पर पेंच फंसा रहा। आप, शिअद-टकसाली और बसपा, तीनों ही यह सीट चाहते थे। जिसके चलते कई दिनों से गतिरोध चल रहा था। इस बीच सुखपाल खैरा की अगुवाई वाले पीडीए ने फिर मंथन किया। दूसरी पार्टियों को आनंदपुर साहिब सीट बसपा को देने के लिए राजी किया। सोमवार को खैरा के आवास पर हुई बैठक में डील फाइनल हो गई। साथ ही बसपा दोबारा पीडीए का हिस्सा बन गई।
आप-टकसालियों में इसी सीट पर फंसा पेंच
आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) के बीच भी आनंदपुर साहिब सीट को लेकर ही पेंच फंसा हुआ है। आप यहां से नरिंदर शेरगिल को पहले ही उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। जबकि, टकसालियों ने पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर को शामिल करते समय उन्हें यहां से चुनाव लड़ाने का आश्वासन दे दिया था।
सूत्रों के मुताबिक, आप ने टकसालियों को ऑफर दिया कि बीर दविंदर को आप के चुनाव निशान पर बठिंडा जैसी हाई प्रोफाइल सीट से चुनाव लड़वा दिया जाए। उन्हें यह भी ऑफर दिया गया कि अगर वे चाहें तो डॉ. धरमवीर गांधी को अपने टिकट पर पटियाला से चुनाव लड़ा दें। उन्हें सिर्फ सुखपाल खैरा से समस्या है।
आप ने बसपा और टकसालियों को यह प्रस्ताव भी दिया कि बाकी पंजाब में समझौता कर लें और आनंदपुर साहिब सीट पर तीनों ही अपने उम्मीदवार उतारें। लेकिन बसपा के साथ बात नहीं बनी। टकसाली भी राजी नहीं हैं। वह एक-दो दिन में अपनी स्थिति आप को स्पष्ट करेंगे। लेकिन आसार ऐसे बन रहे हैं कि आनंदपुर साहिब सीट के चलते आप और टकसालियों के बीच गठबंधन भी टूट सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, आप ने टकसालियों को ऑफर दिया कि बीर दविंदर को आप के चुनाव निशान पर बठिंडा जैसी हाई प्रोफाइल सीट से चुनाव लड़वा दिया जाए। उन्हें यह भी ऑफर दिया गया कि अगर वे चाहें तो डॉ. धरमवीर गांधी को अपने टिकट पर पटियाला से चुनाव लड़ा दें। उन्हें सिर्फ सुखपाल खैरा से समस्या है।
आप ने बसपा और टकसालियों को यह प्रस्ताव भी दिया कि बाकी पंजाब में समझौता कर लें और आनंदपुर साहिब सीट पर तीनों ही अपने उम्मीदवार उतारें। लेकिन बसपा के साथ बात नहीं बनी। टकसाली भी राजी नहीं हैं। वह एक-दो दिन में अपनी स्थिति आप को स्पष्ट करेंगे। लेकिन आसार ऐसे बन रहे हैं कि आनंदपुर साहिब सीट के चलते आप और टकसालियों के बीच गठबंधन भी टूट सकता है।